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बिकवाली ने 2013 की याद ताजा कर दी

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 7:42 AM IST

शुक्रवार को हुई बिकवाली ने साल 2013 की याद ताजा कर दी, जिसे आम तौर पर मौद्रिक राहत की धीरे-धीरे वापसी से बताया जाता है। तब अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड का प्रतिफल 1.60 फीसदी से बढ़कर करीब 3 फीसदी पर पहुंच गया था क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने कहा था कि व मात्रात्मक सहजता में कमी लाएगी यानी बॉन्ड की खरीद और ब्याज दर में नरमी का कार्यक्रम धीरे-धीरे कम करेगा। यह कदम अमेरिकी अर्थव्यवस्था को साल 2008 के वित्तीय संकट से उबरने के लिए उठाया गया था।
इस वजह से उभरते बाजारों में काफी परेशानी देखने को मिली थी, जहां मौद्रिक सहजता कार्यक्रम के कारण काफी नकदी आई थी। देसी बाजारों में तेज बिकवाली जुलाई 2013 में शुरू हुई और सेंसेक्स महज 20 कारोबारी सत्रों में 12 फीसदी टूट गया था। साल 2012 में भारत में 1.3 लाख करोड़ रुपये का एफपीआई निवेश आया था और साल 2013 में करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये का। फेड की घोषणा से ऐसे निवेश की वापसी का डर शुरू हो गया था।
पिछले कैलेंडर वर्ष में एफपीआई का निवेश 1.7 लाख करोड़ रुपये रहा, जिससे बेंचमार्क सेंसेक्स मार्च 2020 के निचले स्तर से 85 फीसदी से ज्यादा चढ़ गया। 10 वर्षीय अमेरिकी प्रतिफल इस महीने की शुररुआत के 1.08 फीसदी के मुकाबले गुरुवार को 1.61 फीसदी तक चढ़ गया था।
हालांकि साल 2013 व 2021 में एक अंतर यह देखने को मिला कि तब नीति निर्माताओं ने औपचारिक तौर पर बॉन्ड खरीद कार्यक्रम में कमी लाने का ऐलान किया था। इस बार केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों के कम से कम एक और साल कम करने की बात कही क्योंकि माना जा रहा है कि सुधार में लंबा समय लगेगा लेकिन बाजार वास्तविक दरों को आगे बढ़ा रही है क्योंक वह महंगाई के जोखिम दो देख रही है।

First Published : February 26, 2021 | 11:35 PM IST