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Gold Price Outlook 2025: शुरुआती लड़खड़ाहट के बावजूद सोना 2025 में कर सकता है शानदार प्रदर्शन! जानिए कहां-कहां से मिल रहा है दम

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इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती के बावजूद घरेलू स्तर पर गोल्ड ने 2024 में 22 फीसदी का रिटर्न दिया।

Last Updated- January 06, 2025 | 7:35 PM IST
Gold Silver Price Today

Gold Price Outlook 2025: गोल्ड (gold) के लिए 2024 कई मायनों में शानदार रहा। बीते वर्ष न सिर्फ सोने का प्रदर्शन पिछले 14 वर्षों में यानी 2010 के बाद सबसे बेहतर रहा बल्कि कई ट्रेंड भी बनते दिखे। जियो-पॉलिटिकल टेंशन, सेंट्रल बैंकों की खरीदारी, इन्वेस्टमेंट यानी ईटीएफ (ETF) डिमांड में तेजी और अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद के बीच सोने की कीमतों में 2024 में 27 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई।

रुपये ने किया गोल्ड को सपोर्ट

घरेलू स्तर पर अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के मुकाबले रुपये में कमजोरी ने भी गोल्ड को एक हद तक सपोर्ट किया। अगर ऐसा न होता तो इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती के बावजूद गोल्ड ने 22 फीसदी का रिटर्न नहीं दिया होता। 23 जुलाई 2024 को पेश किए गए आम बजट में सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी को 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दिया गया।

घरेलू फ्यूचर मार्केट एमसीएक्स (MCX) पर सोने का बेंचमार्क फरवरी कॉन्ट्रैक्ट मंगलवार यानी 31 दिसंबर को 76,748 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर बंद हुआ जबकि 30 अक्टूबर को यह 79,775 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऑल-टाइम हाई लेवल पर पहुंच गया था। इससे पहले वर्ष 2023 के अंतिम कारोबारी दिन (29 दिसंबर) सोने का बेंचमार्क फरवरी कॉन्ट्रैक्ट 63,203 के भाव पर सेटल हुआ था।

बीते वर्ष भारतीय रुपया (Indian Rupee) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 3 फीसदी कमजोर हुआ। वर्ष के अंतिम कारोबारी दिन यानी 31 दिसंबर को यह 85.66 के नए निचले स्तर पर पहुंच गया। हालांकि अन्य एशियाई देशों की करेंसी के मुकाबले इसमें उतार-चढाव फिर भी बेहद कम रहा। उल्टे यह दुनिया के कई अन्य देशों की करेंसी के मुकाबले मजबूत हुआ है। अमेरिकी डॉलर में बेलगाम तेजी के मद्देनजर नए वर्ष में भी रुपये में कमजोरी जारी रह सकती है। आरबीआई (RBI) भी रुपये में गिरावट को रोकने के लिए किसी तरह के हस्तक्षेप से बाज आएगा क्योंकि कई अन्य देशों की करेंसी के मुकाबले इसमें आई तेजी के चलते निर्यात पर विपरीत असर पड़ रहा है। यदि रुपये में नए वर्ष में भी नरमी जारी रहती है तो सोने को और सपोर्ट मिलना लाजमी है। रुपये में गिरावट सोने के आयात को महंगा बना देती है।

नवंबर-दिसंबर में तेजी पर लगा ब्रेक

हालांकि 2024 के अंतिम 2 महीनों यानी नवंबर-दिसंबर के दौरान अमेरिका में हुए राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की जीत के बाद इस कमोडिटी में मुनाफावसूली देखने को मिली और इसकी रफ्तार थमती नजर आई। दिसंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की बैठक के बाद तो सोने पर दबाव और बढ़ा। इस बैठक के बाद यूएस फेड ने भविष्य में ब्याज दरों में कटौती को लेकर सतर्क रुख अपनाने पर जोर दिया और इस बात के स्पष्ट संकेत भी दिए कि 2025 में कम दफे ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है। फेड (FED) की तरफ से इस तरह के संकेत मिलने के बाद मार्केट अब यह मानकर चल रहा है कि 2025 में शायद दो दफे (कुल 50 बेसिस प्वाइंट) से ज्यादा ब्याज दरों में कटौती न हो जबकि ट्रंप की जीत के पहले इस बात की संभावना प्रबल थी कि फेड 2025 में कम से कम 4 दफे (कुल 100 बेसिस प्वाइंट)  ब्याज दरों पर कैंची चला सकता है।

