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IPO के लिए यह साल रिकॉर्ड की ओर, H1FY25 में इक्विटी से जुटाई रकम में 2.2 गुना का आया उछाल: प्राइम डेटाबेस

प्राइम डेटाबेस के विश्लेषण से जाहिर होता है कि पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) के जरिये 66,250 करोड़ रुपये जुटाए गए जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 2.7 गुना अधिक है।

Last Updated- October 03, 2024 | 9:28 PM IST
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वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में शेयर जारी कर 1.55 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए। यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 2.2 गुना ज्यादा है। आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के जरिये 56,340 करोड़ रुपये जुटाए गए जो पिछले वित्त वर्ष के आंकड़ों का करीब दोगुना है।

प्राइम डेटाबेस के विश्लेषण से जाहिर होता है कि पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) के जरिये 66,250 करोड़ रुपये जुटाए गए जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 2.7 गुना अधिक है। इक्विटी फंड जुटाने में हुई बढ़ोतरी को बाजारों में व्यापक इजाफे से सहारा मिला है। निफ्टी 50 इंडेक्स वित्त वर्ष 25 की पहली छमाही में 15.6 गुना चढ़ा जबकि निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में इस दौरान करीब 25-25 फीसदी का इजाफा हुआ।

प्राइम डेटाबेस के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया ने कहा कि आईपीओ को शानदार प्रतिक्रिया की वजह सूचीबद्धता के बाद उनका मजबूत प्रदर्शन है। सूचीबद्धता पर औसत फायदा (सूचीबद्धता की तारीख पर बंद भाव के आधार पर) बढ़कर 34.28 फीसदी हो गया जो 2023-24 की पहली छमाही में 28.65 फीसदी था। कुल 38 आईपीओ में से 30 ने 10 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया। हल्दिया ने कहा कि आईपीओ के लिए कंपनियों के आवेदनों को देखते हुए आगे रकम जुटाने का परिदृश्य मजबूत बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि कई कंपनियां कतार में हैं। 72,000 करोड़ रुपये जुटाने जा रही 26 कंपनियों को सेबी की मंजूरी मिल चुकी है जबकि 55 कंपनियां मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही हैं जो करीब 89,000 करोड़ रुपये जुटाना चाहती हैं। इनमें से तीन नई पीढ़ी की कंपनियां हैं जो मोटे तौर पर 13,000 करोड़ रुपये जुटाना चाह रही हैं। जब तक कि कोई अप्रत्याशित घटना नहीं हो, यह साल आईपीओ के लिए रिकॉर्ड वाला हो सकता है।

एसएमई प्लेटफॉर्म पर भी आईपीओ की भरमार रही। पहली छमाही के दौरान 143 एसएमई ने आईपीओ के जरिये करीब 5,000 करोड़ रुपये जुटाए जो पिछले साल की इसी अवधि में 96 आईपीओ के जरिये जुटाए गए 2,724 करोड़ रुपये से 83 फीसदी ज्यादा है। एसएमई आईपीओ की सूचीबद्धता पर औसत फायदा बढ़कर 63 फीसदी पर पहुंच गया जो पिछले साल 41 फीसदी था।

पहली छमाही में बजाज हाउसिंग फाइनैंस (6,560 करोड़ रुपये) का आईपीओ सबसे बड़ा रहा जबकि वेदांत की तरफ से क्यूआईपी के जरिये सबसे ज्यादा 8,500 करोड़ रुपये जुटाए गए।

First Published - October 3, 2024 | 9:19 PM IST

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