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31 जुलाई के बाद 31 अगस्त भी बीत गया! घबराएं नहीं, जानें ITR फाइलिंग से जुड़ी अगली जरूरी तारीखें व नियम

31 जुलाई और 31 अगस्त की डेडलाइन बीतने के बाद भी टैक्सपेयर्स बिलेटेड, रिवाइज्ड और अपडेटेड ITR के जरिए पेनल्टी और जरूरी शर्तों के साथ आसानी से रिटर्न भर सकते हैं

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ऋषभ राज   
Last Updated- September 04, 2026 | 4:09 PM IST

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की दो जरूरी तारीख 31 जुलाई और 31 अगस्त निकल चुकी है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि टैक्सपेयर्स के लिए रिटर्न भरने का मौका पूरी तरह खत्म हो गया है। अगर आप या आपकी कंपनी तय समय तक ITR फाइल नहीं कर पाए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। अलग-अलग तरह के टैक्स मामलों के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने आगे की डेडलाइन भी तय की हैं। इनमें टैक्स ऑडिट, ट्रांसफर प्राइसिंग और बिलेटेड रिटर्न जैसी कैटेगरी शामिल हैं। ऐसे में अब इन सभी की अगली तारीखों को समझना जरूरी है।

ऑडिट मामलों में अलग होती है ITR की डेडलाइन

जिन टैक्सपेयर्स के लिए इनकम या कारोबार के आधार पर टैक्स ऑडिट जरूरी होता है, उनके लिए 31 अगस्त की ITR फाइल करने की डेडलाइन लागू नहीं होती। ऐसे मामलों में पहले 30 सितंबर तक टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होती है। इसके बाद संबंधित टैक्सपेयर्स 31 अक्टूबर तक अपना मूल ITR फाइल कर सकते हैं।

इसी तरह, जिन कारोबारों में इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन या कुछ खास घरेलू लेनदेन होते हैं और उन पर ट्रांसफर प्राइसिंग के नियम लागू होते हैं, उन्हें 31 अक्टूबर तक फॉर्म 3CEB जमा करना होता है। इसके बाद ऐसे टैक्सपेयर्स को 30 नवंबर तक ITR फाइल करने का मौका रहता है। 

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डेडलाइन निकल गई तो बिलेटेड ITR का मौका

जो आम टैक्सपेयर्स या नॉन-ऑडिट कैटेगरी में आते हैं और 31 अगस्त तक अपना ITR फाइल नहीं कर पाए, उनके पास बिलेटेड रिटर्न यानी देरी से ITR फाइल का विकल्प रहता है। ऐसे टैक्सपेयर्स 31 दिसंबर तक अपना बिलेटेड रिटर्न फाइल कर सकते हैं।

हालांकि, देर से ITR भरने पर कुछ नुकसान भी होते हैं। इनकम टैक्स कानून की धारा 234F के तहत अगर सालाना कुल आय 5 लाख रुपये तक है, तो 1,000 रुपये की लेट फीस देनी होती है। वहीं, 5 लाख रुपये से ज्यादा आय होने पर यह फीस 5,000 रुपये हो जाता है। इसके अलावा, अगर कोई टैक्स बकाया है तो धारा 234A के तहत हर महीने 1 प्रतिशत की दर से ब्याज भी देना पड़ सकता है।

देर से रिटर्न भरने का एक और बड़ा नुकसान यह है कि कारोबार या कैपिटल गेन से हुए कुछ घाटे को आगे के सालों में एडजस्ट करने के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही टैक्स रिफंड मिलने में भी देरी हो सकती है।

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गलती होने पर रिवाइज्ड ITR भर सकते हैं

अगर किसी टैक्सपेयर ने समय पर ITR फाइल कर दिया है, लेकिन बाद में पता चलता है कि कोई जानकारी छूट गई है या रिटर्न में गलती हो गई है, तो उसे सुधारने के लिए रिवाइज्ड यानी सुधार कर ITR फाइल किया जा सकता है।

रिवाइज्ड ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 मार्च है। अगर 31 दिसंबर से पहले रिटर्न में सुधार कर लिया जाता है, तो कोई अतिरिक्त लेट फीस नहीं लगती। लेकिन 31 दिसंबर के बाद रिवाइज्ड ITR फाइल करने पर लागू नियमों के मुताबिक फीस देनी पड़ सकता है।

छूटी हुई कमाई बताने के लिए अपडेटेड ITR का विकल्प

अगर कोई टैक्सपेयर 31 दिसंबर तक भी बिलेटेड ITR फाइल नहीं कर पाता है या अपनी किसी बड़ी कमाई की जानकारी रिटर्न में देना भूल जाता है, तो उसके पास अपडेटेड ITR यानी ITR-U फाइल करने का विकल्प होता है।

यह सुविधा संबंधित एसेसमेंट ईयर खत्म होने के बाद 48 महीने तक उपलब्ध रहती है। हालांकि, अपडेटेड रिटर्न फाइल करने पर अतिरिक्त टैक्स और ब्याज का भुगतान करना पड़ता है। अगर ITR-U 12 महीने के भीतर फाइल किया जाता है, तो अतिरिक्त टैक्स 25 प्रतिशत तक हो सकता है। 24 महीने के भीतर फाइल करने पर यह 50 प्रतिशत, 36 महीने के भीतर 60 प्रतिशत और 48 महीने के अंदर फाइल करने पर 70 प्रतिशत तक हो सकता है।

इसलिए अगर कोई कमाई रिटर्न में छूट गई है, तो उसे बाद में अपडेटेड रिटर्न के जरिए घोषित किया जा सकता है, लेकिन इसमें देरी के साथ अतिरिक्त टैक्स और ब्याज का बोझ भी बढ़ता जाता है।

First Published : September 4, 2026 | 4:02 PM IST