Editorial: अर्थव्यवस्था को चाहिए स्थिर नीति
भारत द्वारा आर्थिक सुधारों की राह अपनाने के करीब 35 वर्ष बाद भी देश की अर्थव्यवस्था द्वारा पूरी संभावनाओं का दोहन करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना है। नीति आयोग के सदस्य राजीव गाैबा ने इस सप्ताह भारतीय उद्योग परिसंघ यानी सीआईआई के सालाना व्यापार सम्मेलन में भारतीय नीति निर्माण की एक बड़ी […]
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कंपनियों के धन से अच्छी पत्रकारिता हो तो कोई बुराई नहीं
डेविड फ्रैंकल निर्देशित फिल्म ‘द डेविल वेअर्स प्राडा 2’ के बारे में चौंकाने वाली बात यह है कि यह फिल्म फैशन की दुनिया के बारे में नहीं बल्कि पत्रकारिता की रवायत को बचाने से जुड़ी है। वर्ष 2006 की उस सुपरहिट फिल्म का सीक्वल, जिसकी कहानी फैशन की दुनिया पर आधारित थी, बेहतरीन लेखन, तथ्यों […]
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देश के श्रम कानूनों को मिले पुरातन समझौतों से मुक्ति
कर्नाटक ने वर्ष 2023 में जब अपने कारखाना अधिनियम में संशोधन कर स्वीकृत कारखाना श्रमिकों के लिए 12 घंटे की शिफ्ट की अनुमति दी तब ट्रेड यूनियनों ने जिनेवा स्थित अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में तर्क दिया गया कि यह बदलाव भारत की उस प्रतिबद्धता का उल्लंघन करता है जो […]
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आर्थिक अनुमानों में विरोधाभास! क्या वाकई सुरक्षित है भारत का ‘मिडिल क्लास’ और घरेलू बजट?
पश्चिम एशिया के संघर्ष और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा के मोर्चे पर अनिश्चितता के बावजूद, नीति-निर्माता यह स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि घरेलू खपत इस उथल-पुथल के बीच हमारी सबसे बड़ी मजबूत कड़ी बनेगी। शेयर बाजार चढ़ता और गिरता रहा है और इसको लेकर एक कथ्य यह है कि ये केवल अस्थायी झटके हैं […]
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