सोमवार को निफ्टी में गिरावट की मुख्य वजह इन्फोसिस की अगुआई में आईटी कंपनियों के शेयरों में नरमी रही। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमत 97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने और दो बड़े आईपीओ आने की संभावना (जिससे शेयर बाजार से पैसा निकल सकता है) से भी बाजार पर दबाव बना।
आईटी सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ा क्योंकि यह भूराजनीतिक तनाव के प्रति संवेदनशील है। अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग को लेकर चिंता बड़ी आर्थिक चुनौती बन गई हैं, इसलिए निवेशक आईटी सेक्टर से दूर रह रहे हैं। फिलहाल, निफ्टी 50 इंडेक्स में इस सेक्टर का भार 8.5 फीसदी है।
निफ्टी 118.55 अंक यानी 0.5 फीसदी गिरकर 23,779.15 पर बंद हुआ। जुलाई के मध्य के बाद यह पहला मौका है जब यह 23,800 के नीचे बंद हुआ है। सेंसेक्स 382.62 अंक यानी 0.5 फीसदी गिरकर 76,132.81 पर टिका। निफ्टी अब 7 अगस्त के मुकाबले 3.2 फीसदी नीचे है और अपने 52 हफ़्ते के उच्चतम स्तर 26,373.20 से 9.8 फीसदी पीछे है।
निफ्टी आईटी इंडेक्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ा और यह 2.28 फीसदी गिरकर 29,995.20 पर बंद हुआ। इसमें इन्फोसिस के शेयर 3.76 फीसदी गिरकर 1,087.5 पर आ गए और एक ही दिन में कंपनी की मार्केट वैल्यू में लगभग 17,243 करोड़ रुपये की कमी हो गई। इंडेक्स में इन्फोसिस की हिस्सेदारी 27 फीसदी है।
टेक महिंद्रा, एम्फैसिस और विप्रो के शेयरों में भी लगभग 2 फीसदी की गिरावट आई, जबकि टीसीएस के शेयर 1.5 फीसदी गिरे। निफ्टी आईटी इंडेक्स में एक महीने में 4.9 फीसदी और एक साल में 13.4 फीसदी की गिरावट आई है। इस तरह, 12 महीने के आधार पर यह सबसे कमजोर सेक्टर बन गया है। इससे पहले 12 महीने की अवधि के आधार पर एफएमसीजी सेक्टर में 19 फीसदी की गिरावट आई थी।
भारतीय आईटी इंडेक्स अभी मुश्किल दौर से गुजर रहा है। कुछ निवेशकों के लिए यह सेक्टर फायदेमंद निवेश का दांव गया है, लेकिन वे अभी भी सावधानी से खरीदारी करना चाहते हैं। खास सेक्टर या थीम पर फोकस करने वाले फंडों ने आईटी में दांव लगाना पूरी तरह बंद कर दिया है।
कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटी की 25 अगस्त की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है, हमारा मानना है कि हाल की घटनाओं से चार बातें सामने आई हैं – कीमतों पर भारी दबाव है क्योंकि सभी की वृद्धि की उम्मीदों को पूरा करने के लिए पर्याप्त सौदे नहीं हैं।
आईटी सेवा की शाश्वत वैल्यू को लेकर चिंता घटी हैं, ओपन सोर्स और क्लोज्ड मॉडल के बीच बहस जारी है और नई कंपनियां बाजार हिस्सेदारी हासिल करती रहेंगी। हमारी पसंदीदा कंपनियां टेक महिंद्रा, कोफोर्ज, हेक्सावेयर और इंडिजिन हैं। इसी रिपोर्ट में इन्फोसिस और टीसीएस की रेटिंग खरीदें से घटाकर जोड़ें और एलटीएम की रेटिंग घटाएं कर दी गई।
शुरुआत में यह बात चल रही थी कि एआई भारतीय आईटी सेक्टर को खत्म कर देगा, लेकिन बाद में चर्चा इस बात पर आ गई कि एआई पर खर्च बढ़ रहा है, खासकर एनवीडिया के नतीजों के बाद, जिसमें दूसरी तिमाही में कुल राजस्व पिछले साल के मुकाबले 106 फीसदी बढ़कर 96.2 अरब डॉलर हो गया।
किसी एंटरप्राइज में मॉडल और एजेंट प्लग ऐंड प्ले नहीं होते हैं और एफडीई और फ्रंटियर मॉडल लैब्स बनाने के कारण हाइपरस्केलर्स को बहुत सारे कामों के लिए भारतीय आईटी सेवाओं की जरूरत होगी। हालांकि यह खबर सेक्टर के लिए मजबूती लाने वाली थी, लेकिन सच यह है कि यह सेक्टर भूराजनीतिक तनाव के प्रति संवेदनशील है, जहां तेल की कीमतें और ब्याज दरें एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं।
साथ ही, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनाई जैसी कंपनियां स्थानीय मुद्रा के लिहाज लगभग 3 फीसदी की दर से बढ़ रही हैं, जबकि टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो अपनी हालिया तिमाहियों के आधार पर लगभग 2.6 फीसदी की दर से बढ़ रही हैं। कोटक की रिपोर्ट में कहा गया है कि आईटी सेक्टर बढ़ तो रहा है, लेकिन एआई भारतीय कारोबार के लिए उपलब्ध अवसरों के दायरे को कम कर देगा।
बाजार को चिंता है कि निफ्टी के 23,800 से नीचे बंद होने से निफ्टी के 23,750 से नीचे कारोबार करने का नया स्तर खुल सकता है। निकट भविष्य में बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी यील्ड/फेड की टिप्पणियों और जियो व एनएसई के आने वाले बड़े आईपीओ पर निर्भर करेगी। इन आईपीओ की वजह से बाजार में मुनाफावसूली भी हो रही है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और भूराजनीतिक तनाव के अलावा भारत में गुलजार आईपीओ बाजार ने भी शेयर बाजार पर असर डाला है। अब फोकस तेजी से बढ़ते प्राथमिक बाजार पर है।