आजकल इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े या घर का सामान खरीदते समय ‘नो-कॉस्ट EMI’ या ‘इंटरेस्ट फ्री EMI’ का ऑफर आसानी से मिल जाता है। एक साथ बड़ी रकम देने के बजाय उसे हर महीने की छोटी-छोटी किस्तों में चुकाना बजट के हिसाब से आसान लगता है। खासकर नौकरीपेशा युवाओं के लिए यह महीने की कमाई और खर्च के बीच संतुलन बनाने में मदद कर सकता है। लेकिन किसी ऑफर में ‘जीरो परसेंट इंटरेस्ट’ लिखा होने का मतलब यह नहीं है कि आपको कोई अतिरिक्त पैसा नहीं देना होगा या इसमें कोई जोखिम नहीं है।
किस्तों में भुगतान की सुविधा कई बार खरीदारी को इतना आसान बना देती है कि लोग अपनी जरूरत और बजट देखे बिना सामान खरीद लेते हैं। बाद में यही किस्तें महीने के दूसरे जरूरी खर्चों पर भारी पड़ सकती हैं।
फिनटेक प्लेटफॉर्म POP के फाउंडर भार्गव एर्रांगी के मुताबिक, युवाओं के लिए अक्सर परेशानी सामान की कीमत नहीं, बल्कि खरीदारी के समय और महीने की कमाई के बीच तालमेल बैठाने की होती है। ‘इंटरेस्ट फ्री किस्तें’ इस अंतर को भरने में मदद कर सकती हैं और इसके लिए बचत को तुरंत खर्च करने की जरूरत भी नहीं पड़ती। हालांकि, इसका फायदा तभी है जब ग्राहक को प्लान की सभी शर्तों और खर्चों की पूरी जानकारी हो। अगर आप भी बिना ब्याज वाली किस्तों पर कोई सामान खरीदने की सोच रहे हैं, तो फैसला लेने से पहले इन पांच बातों को जरूर जांच लें।
कोई भी ऐसा ऑफर लेने से पहले यह जरूर देख लें कि आखिर में आपको कुल कितनी रकम चुकानी होगी। भले ही ऑफर में ब्याज जीरो बताया गया हो, लेकिन इसके साथ प्रोसेसिंग फीस, सुविधा शुल्क या टैक्स जैसे दूसरे खर्च जुड़े हो सकते हैं।
मान लीजिए आप 30,000 रुपये का सामान तीन महीने की किस्त पर खरीद रहे हैं। ऐसे में सामान्य तौर पर आपको हर महीने 10,000 रुपये देने होंगे। लेकिन अगर इसके साथ प्रोसेसिंग फीस या कोई दूसरा शुल्क जुड़ गया, तो आपकी कुल भुगतान की रकम 30,000 रुपये से ज्यादा हो सकती है।
भार्गव एर्रांगी के मुताबिक, ब्याज नहीं लगने का मतलब यह नहीं है कि खरीदारी पर कोई अतिरिक्त खर्च भी नहीं होगा। इसलिए सामान खरीदने से पहले यह जरूर हिसाब लगा लें कि एकमुश्त भुगतान करने पर कितने पैसे देने होंगे और किस्तों में खरीदने पर कुल कितना खर्च आएगा।
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किस्तों पर सामान खरीदने से पहले यह अच्छी तरह समझ लें कि आपको कुल कितनी किस्तें देनी हैं, हर किस्त कितने रुपये की होगी और पैसा किस तारीख को देना है। ‘पे-इन-3’ जैसे छोटे समय के प्लान में भुगतान कुछ तय किस्तों में बंट जाता है, जिससे महीने का बजट संभालना आसान लग सकता है। लेकिन यह भी देखना जरूरी है कि इन किस्तों के बाद आपके बाकी खर्चों के लिए पर्याप्त पैसा बचेगा या नहीं।
किस्त का फैसला करते समय घर का किराया, बिजली-पानी के बिल, पहले से चल रही EMI और हर महीने की बचत जैसे जरूरी खर्चों को ध्यान में रखें। केवल यह देखकर प्लान न चुनें कि किस्त की रकम छोटी है।
समय पर किस्त चुकाने से क्रेडिट हिस्ट्री को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है, लेकिन यह तभी संभव है जब संबंधित कंपनी आपके भुगतान की जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को देती हो। वहीं, समय पर किस्त भरने का मतलब यह नहीं है कि क्रेडिट स्कोर हर हाल में बढ़ ही जाएगा।
