सेंसेक्स पर डेरिवेटिव अनुबंध के खत्म होने की साप्ताहिक अंतिम तिथि 13 अगस्त को हाल में लागू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) के दौरान कीमतों में असामान्य तौर पर अचानक उछाल दिखी। कुछ ही सेकंड में हुई इन हलचलों ने बाजार नियामक प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की निगरानी प्रणाली में गड़बड़ी का संकेत दिया। उसके बाद मामले की विस्तृत जांच की गई और सेबी ने त्वरित कार्रवाई की।
सेबी की जांच के नतीजे 46 पन्नों के अंतरिम आदेश में विस्तार से बताए गए हैं। उससे पता चलता है कि उछाल के दौरान 99 फीसदी खरीद ऑर्डर मूल्य के पीछे कॉपटॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट का हाथ था। वह जेपी मॉर्गन चेस ऐंड कंपनी का मॉरीशस का विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक है। बाजार नियामक का आरोप है कि कंपनी ने सेंसेक्स में शामिल शेयरों के लिए ऐसे खरीद ऑर्डर दिए जिनकी कीमत संदर्भ मूल्य से अधिकतम 3 फीसदी से ज्यादा (तय सीमा के भीतर) थी। साथ ही कीमत में बदलाव होते ही उसने एक-तिहाई ऑर्डर अचानक रद्द कर दिए।
बाजार नियामक ने बताया कि सेंसेक्स के सभी शेयरों में एक ही समय और बेहद तालमेल के साथ ऊंची कीमतों पर दिए गए 98 करोड़ रुपये के खरीद ऑर्डर से ऐसा लगता है कि सीएएस के जरिये सेंसेक्स के सांकेतिक समान मूल्य (आईईपी) को बढ़ाकर बंद भाव में हेरफेर करने की कोशिश की गई।
बाजार नियामक ने कहा कि शुरुआती जांच से ऐसा लगता है कि कंपनी के एफऐंडओ पोजीशन से ऐसी हलचल पैदा करने से आर्थिक फायदा मिला। बाजार नियामक सेबी ने बताया है कि फर्म की रणनीतियों जिन्हें सिंथेटिक लॉन्ग ऐसेट पोजीशन या कृत्रिम कारक कहा जाता है, के तहत सेंसेक्स में बढ़त से कॉपटॉल को काफी मुनाफा हो सकता था।
उसी दिन एक अन्य कंपनी मानसी शेयर ऐंड स्टॉक ब्रोकिंग ने शुरुआती बढ़त के बाद सेंसेक्स की 8 कंपनियों के शेयरों में संदर्भ मूल्य से लगभग 2.5 फीसदी कम कीमत पर काफी बिक्री ऑर्डर दिए। कंपनी ने एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स वायदा वा अपनी बकाया पोजीशन से फायदा उठाने के लिए ये ऑर्डर दिए और बाद में उन्हें रद्द भी कर दिया। इससे लगभग चार से पांच मिनट तक सेंसेक्स का आईईपी नीचे आ गया।
नियामक ने स्पष्ट किया है कि दोनों संस्थाओं ने आपस में मिलकर यानी ‘सांठगांठ’ करके काम नहीं किया था। दोनों ने स्वतंत्र रूप से एक जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर बाजार में हेरफेर किया। सेबी ने इन संस्थाओं को शेयर बाजार में कारोबार करने से रोक दिया है और गलत तरीके से कमाए गए मुनाफे को जब्त करने का निर्देश दिया है। साथ ही, सेबी के चेयरमैन ने बाजार में हेरफेर करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड की ओर से भेजे गए ईमेल पर जेपी मॉर्गन ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, मानसी के सीईओ को भेजे गए ईमेल का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला था। हालांकि, इस तरह की घटनाओं ने बाजार से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है। वे सीएएस व्यवस्था में कुछ बदलाव करने की मांग कर रहे हैं।
सेबी के पूर्व पूर्णकालिक सदस्य अश्विनी भाटिया का कहना है कि स्टॉक एक्सचेंज नियामक की पहली निगरानी कड़ी होते हैं ऐसे में संदिग्ध और बाजार में हेरफेर वाले सौदों की पहचान सबसे पहले एक्सचेंज को ही करनी चाहिए थी।
एक अन्य नियामकीय विशेषज्ञ ने कहा कि सेबी का यह आदेश बाजार से जुड़े लोगों के लिए एक बड़ा संकेत है कि नियामक की नजर बाजार की गतिविधियों पर बनी हुई है।