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Budget 2026: डेट फंड, गोल्ड और होम लोन- एक्सपर्ट्स को बजट में इन सुधारों की उम्मीद

Budget 2026 से पर्सनल फाइनेंस में टैक्स राहत, निवेशक सुरक्षा और डेट फंड, गोल्ड व होम लोन से जुड़े अहम सुधारों की उम्मीद जताई जा रही है।

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मानसी वार्ष्णेय   
Last Updated- January 12, 2026 | 2:52 PM IST

Budget 2026: केंद्र सरकार यूनियन बजट 2025-26 को 1 फरवरी 2026, रविवार को संसद में पेश करेगी। बजट से पहले देश की आर्थिक स्थिति का खाका पेश करने वाला आर्थिक सर्वेक्षण 29 जनवरी को मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।

बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल 2026 तक चलेगा। सेशन के पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संसद के दोनों सदनों को संबोधित करेंगी। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बताया कि राष्ट्रपति ने बजट सत्र बुलाने की मंजूरी दे दी है।

बजट 2026 से पर्सनल फाइनेंस और निवेशकों से जुड़े कई अहम सुधारों की उम्मीद की जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में वित्तीय बाजारों में हुए सुधारों से रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है। इसका असर घरेलू बचत को देश की आर्थिक वृद्धि से जोड़ने और आम भारतीय परिवार की लंबी अवधि की वित्तीय सुरक्षा मजबूत होने के रूप में देखा गया है।

स्क्रिपबॉक्स (Scripbox) के मैनेजिंग पार्टनर सचिन जैन के अनुसार, सरकार का यह फोकस कि हर नागरिक को भोजन, आवास, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलें, सीधे तौर पर बचत और निवेश की क्षमता बढ़ाता है। साथ ही, कर सुधार और डिजिटलीकरण से टैक्स प्रक्रिया आसान हुई है और आम निवेशकों पर बोझ कम हुआ है।

जैन की यूनियन बजट 2026 से मुख्य अपेक्षाएं इस प्रकार हैं:

  • नियमों का संतुलन: SEBI ने रिटेल निवेशकों के हित में कई कदम उठाए हैं, वहीं बीमा और पेंशन क्षेत्र में भी सुधार जरूरी हैं। पुराने नियमों को सरल और पारदर्शी बनाना निवेशकों के लिए लाभकारी होगा।

  • एडवाइजर सिस्टम सुधार: योग्य और ईमानदार वित्तीय सलाहकारों को प्रोत्साहन देना जरूरी है। धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई निवेशकों का भरोसा बढ़ाएगी।

  • डिजिटल दुनिया में निवेशक सुरक्षा: वित्तीय धोखाधड़ी और व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग को रोकना आवश्यक है। डेटा प्राइवेसी और फ्रॉड प्रिवेंशन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

  • एनआरआई निवेशकों पर ध्यान: एनआरआई निवेशकों के लिए सरल और स्पष्ट नियम बनाए जाने चाहिए, जिससे लंबी अवधि के निवेश में आसानी हो।

  • GIFT City का बेहतर उपयोग: इस फ्रेमवर्क को बढ़ाकर और प्रोत्साहन देकर घरेलू और वैश्विक पूंजी निवेश को आकर्षित किया जा सकता है।

  • फिक्स्ड इनकम पर कर राहत: रिटायरमेंट वाले उच्च टैक्स ब्रैकेट निवेशकों के लिए कर में राहत देने से निश्चित आय वाले निवेशकों को सहारा मिलेगा।

वहीं, मनीफ्रंट के सीईओ मोहित गांग ने भी कुछ सुधारों की सिफारिश की है। उनके अनुसार:

  • डेट फंड्स पर इंडेक्सेशन या LTCG लाभ दिया जाना चाहिए।

  • SCSS और KVP जैसी छोटी बचत योजनाओं को कर-मुक्त करना चाहिए।

  • गोल्ड निवेश पर टैक्स को एक समान बनाना जरूरी है।

  • होम लोन पर ब्याज की छूट की सीमा बढ़ानी चाहिए और इसे नए टैक्स रिजीम में लागू करना चाहिए।

  • क्रिप्टो निवेश और कराधान को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश देने चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बजट में इन सुधारों को शामिल किया गया, तो यह न केवल निवेशकों के लिए लाभकारी होगा बल्कि भारतीय परिवारों की वित्तीय योजना को मजबूत बनाएगा और उन्हें सुरक्षित भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करेगा।

First Published : January 12, 2026 | 1:12 PM IST