भले ही प्योर इक्विटी फंडों को बाजारों में तेज गिरावट से जूझना पड़ा है, लेकिन सेक्टोरल फंड एक साल की अवधि के दौरान दो अंक का प्रतिफल देने में सफल रहे हैं। वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (पीएसयू), इन्फ्रास्ट्रक्चर, खपत और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) जैसे थीमेटिक फंडों का प्रतिफल लार्जकैप फंड श्रेणी के मुकाबले अच्छा रहा है।
पिछले एक साल में, थीमेटिक पीएसयू फंडों ने औसतन 17.75 प्रतिशत का प्रतिफल दिया है, जो वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, सभी फंडों में सर्वाधिक है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर फंडों और खपत फंडों ने 14.21 प्रतिशत और 12.22 प्रतिशत प्रतिफल दिया है।
लार्जकैप इक्विटी फंड जैसे प्योर इक्विटी फंडों ने पिछले साल में महज 6.77 प्रतिशत का प्रतिफल दिया। सिर्फ स्मॉलकैप फंड ही पिछले साल में 12.11 प्रतिशत के साथ शानदार प्रतिफल देने में कामयाब रहे।
बाजार कारोबारियों का कहना है कि आकर्षक मूल्यांकन और निजीकरण की उम्मीदों ने पीएसयू शेयरों की रेटिंग में बदलाव की संभावना बढ़ा दी है। सरकार द्वारा इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिए जाने से भी इस सेक्टर में तेजी को बढ़ावा मिला है।
एनटीपीसी, पावरग्रिड, और तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) जैसे पीएसयू शेयरों ने पिछले साल 35-42 प्रतिशत के दायरे में प्रतिफल दिया।
म्युचुअल फंड (एमएफ) उद्योग में सभी इक्विटी फंडों में, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों का प्रदर्शन बेहतर रहा। इन फंडों ने पिछले साल 40.26 प्रतिशत का प्रतिफल दिया।
एसबीआई एमएफ के उप प्रबंध निदेशक एवं मुख्य व्यावसायिक अधिकारी डी पी सिंह का कहना है, ‘थीमेटिक फंड स्वाभाविक तौर पर चक्रीय हैं और पिछले साल इनका प्रतिफल बेहतर रहा है। ऐसे फंड हाई रिस्क-हाई रिटर्न फंड होते हैं। मेरा मानना है कि प्योर इक्विटी फंड (डायवर्सिफाइड और इक्विटी फंड) सदाबहार हैं और उनकी लोकप्रियता जल्द लौटेगी।’
प्रतिफल में तेजी के साथ नए निवेशक सेक्टोरल फंडों के प्रति आकर्षित हुए हैं। एम्फी के आंकड़ों से पता चला है कि थीमेटिक फंडों की प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियां अप्रैल के अंत तक 1.49 लाख करोड़ रुपये थीं, जो अप्रैल 2021 में 1.01 लाख करोड़ रुपये थीं।
टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी गिरावट के बाद भी यह शेयर पिछले साल शीर्ष प्रदर्शकों में से एक बना हुआ है। पिछले तीन महीनों में, आईटी फंडों ने 10.52 प्रतिशत का नकारात्मक प्रतिफल दिया है, लेकिन पिछले साल इनमें 11.56 प्रतिशत की अच्छी तेजी दर्ज की गई।
आईसीआईसीआई डायरेक्ट रिसर्च ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है, ‘ताजा गिरावट से पहले, आईटी फंडों ने पिछले तीन साल से लगातार शानदार श्रेणी के तौर पर प्रदर्शन किया है और उसे आय में वृद्धि तथा मूल्यांकन रेटिंग में सुधार से मदद मिली है, क्योंकि निवेशक आईटी खर्च बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं। जहां आईटी सेक्टर ने कमजोर प्रदर्शन किया है, लेकिन अभी भी कई शेयर ताजा गिरावट के बावजूद ऐतिहासिक औसत के मुकाबले महंगे मूल्यांकन पर कारोबार कर
रहे हैं।’
बढ़ती जिंस कीमतों और मुद्रास्फीति से मौद्रिक नीति में सख्ती आई है और इससे घरेलू इक्विटी बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे हालात को देखते हुए फंड हाउस उपभोक्ता वस्तु, उद्योग और उधारी जैसे क्षेत्रों पर दांव लगाना पसंद करेंगे।