फेड के सामने भी हार नहीं माना सोना

लेकिन फेड के इस सतर्क रुख के बावजूद दिसंबर में सोना औंधे मुंह नहीं लुढ़का जो इस धारणा को और पुख्ता करता है कि सोने में ट्रेंड कमजोर नहीं हुआ है और फेड यदि भविष्य में सतर्क रुख भी अपनाता है तो सोने को लेकर निवेशकों को डरने की जरूरत नहीं है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड में तूफानी तेजी भी दिसंबर 2024 में सोने को पछाड़ नहीं सका और इस कीमती धातु में  ईटीएफ डिमांड और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी के दम पर रेंजबाउंड कारोबार देखने को मिला। यूएस डॉलर इंडेक्स (108.58) और बॉन्ड यील्ड (4.576%)  31 दिसंबर को क्रमश: दो वर्ष और 8 महीने के अपने उच्चतम स्तर पर दर्ज किए गए। तेजी का आलम यह है कि महज तीन महीने में यूएस डॉलर इंडेक्स तकरीबन 7 फीसदी जबकि 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड 79 बेसिस प्वाइंट मजबूत हुआ है। यदि आप डॉलर के अलावे किसी अन्य करेंसी में सोने को होल्ड करते हैं तो डॉलर में मजबूती इसकी कीमत घटा देती है। वहीं यूएस बॉन्ड यील्ड में तेजी निवेशकों के लिए सोने के अपॉर्चुनिटी कॉस्ट (opportunity cost) में इजाफा कर देती है।

पहले सेंट्रल बैंकों ने तो बाद में ईटीएफ ने दिया सहारा

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) के आंकड़ों के मुताबिक नवंबर की सुस्ती के बाद एक बार फिर से दिसंबर में ग्लोबल लेवल पर गोल्ड ईटीएफ में निवेश में तेजी आई। इससे पहले नवंबर में 6 महीने की लगातार तेजी के बाद गोल्ड ईटीएफ में निवेश धीमा पड़ा था। ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस महीने 27 दिसंबर तक ग्लोबल लेवल पर गोल्ड ईटीएफ में निवेश 1.1 बिलियन डॉलर यानी 6.8 टन बढ़ा। पिछले महीने नवंबर में गोल्ड ईटीएफ में 2.1 बिलियन डॉलर यानी 28.6 टन का आउटफ्लो दर्ज किया गया था। इस साल 20 दिसंबर तक देखें तो गोल्ड ईटीएफ में निवेश में 3.37 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि वॉल्यूम के लिहाज से इस दौरान निवेश 3.7 टन घटा है।

जहां तक सेंट्रल बैंकों की खरीदारी की बात है चीन की तरफ से 6 महीने के लंबे इंतजार के बाद इस मोर्चे पर खुशखबरी आई है। चीन के सेंट्रल बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) के मुताबिक उसकी तरफ से नवंबर के दौरान 4.5 टन सोने की खरीद की गई। इससे पहले मई से लेकर अक्टूबर यानी लगातार 6 महीने चीन के सेंट्रल बैंक ने सोने की खरीद से परहेज किया था। भारतीय रिजर्व बैंक का उत्साह तो सोने की खरीदारी को लेकर और भी ज्यादा देखने को मिल रहा है। अक्टूबर की रिकॉर्ड खरीदारी (14 टन) के बाद बैंक की तरफ से नवंबर में भी लगातार 11वें महीने शानदार खरीदारी (8.4 टन) की गई । इस साल नवंबर तक आरबीआई ने 72.6 टन गोल्ड गोल्ड खरीदा है। इसके अलावे अन्य देशों मसलन पालैंड, तुर्की, कजाकिस्तान… के केंद्रीय बैंक भी सोने की खरीदारी को लेकर बेहद उत्साहित हैं। गौर करने वाली बात है कि जिस दौर में गोल्ड को इन्वेस्टमेंट यानी ईटीएफ डिमांड का सपोर्ट नहीं मिल रहा था, अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में लगातार तेजी थी उस समय भी गोल्ड को सबसे तगड़ा सपोर्ट सेंट्रल बैंकों की तरफ से निकल रही खरीदारी से मिल रहा था। अप्रैल 2024 तक इस खरीदारी की अगुवाई चीन कर रहा था। मई 2024 से पहले लगातार 12 महीने (अप्रैल 2023- अप्रैल 2024) ग्लोबल लेवल पर गोल्ड ईटीएफ में आउटफ्लो देखने को मिला था। मार्च-मई 2023 की अवधि को निकाल दें तो इन्वेस्टमेंट डिमांड अप्रैल 2022 से अप्रैल 2024 तक लगातार नेगेटिव जोन में पड़ी हुई थी।

