AI की असली चुनौती रोजगार और रचनात्मकता पर पड़ने वाले असर में छिपी है
यह हैरानी की बात है कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर हमारी जिंदगी अभी से चिंताओं से भरी हुई क्यों नहीं है। एआई ऐसी तकनीक है जिसका प्रभाव पहले सामने आई किसी भी तकनीक से अलग हो सकता है। इसके बावजूद, इसके संभावित असर को लेकर समाज में एक तरह की बेफिक्री […]
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शिक्षा पर खर्च बढ़े, राज्यों को मिले अधिक अधिकार, तभी युवा आबादी बनेगी विकास का आधार
हाल ही में हुए जंतर मंतर आंदोलन ने दिखाया कि सरकार ने 30 वर्ष से कम आयु के लोगों की चिंताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया है जबकि वे देश की आबादी का करीब आधा हिस्सा हैं। इस आंदोलन का नेतृत्व जेनज़ी युवाओं द्वारा किया गया जिनमें से कई उच्च शिक्षा में थे। साथ ही […]
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Editorial: वृद्धि के लिए नियमों में सुधार जरूरी, राज्यों के बीच नियामकीय बाधाएं दूर करने पर जोर
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने मजबूत, टिकाऊ, संतुलित और समावेशी वृद्धि (एसएसबीआईजी) पर जो नई जी20 रिपोर्ट पेश की है वह नियामकीय और संस्थागत सुधारों को वृद्धि के समक्ष मौजूद चुनौतियों के केंद्र में रखती है। रिपोर्ट का अनुमान है कि मध्यम अवधि में जी20 देश केवल 3 फीसदी की वृद्धि दर से बढ़ेंगे जो […]
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टाटा समूह के दोहरे संकट से उठे नेतृत्व और नियंत्रण को लेकर बड़े सवाल
टाटा समूह एक पारिवारिक व्यवसाय है या पेशेवर रूप से प्रबंधित संस्था? क्या टाटा ट्रस्ट्स, जो टाटा संस (नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक के इस विशाल समूह की होल्डिंग कंपनी) में 66 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा शेयरधारक है, पारंपरिक अर्थों में एक प्रमोटर है? समूह के शीर्ष नेतृत्व में टाटा नाम का कितना […]
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