लंबी अवधि में शेयरों के रिटर्न ने निवेशकों को किया निराश

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 15, 2022 | 4:57 AM IST

शेयर बाजार का हालिया रुझान दर्शाता है कि दीर्घावधि के निवेशकों के लिए शेयर अपना आकर्षण खो रहे हैं और इनका रिटर्न उच्च जोखिम एवं शेयरों को लंबे समय तक रखने की भरपाई नहीं करता है।
पिछले 10 साल में बेंचमार्क निफ्टी 50 का कुल रिटर्न सालाना 9.35 फीसदी की दर से बढ़ा है और इसके मुकाबले डाकघर जमाओं और कर्मचारी भविष्य निधि ने 8 से 8.7 फीसदी रिटर्न दिया है लेकिन इसमें किसी तरह की जोखिम नहीं रहता है। पिछले तीन से पांच साल में शेयरों का प्रदर्शन काफी खराब रहा है। विश्व स्वर्ण परिषद के आंकड़ों के अनुसार इस दौरान सोने ने 8.45 फीसदी सालाना चक्रवृद्घि दर से रिटर्न दिया है। यह गणना जुलाई 2010 और इस साल जुलाई के सोने के औसत दाम पर आधारित है।
यह विश्लेषण हर साल जुलाई में निफ्टी 50 के कुल रिटर्न सूचकांक के 12 महीने के औसत मूल्य और 10 साल तक निवेश बनाए रखने पर मिले सालाना रिटर्न पर आधारित है। निवेश और निवेश निकालने के समय शेयर की कीमत को संबंधित साल में जुलाई के अंत में 12 महीने के दौरान निफ्टी 50 के औसत मूल्य पर यह बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव को दिखाता है और दीर्घावधि के रिटर्न पर इसका प्रभाव कम पड़ता है। 5 साल और 3 साल के लिए भी इसी तरह से गणना की गई है, जहां रिटर्न 7 फीसदी रहा है।
आंकड़े बताते हैं कि 10 वर्षीय रिटर्न अभी करीब सात साल के निचले स्तर पर है जबकि जुलाई 2013 में यह रिकॉर्ड 20.3 फीसदी पर पहुंच गया था। 2003 से 2013 दीर्घावधि इक्विटी निवेशकों के लिए सबसे अच्छा समय रहा था और उसके बाद से रिटर्न में गिरावट आ रही है। 10 साल के दौरान रिटर्न पिछले चार साल में से तीन साल एक अंक में रहा, जो अन्य संपत्तियों में निवेश की तुलना में कम है।
हालांकि सभी विशेषज्ञ शेयरों के रिटर्न को कमतर नहीं मान रहे हैं। डाल्टन कैपिटल एडवाइजर्स के निदेशक यूआर भट्ट ने कहा कि किसी भी संपत्ति या शेयर में निवेश की गणना में आधार अहम होता है। अगर कोई बाजार में तेजी के दौरान निवेश करता है तो बेहतर रिटर्न हासिल करना कठिन होता है। ऐसे में जब बाजार स्थिर हो उस अवधि से रिटर्न की गणना करना सही होता है।’
अन्य का कहना है कि अगर निवेशक एकमुश्त खरीद बंद कर दे तो दीर्घावधि निवेशकों के लिए इक्विटी श्रेष्ठ निवेश साधन होगा। सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशन इक्विटीज में शोध एवं रणनीति प्रमुख धनंजय सिन्हा ने कहा, ‘शेयरों में रिटर्न हमेशा खरीद और बिक्री कीमत से जुड़ा होता है। उदाहण के लिए 2013 के निचले स्तर पर अगर किसी ने निवेश किया हो तो उसे 11 से 12 फीसदी सालाना रिटर्न मिलेगा। इसी तरह लीमन संकट के समय या इस साल मार्च या अप्रैल में निचले स्तर पर शेयर खरीदने वालों को ज्यादा रिटर्न मिला।’ इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी सर्विसेज के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, ‘शेयर के दाम कंपनियों की आय के प्रदर्शन को इंगित करते हैं। बीते दशक में कंपनियों की आय वृद्घि पर प्रतिकूल असर पड़ा है।’

First Published : July 12, 2020 | 10:17 PM IST