FD Rates 2026: वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों का रुझान एक बार फिर सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहा है। खासतौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD फिर से चर्चा में है। स्थिर और सुनिश्चित रिटर्न की तलाश में लोग बैंकों की अलग-अलग योजनाओं की तुलना कर रहे हैं।
18 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, स्मॉल फाइनेंस बैंक सबसे ज्यादा ब्याज दरें दे रहे हैं। इसके बाद निजी बैंक और फिर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक आते हैं, जहां दरें अपेक्षाकृत कम हैं। ऐसे में निवेश से पहले यह समझना जरूरी है कि किस बैंक में किस अवधि के लिए कितना रिटर्न मिल रहा है।
स्मॉल फाइनेंस बैंकों में FD पर सबसे ऊंची ब्याज दरें देखने को मिल रही हैं।
प्राइवेट सेक्टर के बैंक भी अच्छी ब्याज दरें दे रहे हैं, हालांकि ये स्मॉल फाइनेंस बैंकों से थोड़ी कम हैं।
पब्लिक सेक्टर बैंकों में ब्याज दरें अपेक्षाकृत कम हैं, लेकिन निवेशकों को यहां सुरक्षा का भरोसा मिलता है।
SBI ने बढ़ाईं FD दरें, चुनिंदा अवधि पर मिलेगा ज्यादा ब्याज
देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। बैंक ने चुनिंदा अवधियों के लिए दरों में 25 बेसिस प्वाइंट तक का इजाफा किया है, जिससे निवेशकों को अब पहले के मुकाबले ज्यादा रिटर्न मिलेगा।
नई दरों के अनुसार 46 दिन से 179 दिन तक की अवधि वाले जमा पर ब्याज दर 5.10 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.35 प्रतिशत कर दी गई है। वहीं 180 दिन से लेकर एक साल से कम अवधि वाली एफडी पर अब 5.85 प्रतिशत ब्याज मिलेगा, जो पहले 5.60 प्रतिशत था। इसके अलावा एक साल से दो साल से कम अवधि के लिए ब्याज दर 6.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.50 प्रतिशत कर दी गई है।
सीनियर सिटीजन्स को भी फायदा
वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। 46 से 179 दिन की अवधि वाली एफडी पर अब 5.85 प्रतिशत ब्याज मिलेगा, जो पहले 5.60 प्रतिशत था। 180 दिन से एक साल से कम अवधि पर दर 6.10 प्रतिशत से बढ़कर 6.35 प्रतिशत हो गई है। वहीं एक साल से दो साल से कम अवधि की एफडी पर अब 7 प्रतिशत ब्याज मिलेगा, जो पहले 6.75 प्रतिशत था।
बैंक के अनुसार नई दरें नई जमा और रिन्यूअल दोनों पर लागू होंगी, जबकि अन्य शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
विशेषज्ञ का मानना है कि निवेशकों को केवल सबसे ज्यादा ब्याज दर को देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। उन्हें अपनी राशि को अलग अलग अवधियों में बांटना चाहिए, ताकि ब्याज दरों में होने वाले उतार चढ़ाव का असर कम हो सके।
आम तौर पर अपनाई जाने वाली रणनीतियों में छोटी, मध्यम और लंबी अवधि में निवेश को बांटना, कुछ राशि को अलग अलग समय पर मैच्योर होने वाली एफडी में रखना, और बैंक एफडी के साथ कॉर्पोरेट डिपॉजिट तथा सरकारी योजनाओं का मिश्रण शामिल है। इसके अलावा निवेश को अपने लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार तय करना भी जरूरी माना जाता है।
Vibhavangal Anukulakara Pvt Ltd के संस्थापक और प्रबंध निदेशक सिद्धार्थ मौर्य के अनुसार एफडी लैडरिंग एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है।
उन्होंने कहा, “एफडी लैडरिंग को एक प्रभावी उपाय के तौर पर देखा जा सकता है। इसमें आप अपनी राशि को अलग अलग अवधियों में निवेश करते हैं, ताकि सभी जमा एक ही समय पर कम दरों पर न फंसे रहें। साथ ही कुछ निवेश समय समय पर मैच्योर होते रहें, जिससे यदि ब्याज दरें बढ़ें तो बेहतर दरों का फायदा लिया जा सके। इस तरह वरिष्ठ नागरिक भी बैंक एफडी, कुछ कॉर्पोरेट एफडी और छोटी बचत योजनाओं का संयोजन चुनकर सुरक्षा और बेहतर रिटर्न का संतुलन बना सकते हैं, बजाय इसके कि वे केवल एक ही विकल्प पर निर्भर रहें।”