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पेंशन में सुनिश्चित रिटर्न का विकल्प लाने की तैयारी, PFRDA की वित्त मंत्रालय से चर्चा

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ग्राहकों को सुनिश्चित भुगतान देने के विकल्प की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है और एनपीएस वात्सल्य के एग्जिट नियमों में भी ढील दी गई

Last Updated- September 06, 2026 | 11:39 PM IST
Pension
प्रतीकात्मक तस्वीर

पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) एक ऐसी पेंशन योजना शुरू करने के लिए वित्त मंत्रालय के साथ बातचीत कर रहा है जिसमें गारंटीशुदा रिटर्न की पेशकश की जाएगी। लेकिन यह प्रस्ताव अभी भी चर्चा के दौर में है क्योंकि गारंटीशुदा भुगतान की सुविधा देने के लिए कोष प्रबंधकों को बाजार जोखिम से बचाव (हेजिंग) करना होगा। अभी पेंशन फंडों को केवल डेरिवेटिव तक सीमित और सशर्त पहुंच की इजाजत है।

इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा, ‘नियामक गारंटीड रिटर्न वाली नई योजना शुरू करने के लिए वित्त मंत्रालय के साथ बातचीत कर रहा है और इस पर अभी काम चल रहा है। हम इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे हैं लेकिन इसकी लागत ज्यादा आएगी। सुनिश्चित रिटर्न देने के लिए हेजिंग और दूसरे तरीकों की जरूरत होती है। हमारी सबसे बड़ी खासियत हमेशा कम लागत रही है इसलिए हमें लागत को काबू में रखना होगा।’

पीएफआरडीए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के लिए न्यूनतम गारंटीड रिटर्न योजना पर काम कर रहा है लेकिन यह योजना अभी तक लॉन्च नहीं हुई है। नियामक अंशदाताओं के लिए सुनिश्चित भुगतान वाले विकल्प पर भी विचार कर रहा है।

एक सूत्र ने कहा, ‘फिलहाल हम डेरिवेटिव का इस्तेमाल नहीं करते हैं लेकिन हम नियामकों के साथ मिलकर इस संभावना का अध्ययन कर रहे हैं। उद्योग में फॉरवर्ड रेट एग्रीमेंट्स (एफआरए) का इस्तेमाल धीरे-धीरे विकसित हो रहा है और भविष्य में पेंशन फंडों को भी डेरिवेटिव तक पहुंच मिल सकती है। हालांकि इसके लिए उन्हें इनका इस्तेमाल करने के लिए जरूरी तंत्र भी तैयार करना होगा।’

इसके अलावा पीएफआरडीए ने पिछले वित्त वर्ष और चालू वित्त वर्ष में अब तक एनपीएस के नियमों में कई बदलाव किए हैं। दिसंबर 2025 में नियामक ने ‘साझा योजना’ और ‘विविध योजना ढांचा’ के तहत गैर-सरकारी अंशदाताओं के लिए योजना से बाहर निकलने (एग्जिट) और पैसे निकालने के नियमों को आसान बनाया है।

जिन अंशदाताओं की बचत 12 लाख रुपये से ज्यादा थीं उनके लिए एग्जिट के समय एकमुश्त पैसे निकालने की सीमा पहले के 60 फीसदी से बढ़ाकर कुल कोष का 80 फीसदी कर दिया गया है और उसी हिसाब से अनिवार्य वार्षिकी (एन्युटी) वाले हिस्से को कम कर दिया गया। उसी महीने पीएफआरडीए ने पेंशन फंडों को जिंसों में भी एनपीएस के पैसे को लगाने की अनुमति दी है।

जनवरी 2026 में पीएफआरडीए ने ऐसा ढांचा मंजूर किया जिसके तहत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक स्वतंत्र रूप से एनपीएस परिसंपत्तियों का प्रबंधन करने वाले पेंशन फंडों को प्रायोजित कर सकेंगे। इसके अलावा एनपीएस ट्रस्ट के बोर्ड में तीन नए न्यासियों की नियुक्ति की गई।

ग्राहकों को सुनिश्चित भुगतान देने के विकल्प की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है और एनपीएस वात्सल्य के एग्जिट नियमों में भी ढील दी गई। एनपीएस वात्सल्य के तहत माता-पिता अपने नाबालिग बच्चों के लिए एनपीएस खाते खोल सकते हैं।

चालू वित्त वर्ष में जून 2026 में पीएफआरडीए ने पॉइंट्स ऑफ प्रजेंस के लिए ऑडिट नियमों को और कड़ा किया। पॉइंट्स ऑफ प्रजेंस वे मध्यस्थ हैं जिनके माध्यम से ग्राहक एनपीएस खाते खोलते और संचालित करते हैं।

10,000 या उससे अधिक ग्राहकों वाले ऐसे मध्यस्थ के लिए वार्षिक ऑडिट अनिवार्य कर दिया गया जबकि छोटे पॉइंट्स ऑफ प्रजेंस के लिए कम आवृत्ति पर ऑडिट का प्रावधान किया गया। इन ऑडिट में योगदान, निकासी और सेवा अनुरोधों से जुड़े परिचालन नियंत्रणों की भी जांच की जाएगी।

इसके अलावा जुलाई में संशोधित सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी (सीआरए) शुल्क ढांचा लागू हुआ। इससे टियर 1 और टियर 2 खातों का सालाना रखरखाव शुल्क बदल गया और लगातार चार तिमाही तक कोई योगदान नहीं करने वाले निष्क्रिय खातों के पर शुल्क कम किया गया और 1,000 रुपये तक शेष राशि वाले टियर 2 खातों पर शुल्क को माफ कर दिया गया।

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First Published - September 6, 2026 | 11:39 PM IST

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