किसी भी किस्त को समय पर नहीं चुकाने पर आपका सस्ता दिखने वाला प्लान महंगा पड़ सकता है। इसलिए खरीदारी करने से पहले यह जरूर पता कर लें कि किस्त देर से भरने पर कितना जुर्माना लगेगा और ऐसी स्थिति में दूसरी क्या शर्तें लागू होंगी।
लोन चुकाने वाले प्लेटफॉर्म जावो के फाउंडर कुंदन शाही के मुताबिक, ग्राहकों को किस्त समय पर न भर पाने की स्थिति में लगने वाले जुर्माने की जानकारी पहले ही ले लेनी चाहिए। खासकर छोटी खरीदारी में लोग अक्सर कम रकम वाली किस्त की तारीख को गंभीरता से नहीं लेते या उसे भूल जाते हैं।
एक-दो बार छोटी रकम की किस्त छूटने की बात भले ही मामूली लगे, लेकिन बार-बार भुगतान में देरी आपके क्रेडिट रिकॉर्ड पर असर डाल सकती है। इसका असर आगे चलकर लोन या क्रेडिट कार्ड लेने में भी पड़ सकता है।
किस्तों पर खरीदारी करने से पहले यह जानना भी जरूरी है कि आपको यह सुविधा आखिर कौन दे रहा है। यह जांच लें कि पीछे से फाइनेंस करने वाली कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में पंजीकृत बैंक या एनबीएफसी है या नहीं। साथ ही, कंपनी की ग्राहक सेवा कैसी है और किसी परेशानी की स्थिति में शिकायत कहां और कैसे दर्ज की जा सकती है, इसकी जानकारी भी पहले से ले लें।
अगर किस्त का भुगतान क्रेडिट कार्ड के जरिए हो रहा है, तो इसका असर आपकी कार्ड लिमिट पर भी पड़ सकता है। कुंदन शाही के मुताबिक, किस्त का पूरा भुगतान होने तक क्रेडिट कार्ड की कुल लिमिट का एक हिस्सा इस्तेमाल के लिए उपलब्ध नहीं रहता। ऐसे में अचानक किसी जरूरी खर्च की जरूरत पड़ने पर आपके पास कम क्रेडिट लिमिट बच सकती है।
इसके अलावा, यह भी पता कर लें कि किस्त की सुविधा देने वाली कंपनी आपका क्रेडिट रिकॉर्ड किस तरह जांच रही है। अगर सिर्फ सामान्य क्रेडिट जांच की जा रही है तो स्थिति अलग हो सकती है, लेकिन बिना आपकी जानकारी के की गई कड़ी क्रेडिट जांच का असर क्रेडिट स्कोर पर पड़ सकता है। इसलिए आवेदन करने से पहले इस शर्त को भी अच्छी तरह समझ लें।
किस्तों पर खरीदा गया सामान अगर वापस करना पड़े या ऑर्डर रद्द करना हो, तो मामला थोड़ा पेचीदा हो सकता है। कई बार ग्राहक सामान तो वापस कर देता है, लेकिन रिफंड की रकम खाते में आने में समय लग जाता है। इसी बीच अगली किस्त की तारीख आ सकती है और बैंक खाते से पैसा कट सकता है।
इसलिए किस्त का विकल्प चुनने से पहले यह जरूर पता कर लें कि सामान लौटाने या ऑर्डर रद्द करने पर किस्त का क्या होगा। यह भी जानें कि किस्त अपने आप बंद हो जाएगी या इसके लिए आपको बैंक या किस्त देने वाली कंपनी से अलग से संपर्क करना पड़ेगा।
किसी किस्त योजना को चुनते समय सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि उस पर ब्याज नहीं लग रहा। सबसे जरूरी सवाल यह है कि क्या आप अपनी बाकी जरूरतों और वित्तीय जिम्मेदारियों के साथ इस किस्त को हर महीने आसानी से चुका पाएंगे।
कुंदन शाही के मुताबिक, किस्त योजना का चुनाव केवल ब्याज दर के आधार पर नहीं करना चाहिए। इसकी कुल लागत, आपके क्रेडिट रिकॉर्ड पर पड़ने वाला असर, नियमों की साफ जानकारी और भुगतान में मिलने वाली सुविधा को भी ध्यान में रखना चाहिए।
किस्त लेने से पहले तीन सवालों के जवाब आपके पास बिल्कुल साफ होने चाहिए। कुल कितने रुपये देने होंगे, किस्त की तारीखें क्या हैं और समय पर भुगतान न करने पर क्या होगा। अगर इन सवालों के जवाब स्पष्ट नहीं हैं, तो ऐसे ऑफर को लेने से पहले दोबारा सोच लेना बेहतर है।