अंतरराष्ट्रीय

पश्चिम एशिया में जंग फिर तेज: अमेरिका ने खार्ग द्वीप के पास ईरानी जहाजों को बनाया निशाना, ईरान ने भी दी चेतावनी

ईरान ने अमेरिकी सैन्य जहाजों पर हमले तेज करने की चेतावनी दी है। ईरान ने दावा किया है कि तीन टैंकरों के साथ ही अमेरिका से जुड़े तीन अन्य जहाजों को भी निशाना बनाया गया है

Published by
बीएस वेब टीम   
Last Updated- September 06, 2026 | 8:33 AM IST

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि उसने ईरान के तीन जहाजों को निशाना बनाया है। इनमें एक जहाज खार्ग द्वीप के तट के पास था, जो ईरान के तेल निर्यात का बड़ा केंद्र है। यह कार्रवाई ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अमेरिकी नौसेना के दो जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने के बाद हुई।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि IRGC के लिए अमेरिका का संदेश बिल्कुल साफ है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी नौसेना के दो जहाजों पर हमला होगा, तो अमेरिका जवाब में ईरान को इससे भी बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचाएगा। इसी के तहत ईरान के तीन जहाजों को निशाना बनाया गया।

वहीं, अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने भी अपना रुख और कड़ा कर लिया। IRGC ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य जहाजों पर हमले तेज करने की चेतावनी दी है। बाद में ईरान ने दावा किया कि उसने तीन टैंकरों के साथ ही दूसरे इलाकों में अमेरिका से जुड़े तीन अन्य जहाजों को भी निशाना बनाया है।

खार्ग द्वीप के पास टैंकर पर मिसाइल हमला

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, खार्ग द्वीप के पास लंगर डाले खड़े एक टैंकर पर चार अमेरिकी मिसाइलें दागी गईं। स्थानीय सूत्रों के हवाले से एजेंसी ने कहा कि इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। वहीं, टैंकर के चालक दल को सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा था।

उधर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि इन घटनाओं में किसी भी अमेरिकी सैन्यकर्मी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।

Also Read: 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 37.5 अरब डॉलर खर्च, फिर भी ट्रंप ने ईरान युद्ध को बताया ‘छोटी बात’

अमेरिका और ईरान के बीच यह ताजा सैन्य टकराव ऐसे समय हुआ है, जब पिछले एक हफ्ते से दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। फरवरी में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे और तब से यह संघर्ष जारी है। इस युद्ध का असर दुनिया भर में ऊर्जा की आपूर्ति पर भी पड़ा है।

वहीं, नवंबर में होने वाले अमेरिकी कांग्रेस चुनाव से पहले इस संघर्ष को लेकर बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिकों के बीच विरोध भी देखने को मिल रहा है।

खार्ग द्वीप को लेकर ट्रंप पहले भी दे चुके हैं चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की सरकार ईरान पर ज्यादा प्रतिबंध लगाकर उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की संभावना को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया है।

31 अगस्त को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक लाइन की पोस्ट के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बना एक वीडियो साझा किया था। इस वीडियो में खार्ग द्वीप को पूरी तरह तबाह होते हुए दिखाया गया था। इसके बाद ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि अगर खार्ग पर हमला हुआ तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।

ईरान, तेल निर्यातक देशों के संगठन OPEC का तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक है। युद्ध शुरू होने से पहले ईरान अपना करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल खार्ग द्वीप के रास्ते निर्यात करता था। हालांकि, अप्रैल के मध्य में अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात पर नाकेबंदी शुरू कर दी, जिसके बाद तेल की आवाजाही प्रभावित हुई है।

ट्रंप पहले भी खार्ग द्वीप पर कार्रवाई की बात कर चुके हैं। 11 जून को उन्होंने इस द्वीप पर कब्जा करने की इच्छा जताई थी। हालांकि, बाद में उन्होंने यहां अमेरिकी सैन्य अभियान चलाने की संभावना से इनकार कर दिया था। इसके कुछ दिनों बाद 17 जून को तेहरान और वॉशिंगटन ने युद्ध खत्म करने के मकसद से एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी ऐसे समय शुरू की, जब ईरान ने प्रभावी रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के कुल तेल की आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा इस अहम समुद्री रास्ते से गुजरता था।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड वायदा 96.28 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 24 जुलाई के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है।

First Published : September 6, 2026 | 8:32 AM IST