गुरुवार को वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार में भी तेजी देखी गई। अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट की ओर से लंबी अवधि वाले बॉन्डों की यील्ड में हो रही बढ़ोतरी को रोकने की योजना की घोषणा के बाद बेंचमार्क निफ्टी में लगातार सात दिनों से हो रही गिरावट का सिलसिला थम गया।
निफ्टी 50 इंडेक्स 154 अंक यानी 0.64 फीसदी की बढ़त के साथ 24,232 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 628 अंक यानी 0.82 फीसदी चढ़कर 77,538 पर बंद हुआ। सेंसेक्स डेरिवेटिव अनुबंधों की साप्ताहिक एक्सपायरी के दिन दोनों बेंचमार्क के बीच 0.18 फीसदी अंक का अंतर रहा। बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 2.7 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 491 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
17 अगस्त को 30 साल वाली अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5.31 फीसदी पर पहुंच गई। यह उसका कई दशकों का उच्चतम स्तर था, लेकिन बुधवार को अमेरिकी ट्रेजरी के यह कहने के बाद कि वह अपने लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशन का आकार कम से कम दोगुना कर देगा, यह यील्ड घटकर 5.23 फीसदी के आसपास आ गई। हालांकि, गुरुवार को यील्ड में थोड़ी बढ़ोतरी हुई और यह चार आधार अंक ऊपर चढ़ गई।
इस बीच, ब्रेंट क्रूड 2.51 फीसदी बढ़कर 92.29 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द शांति समझौते की उम्मीदें कम हैं। क्रूड की ऊंची कीमतें भारत के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं, जो अपनी तेल की जरूरतों का 80 फीसदी से ज्यादा आयात करता है। हालांकि अमेरिकी ट्रेजरी की घोषणा के बाद मनोबल बेहतर हुआ है। लेकिन ऊर्जा की ऊंची लागत के कारण घरेलू शेयरों के लिए जोखिम अभी भी ज्यादा बना हुआ है।
आगे चलकर पश्चिम एशिया में भूराजनीतिक घटनाक्रम और अगले हफ्ते जैक्सन हॉल इकनॉमिक सिम्पोजियम में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श का भाषण बाजार की दिशा तय करेंगे।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी रोकने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी के दखल से बाजार को बहुत जरूरी राहत मिली। इससे बाजार में जबरदस्त और व्यापक रिकवरी हुई। घरेलू बाजार में हफ्ते भर से जारी गिरावट का सिलसिला थम गया। इस दखल का असर डॉलर पर पड़ा है। डॉलर कमजोर होने, रुपया मजबूत होने और यील्ड का दबाव घटने से उभरते बाजारों का आकर्षण बढ़ा है। रिकवरी सभी सेक्टर में देखी गई, जिसमें मुख्य रूप से आईटी और वित्तीय शेयरों में तेजी का योगदान रहा क्योंकि यील्ड में नरमी से खर्च को बढ़ावा मिलता है।
नायर ने आगे कहा, निकट भविष्य का आउटलुक वैश्विक यील्ड, ऊर्जा की कीमतों और भूराजनीतिक घटनाक्रम की दिशा पर निर्भर करेगा। साथ ही, आय की रफ्तार और विदेशी निवेश को बनाए रखने के लिए लगातार स्थिरता की जरूरत होगी।
बाजार में चढ़ने व गिरने वाले शेयरों का अनुपात सकारात्मक रहा और बीएसई पर 2,373 शेयरों में तेजी आई जबकि 1,951 गिरावट के साथ बंद हुए। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक 583 करोड़ रुपये के शुद्ध बिकवाल रहे जबकि देसी संस्थागत निवेशकों ने 3,538 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीद से बाजार को सहारा दिया।
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज में शोध प्रमुख (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका ने कहा, लगातार सात कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद वैल्यू बाइंग और वैश्विक बाजार से मिले मजबूत संकेतों के कारण भारतीय इक्विटी बाजार में मामूली रिकवरी के साथ उतार-चढ़ाव सीमित रहने की उम्मीद है।