भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रस्तावित विश्व मानचित्र को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। भारत ने कहा है कि उसके संप्रभु क्षेत्र, खासकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों को देश के आधिकारिक मानचित्र के मुताबिक ही दिखाया जाना चाहिए। भारत ने साफ कहा कि इन क्षेत्रों को गलत या भ्रामक तरीके से दिखाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रविवार को एक मीडिया सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत ने 4 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किए गए एक प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था। इस प्रस्ताव का मकसद दुनिया के नक्शे में महाद्वीपों के आकार को ज्यादा सही तरीके से दिखाने के लिए बराबर क्षेत्रफल वाले मानचित्रों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
जायसवाल ने कहा कि भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत किसी खास विश्व मानचित्र या किसी देश की सीमा को दिखाने के तरीके का समर्थन करता है।
उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव का मकसद ऐसे नक्शों को बढ़ावा देना है, जिनमें दुनिया के अलग-अलग महाद्वीपों का आकार उनकी असली जमीन के हिसाब से सही नजर आए।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि प्रस्ताव में किसी खास विश्व मानचित्र को सही या आधिकारिक नहीं बताया गया है। इसमें देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित इलाकों या जगहों के नाम से जुड़े मामलों पर भी कोई फैसला नहीं किया गया है।
UN महासभा में यह प्रस्ताव “नक्शा सुधारें: दुनिया के नक्शे में सभी क्षेत्रों, खासकर अफ्रीका, को सही और बराबर तरीके से दिखाएं” नाम से पेश किया गया था। टोगो की ओर से लाए गए इस प्रस्ताव को 164 देशों का समर्थन मिला। एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया, जबकि अमेरिका ने अकेले इसके खिलाफ वोट किया।