facebookmetapixel
Advertisement
ऑटो सेक्टर को PLI स्कीम के तहत FY27 में ₹4,700 करोड़ देगी सरकार, निवेश बढ़ाने की तैयारी तेजटाटा कैपिटल का रिवॉल्विंग क्रेडिट एक्सपोजर 5% से कम, RBI के नए प्रस्ताव से कंपनी पर पड़ेगा सीमित असररूस से तेल खरीद पर 100% अमेरिकी टैरिफ की धमकी, भारत-अमेरिका वार्ता में बढ़ सकता है दबाव‘ग्रामीण भारत तक पहुंचे बैंकिंग AI, तभी असली सफलता होगी हासिल’, SBI चेयरमैन सीएस शेट्टी की सलाहपांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट तेज, भाजपा-सपा-कांग्रेस-बसपा समेत दलों ने कसी कमरBrand Canvas 2026: VIT की ‘पावर रेंजर्स’ ने जीता बीस्मार्ट की पहली विज्ञापन प्रतियोगिता का खिताबY2K से AI के दौर तक: 1991 के आर्थिक सुधारों ने कैसे बदल डाली भारतीय IT इंडस्ट्री की पूरी तस्वीरअमेरिका में क्रिप्टो बिल से भारत पर बढ़ा दबाव, ससंदीय समिति ने VDA कानून बनाने की मांग कीनई मर्सिडीज-BMW हुई मंहगी तो पुरानी लक्जरी कारों की बिक्री में आया उछाल, युवा खरीदारों की बनी पसंद‘जिम्मेदारी से करें AI का इस्तेमाल, हर फैसले के लिए आप होंगे जवाबदेह’, RBI गवर्नर ने दी बैंकों को हिदायत

Editorial: IMF की चेतावनी, भू-राजनीतिक तनाव से वैश्विक विकास धीमा

Advertisement

IMF के नवीनतम वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में यह स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है कि भू-राजनीतिक तनावों की वजह से उत्पन्न वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता में इजाफा हो रहा है

Last Updated- April 14, 2026 | 10:00 PM IST
IMF

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के नवीनतम वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में यह स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है कि भू-राजनीतिक तनावों की वजह से उत्पन्न वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता में इजाफा हो रहा है। आईएमएफ के पूर्वानुमानों पर पूरी दुनिया की नजर रहती है और इसमें विभिन्न परिदृश्य प्रस्तुत किए गए हैं। संदर्भित पूर्वानुमान के अनुसार, विश्व अर्थव्यवस्था के 2026 में 3.1 फीसदी की दर से विस्तार करने की उम्मीद है, जो 2025 के 3.4 फीसदी की तुलना में धीमी है। वैश्विक समग्र मुद्रास्फीति दर 2026 में बढ़कर 4.4 फीसदी होने की संभावना है।

आईएमएफ का कहना है कि अगर जंग नहीं होती तो वृद्धि पूर्वानुमानों में सुधार हो सकता था। विपरीत परिदृश्य में ईंधन कीमतों में बढ़ोत्तरी का अनुमान है जिससे 2026 में वैश्विक वृद्धि घटकर 2.5 फीसदी रह सकती है। अधिक गंभीर हालात में मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 5.4 फीसदी तक पहुंच सकती है। गंभीर हालात से तात्पर्य ऊर्जा संरचनाओं को और अधिक क्षति पहुंचने से है जिससे वैश्विक वृद्धि घटकर 2 फीसदी तक आ सकती है। ऐसे में समग्र मुद्रास्फीति 2027 तक 6 फीसदी के पार जा सकती है।

युद्ध और लगातार बने हुए भू-राजनीतिक तनावों का प्रभाव विभिन्न देशों में अलग-अलग हो सकता है। ऊर्जा आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर इसका अधिक असर पड़ने की संभावना है। भारत के लिए, जनवरी की तुलना में चालू वर्ष की वृद्धि दर का अनुमान 0.1 फीसदी अंक बढ़ाकर 6.5 फीसदी कर दिया गया है। इसमें पिछले वर्ष की मजबूत गति और इस तथ्य को ध्यान में रखा गया है कि अमेरिकी शुल्क भारतीय वस्तुओं पर काफी हद तक कम हो गए हैं।

बहरहाल, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ये पूर्वानुमान पश्चिम एशिया की स्थिति पर निर्भर करते हुए तेजी से बदल सकते हैं। समय पर समाधान से परिणामों को संदर्भित पूर्वानुमान के करीब बनाए रखने में मदद मिलेगी।

समाचारों से संकेत मिलता है कि इस्लामाबाद में वार्ता विफल होने के बाद भी अमेरिका और ईरान बातचीत जारी रखने के इच्छुक हैं। बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि बातचीत किन परिस्थितियों में होती हैं। यह महत्त्वपूर्ण है क्योंकि स्थिति की जटिलता और दोनों पक्षों की घोषित स्थितियों को देखते हुए, एक स्थायी समाधान तक पहुंचने में वक्त लग सकता है।

इस बीच, यह आवश्यक होगा कि क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति बहाल हो जाए। अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर रही है। यद्यपि अमेरिका ने कहा है कि वह अन्य देशों के जहाज गुजरने देगा, लेकिन उसकी यह कार्रवाई वार्ताओं और ईरान की स्थिति को प्रभावित कर सकती है। इस बीच लेबनान पर इजरायल के हमले जारी हैं। इसके भी प्रभाव हो सकते हैं।

तेजी से बदलती स्थिति को देखते हुए, किसी भी बात को निश्चित रूप से कहना कठिन है। इससे नीति-निर्माताओं और व्यवसायों के लिए निर्णय लेना जटिल हो जाता है, विशेषकर भारत जैसे देश में जो ऊर्जा आयात पर बहुत अधिक निर्भर है, खासकर इस क्षेत्र से। वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि अभी तक मुद्रास्फीति के आंकड़ों में पूरी तरह परिलक्षित नहीं हुई है क्योंकि इसका सीमित असर हुआ है।

मार्च के लिए खुदरा मुद्रास्फीति दर 3.4 फीसदी रही, जबकि पिछले महीने में यह 3.2 फीसदी थी। यह स्थिति पेट्रोल-डीजल की कीमतों में समायोजन के साथ काफी बदल सकती है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें आम तौर पर वृद्धि को कम करती हैं और मुद्रास्फीति को बढ़ाती हैं।

वर्तमान झटका, यदि बरकरार रहता है, तो ऊंची तेल कीमतों की स्थिति सामान्य अनुमान की तुलना में अधिक प्रभाव डाल सकती है। उदाहरण के लिए, गैस की उपलब्धता एक समस्या है जो उत्पादन को प्रभावित कर रही है और अंततः कीमतों में परिलक्षित होगी।

भारत के लिए एक अतिरिक्त जटिलता यह है कि इस साल सामान्य से कमजोर मानसून की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा है कि इस वर्ष मानसून सामान्य से कम रहेगा और दीर्घकालिक औसत का 92 फीसदी होगा। कृषि उत्पादन पर असर पड़ने से खाद्य मुद्रास्फीति दर भी बढ़ सकती है।

इसलिए, भारतीय नीति-निर्माताओं को सतर्क रहना होगा। जहां तक संभव हो, सरकार को आपूर्ति के दबाव को कम करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि ईंधन और खाद्य मुद्रास्फीति दरों में वृद्धि की संभावना मुद्रास्फीति की अपेक्षाओं को प्रभावित न करे।

Advertisement
First Published - April 14, 2026 | 10:00 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement