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महंगे नए घरों के बीच रीसेल प्रॉपर्टी की बढ़ी मांग, खरीद से पहले बरतें ये जरूरी सावधानियां

नोब्रोकर की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक कीमत पर जोर देने वाले जो ग्राहक नए मकान नहीं खरीद पा रहे हैं, वे रीसेल बाजार का रुख कर रहे हैं

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कार्तिक जेरोम   
Last Updated- March 04, 2026 | 12:00 AM IST

रिहायशी रियल एस्टेट में अब ज्यादा से ज्यादा परियोजनाएं प्रीमियम और लक्जरी मकानों की ही आ रही हैं, इसलिए 1 करोड़ रुपये से कम दाम के नए मकान काफी कम हो गए हैं। नोब्रोकर की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक कीमत पर जोर देने वाले जो ग्राहक नए मकान नहीं खरीद पा रहे हैं, वे रीसेल बाजार का रुख कर रहे हैं।

ज्यादा सही दाम

जमीन महंगी होने और निर्माण की लागत भी बढ़ने के कारण डेवलपर प्रीमियम तथा लक्जरी परियोजनाएं ला रहे हैं ताकि मार्जिन अच्छा मिले। नोब्रोकर के सह-संस्थापक और चीफ बिजनेस ऑफिसर सौरभ गर्ग कहते हैं, ‘मझोले और कम दाम वाले नए मकान बहुत कम आ रहे हैं और अच्छे शहरों में तो और भी कम दिख रहे हैं।’

एनारॉक समूह के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (रेजिडेंशियल सर्विसेज) राहुल फोंडगे के अनुसार कई लोकप्रिय माइक्रो-मार्केट में नई परियोजनाओं के लिए जगह ही नहीं बची है। इसलिए वहां पुराने मकानों को ढहाकर नई इमारतें बनाई जा रही हैं या रीसेल में मकान खरीदे जा रहे हैं।

गर्ग कहते हैं कि रीसेल के मकान तैयार बुनियादी ढांचे वाले प्रतिष्ठित इलाकों में मिल जाते हैं क्योंकि इनमें अक्सर वाजिब कीमत ही मांगी जाती है। फोंडगे ध्यान दिलाते हैं कि निर्माणाधीन मकानों पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लगता है, जिससे मकान और भी महंगा पड़ता है।

कई लोग रीसेल में मकान इसलिए भी लेते हैं क्योंकि उन्हें निर्माण से जुड़े जोखिम, लंबे इंतजार और आखिर में अतिरिक्त खर्च की आशंका का सामना नहीं करना पड़ता। किराये के मकान में रहने वाले खरीदारों को किराया और निर्माणाधीन मकान की मासिक किस्त एक साथ भरने का बोझ भी नहीं उठाना पड़ता। रीसेल में वे मकान और सोसाइटी, पास-पड़ोस, सुविधाओं और रोजमर्रा की जिंदगी पहले ही जांच-परख सकते हैं।

जांच-परख जरूरी

पुरानी इमारतों का ढांचा अक्सर सुरक्षित नहीं होता। फोंडगे कहते हैं कि पुरानी इमारत के ढांचे की जांच किसी पेशेवर से कराएं। आपसे ज्यादा कीमत तो नहीं मांगी जा रही, यह पक्का करने के लिए उसी इलाके में हाल-फिलहाल बिके किसी मकान की कीमत का पता करें। ढंग से कानूनी जांच बहुत जरूरी है। जब मकान बना था तब से अभी तक कौन-कौन इसके मालिक रहे हैं यह पता कर लें। मूल टाइटल डीड की जांच भी कर लें।

इंडियालॉ एलएलपी के पार्टनर सुरेश पालव की सलाह है, ‘खरीदार को किसी वकील से पता करना चाहिए कि 30 साल में कौन-कौन इस मकान का मालिक रहा है और उनमें से सबके नाम रजिस्ट्री थी या नहीं।’ यह भी देख लें कि आखिरी रजिस्ट्री उसी शख्स के नाम हो, जिससे आप मकान खरीद रहे हैं। वकील को यह भी पता करना चाहिए कि मकान या प्रॉपर्टी मुकदमे में तो नहीं फंसी है और सरकार तो उस पर कब्जा नहीं कर रही है।

