अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप | फाइल फोटो
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग का आज चौथा दिन है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान बातचीत करना चाहता है, लेकिन अब इसके लिए बहुत देर हो चुकी है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि ईरान का डिफेंस सिस्टम और उनसे सभी बड़े नेता लगभग खत्म हो चुके हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान की एयर डिफेंस, एयर फोर्स और नेवी तबाह हो चुकी है। हालांकि, इससे पहले रविवार को ट्रंप ने कहा था कि वह ईरानी नेताओं से बातचीत के लिए तैयार हैं।
बता दें कि करीब 72 घंटे पहले अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर जोरदार हमला किया, जिससे मध्य पूर्व एक बार फिर युद्ध के कगार पर पहुंच गया। ये दूसरी बार है जब पिछले 10 महीनों में ऐसा हुआ है। हमले की शुरुआत शनिवार दोपहर को हुई, जब अमेरिका-इजराइल की सेनाओं ने बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इनमें पर्शियन गल्फ में तैनात जहाजों से टॉमहॉक मिसाइलें शामिल थीं। साथ ही, पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट जैसे F-22 और F-35 से हवाई हमले किए गए। ये हमले ईरान के प्रमुख ठिकानों पर केंद्रित थे, जिनमें तेहरान में रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के भवन शामिल थे। लेकिन कुछ नागरिक जगहों पर भी असर पड़ा, जैसे एक लड़कियों के स्कूल पर हमला जिसमें 150 से ज्यादा लोग मारे गए, जिनमें बच्चे भी थे।
इस हमले से ईरान भड़क उठा और उसने जवाबी कार्रवाई की। ईरान ने मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन हमलों की बौछार कर दी। खासकर उसके सस्ते शहीद ड्रोन ने मुख्य भूमिका निभाई। इन हमलों से न सिर्फ इजराइल और अमेरिकी सैन्य ठिकाने निशाना बने, बल्कि पड़ोसी गल्फ देशों में नागरिक इमारतें भी प्रभावित हुईं। वीकेंड पर दिखाई गई तस्वीरों में दुबई का एक लग्जरी होटल आग की लपटों में घिरा नजर आया। ड्रोन हमलों की वजह से हवाई अड्डे बंद हो गए, जिसमें दुबई एयरपोर्ट भी शामिल था। ये यूरोप-एशिया उड़ानों का बड़ा हब है, और इससे 50 हजार से ज्यादा यात्री फंस गए। मंगलवार देर शाम तक मिसाइलें गल्फ देशों में गिरती रहीं, जिससे अमेरिकी दूतावास और सैन्य बेस प्रभावित हुए।
मंगलवार शाम को ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की एयर फोर्स और नेवी तबाह हो चुकी है, और उसकी लीडरशिप स्ट्रक्चर भी नेस्तनाबूद हो गई है, जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सबसे ऊपर थे। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक छोटा पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने वॉशिंगटन पोस्ट का एक ओपिनियन शेयर किया: ‘हम ट्रंप डॉक्ट्रिन के जन्म को देख रहे हैं’। पोस्ट में उन्होंने लिखा: “उनकी एयर डिफेंस, एयर फोर्स, नेवी और लीडरशिप चली गई। वे बात करना चाहते हैं। मैंने कहा ‘बहुत देर हो चुकी!'”
ट्रंप का ये बयान उस वक्त आया जब एक दिन पहले ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख अली लारिजानी ने अमेरिका से बातचीत से इनकार किया था। लारिजानी ने एक्स पर मीडिया रिपोर्ट्स को झुठलाया, जिसमें कहा गया था कि ईरानी अधिकारी ट्रंप से बात करना चाहते हैं। लेकिन एक सीनियर व्हाइट हाउस अधिकारी ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि ईरान में लीडरशिप के उम्मीदवारों ने बातचीत के लिए संपर्क किया है।
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अधिकारी के मुताबिक, इसके बाद ट्रंप ने कहा कि वे ‘आखिरकार’ बात करेंगे, लेकिन सैन्य ऑपरेशन खत्म होने के बाद। इससे पहले ट्रंप ने ब्रिटिश अखबार डेली मेल को बताया कि ये प्रक्रिया शायद ‘चार हफ्तों’ की होगी।
ट्रंप का मानना है कि ईरान में रेजीम चेंज जरूरी है, क्योंकि नई लीडरशिप मौजूदा इस्लामिक रेजीम से ज्यादा सहयोगी होगी। वे चाहते हैं कि ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बाहरी निगरानी हो, जो मौजूदा नेतृत्व के साथ मुश्किल लगता है।
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, हमले की मुख्य वजह ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम है। ईरान ने दावा किया कि उसके पास न्यूक्लियर ईंधन को ‘समृद्ध (Enrichment) करने का अधिकार है, और उसने निगरानी नियमों को चकमा देकर 460 किलोग्राम यूरेनियम 60 प्रतिशत तक ‘समृद्ध’ कर लिया है। अमेरिकी स्पेशल एनवॉय स्टीव विटकॉफ ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरानी वार्ताकारों ने साफ बताया कि उनका मकसद हथियार बनाना है। उन्होंने कहा कि उनके पास 460 किलो 60 प्रतिशत ‘समृद्ध’ यूरेनियम है, जो 11 न्यूक्लियर बम बनाने के लिए काफी है।
हमले के पहले दिन ही खामेनेई को निशाना बनाया गया। ये हमला महीनों की प्लानिंग का नतीजा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रैफिक कैमरों को हैक करके खामेनेई के काफिले को ट्रैक किया गया और हमले के दिन उनकी लोकेशन कन्फर्म की गई। सेंट्रल तेहरान में उनके कंपाउंड पर हमला हुआ, जिसमें वे मारे गए। ट्रंप को ये खबर मिली तो उन्होंने कहा, “मैंने उसे पहले मार गिराया, इससे पहले कि वो मुझे मारता।”