यदि ट्रंप की नीतियों की वजह से चीन और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर टकराहट बढ़ती है तो शायद चीन का केंद्रीय बैंक सोने की खरीद में और तेजी लाए। इस बात की गुंजाइश इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि चीन के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में गोल्ड की हिस्सेदारी अभी भी 5 फीसदी के नीचे है। जबकि भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़कर 10 फीसदी के ऊपर पहुंच गई है। जानकार मानते हैं के बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य (geo-political scenario) के मद्देनजर चीन गोल्ड की हिस्सेदारी को कम से कम 10 फीसदी तक बढ़ाना चाहेगा।

चमक अभी और निखरेगी

ज्यादातर जानकारों के अनुसार ट्रंप की जीत के बाद जिस तरह से सेंट्रल बैंक खासकर आरबीआई (RBI) और पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) सोने की खरीदारी को लेकर अपना जोश दिखा रहे हैं और दूसरी ओर ईटीएफ में निवेशक दिलचस्पी ले रहे हैं, शुरुआती लड़खड़ाहट के बावजूद सोने के लिए 2025 एक बार फिर शुभ साबित हो सकता है। वर्ष की शुरुआत में कीमतों पर थोड़ा दबाव देखा जा सकता है क्योंकि मार्केट में इस बात की संभावना प्रबल हो गई  है कि शायद अमेरिकी केंद्रीय बैंक जनवरी की अपनी बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव न करे। सोने पर कोई इंटरेस्ट/ यील्ड नहीं मिलता इसलिए ब्याज दरों के नीचे नहीं जाने से निवेश के तौर पर इस एसेट क्लास की मांग घट जाती है। गोल्ड 2025 में जहां ग्लोबल लेवल पर 3 हजार डॉलर प्रति औंस तक ऊपर जा सकता है वहीं घरेलू बाजार में इसके 90 हजार रुपये 10 ग्राम पर पहुंचने का अनुमान है।

ग्लोबल मार्केट में सोना 31 दिसंबर 2024 को 2,641 डॉलर प्रति औंस के भाव पर सेटल हुआ जबकि 31 अक्टूबर 2024 को स्पॉट गोल्ड और यूएस गोल्ड फ्यूचर क्रमश: 2,790.15 और 2,801.80 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए थे।

घरेलू स्पॉट मार्केट में सोने 24 कैरेट (999) ने 76,162 के भाव पर 2024 को अलविदा कहा। ठीक एक साल पहले 2023 के अंतिम कारोबारी दिन यह 63,246 के भाव पर था। Indian Bullion and Jewellers Association (IBJA) के मुताबिक सोना 24 कैरेट (999) 30 अक्टूबर 2024 को 79,681 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऑल-टाइम हाई लेवल तक पहुंच गया था।

कुछ जानकारों का तो यहां तक कहना है कि यदि ट्रंप की नीतियों की वजह से ग्लोबल लेवल पर जियो-पॉलिटिकल टेंशन बढ़ता है तो बतौर सुरक्षित विकल्प (safe-haven) सोने की मांग बढ़ सकती है। टैरिफ को लेकर राय दोतरफा है। कई एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यदि अमेरिका टैरिफ को लेकर आक्रामक रुख अपनाता है तो महंगाई में वृद्धि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता और इस स्थिति में ब्याज दरों में कटौती की संभावना और कमजोर हो सकती है जिससे अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में और मजबूती आएगी और सोने पर दबाव बन सकता है। लेकिन इस टैरिफ वॉर का एक दूसरा पहलू गोल्ड के लिए यह है कि महंगाई में यदि इजाफा होता है तो बतौर ‘हेज’ सोने की मांग को सपोर्ट मिल सकता है।

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First Published - January 1, 2025 | 4:56 PM IST

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