उसके बाद एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट मांगें। फोंडगे बताते हैं कि इस सर्टिफिकेट से ही पक्का होता है कि प्रॉपर्टी पर कोई कर्ज नहीं है और किसी तरह का विवाद भी नहीं चल रहा है।’ यह भी पक्का कर लीजिए कि परियोजना का प्लान मंजूर हो गया था या नहीं। गर्ग समझाते हैं, ‘इसमें परियोजना पूरी होने का प्रमाण पत्र, ऑक्यूपेंसी प्रमाण पत्र और रेरा (रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण) से मंजूरी का प्रमाण पत्र होना चाहिए।’

यह भी देख लें कि मकान बेचने वाला सोसायटी या एसोसिएशन का सदस्य है या नहीं। उसने मेंटनेंस का पूरा बकाया भरा है या नहीं और सोसायटी के साथ उसका कोई विवाद तो नहीं है। फोंडगे कहते हैं, ‘हाउसिंग सोसायटी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लें और पक्का कर लें कि शेयर सर्टिफिकेट विधिवत रूप से आपके नाम कर दिया गया है।’

खतरे की घंटी

कुछ मामलों में संपत्ति से किनारा करना ही बेहतर होगा। अगर कोई और शख्स भी संपत्ति का मालिक होने का दावा कर रहा है या संपत्ति किसी तरह के कानूनी विवाद में घिरी है तो सौदे में जोखिम हो सकता है। उसे तभी खरीदें, जब सारे मालिकों (को-ओनर) और कानूनी वारिसों ने बिक्री के लिए हामी भर दी हो।

पालव आगाह करते हैं, ‘मूल दस्तावेज नहीं हैं या बीच में कुछ समय के लिए मकान की रजिस्ट्री नहीं मिल रही है तो हाथ खींच लीजिए। अगर कागजात को रजिस्टर नहीं कराया गया है तो भी जोखिम है।’

अगर मकान में अनधिकृत तौर पर बहुत बदलाव किए गए हैं तो भी खरीदार को मकान खरीदने से पहले कई बार सोच लेना चाहिए। पालव के हिसाब से मकान नकद में खरीदने पर तगड़ी छूट की बात हो तो भी खरीदारों को खबरदार हो जाना चाहिए।

सतर्कता से करें ऋण आवेदन

रीसेल प्रॉपर्टी के लिए कर्ज मंजूर करने से पहले बैंक प्रॉपर्टी भी जांचते हैं और कर्ज मांने वाले की भी तहकीकात करते हैं। बैंकबाजार के मुख्य कार्याधिकारी आदिल शेट्टी का कहना है कि बैंक साफ टाइटल और मालिकाना रिकॉर्ड के साथ साफ-सुथरे रिकॉर्ड पर जोर देते हैं। प्रॉपर्टी के कागज अधूरे हों तो कर्ज मिलने में देर हो जाती है।

शेट्टी समझाते हैं कि ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं होने, मंजूर की गई योजना और तैयार हुई संपत्ति में अंतर होने तथा सोसाइटी और पिछले मालिकों से एनओसी नहीं मिलने पर कर्ज मंजूर नहीं हो पाता। उनका कहना है, ‘बैंक ऋण की जांच जल्द से जल्द शुरू करवाएं और जब तक कर्ज मंजूर न हो जाए तब तक टोकन मनी देने से बचें।’

उनका सुझाव है कि संपत्ति के कागजात जांचने के लिए बैंक के कर्मचारियों के अलावा अलग से कानूनी सलाहकार या वकील की मदद लेनी चाहिए। और सबसे जरूरी बात, अगर आप मकान खरीदने जा रहे हैं तो आपका क्रेडिट स्टोर 790-800 या उससे ज्यादा होना ही चाहिए।

First Published : March 4, 2026 | 12:00 AM IST