सोमवार को कैपिटल मार्केट से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई। इसकी वजह यह आशंका थी कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के प्रोपराइटरी कारोबारियों और ब्रोकरों को दिए जाने वाले ऋण पर सख्त नियम लगाने से उनकी लागत बढ़ सकती है। इससे उनकी लीवरेज्ड ट्रेडिंग कम होने के आसार हैं और उन्हें ऋण के लिए नए स्रोत तलाश करने पर मजबूर होना पड़ेगा। उनका यह भी मानना है कि ये नियम बैंकों के पक्ष में हैं जबकि ब्रोकरों पर शिकंजा कसा गया है।
जेएम फाइनैंशियल इंस्टीट्यूशनल सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘हमारा मानना है कि नए नियम कॉरपोरेट अधिग्रहण, एमऐंडए, लीवरेज्ड बायआउट आदि में बैंकों के सक्रिय रूप से भाग लेने की राह प्रशस्त करेंगे। हालांकि, कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज (सीएमआई) को दिए जाने वाले ऋणों के लिए 100 प्रतिशत गारंटी की जरूरत और गारंटी वाले शेयरों की कीमत की गणना में 40 प्रतिशत कमी से बैंकों तक उनकी फंडिंग पहुंच घट सकती है। इससे ब्रोकरों के लिए ट्रेडिंग लागत बढ़ सकती है।’
बीएसई का शेयर दिन के कारोबार में 9.8 प्रतिशत तक गिर गया। एंजेल वन में 9.5 प्रतिशत तक गिरावट आई। एमसीएक्स, नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट, ग्रो और 360वन डब्ल्यूएएम के शेयर इंट्राडे में 7.4 प्रतिशत तक गिर गए। कारोबार के अंत में सिर्फ एमसीएक्स का शेयर ही तेजी (0.4 प्रतिशत) के साथ बंद हुआ जबकि अन्य सभी शेयर 0.16 प्रतिशत से 7.4 प्रतिशत के दायरे में गिरकर बंद हुए। निफ्टी कैपिटल मार्केट्स इंडेक्स 1.36 प्रतिशत नीचे बंद हुआ, जबकि निफ्टी50 इंडेक्स में 0.83 प्रतिशत की बढोतरी हुई।
दिशानिर्देशों के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक ने अनिवार्य किया है कि 1 अप्रैल, 2026 से कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज (सीएमआई) को दी जाने वाली ऋण सुविधाएं पूरी तरह गारंटा पर होनी चाहिए। इसमें कॉलेटरल के रूप में उपयोग किए जाने वाले इक्विटी शेयरों पर न्यूनतम 40 प्रतिशत हेयरकट जरूरी है। मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटीज (एमटीएफ) की फंडिंग के लिए कम से कम 50 प्रतिशत नकद गारंटी होनी चाहिए।
विश्लेषकों ने कहा कि ये नियम पूंजी बाजार से जुड़ी कंपनियों जैसे स्टॉक ब्रोकरों और क्लियरिंग सदस्यों के लिए कम अनुकूल हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि 100 प्रतिशत कॉलेटरल जरूरत बैंकों की फंडिंग को ब्रोकरों के लिए कम आकर्षक बना सकती है, जिससे वे गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों , कमर्शियल पेपर्स बाजारों या गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर्स (एनसीडी) की राह पकड़ सकते हैं।
सिटी ग्रुप की एक रिपोर्ट में कहा गया है, ‘ब्रोकर और पेशेवर क्लियरिंग सदस्य उधारी के मकसद के लिए अन्य विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। पूंजी बाजार कंपनियां या लोग तेजी से गैर-पारंपरिक वित्त की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे संगठित योजनाओं में तेजी से वृद्धि और वेल्थ मैनेजरों के लिए उधारी के अवसर खुल सकते हैं और जबकि चुनिंदा समूहों में व्यापारिक गतिविधियां कम हो सकती हैं।’
जेफरीज ने प्रॉपराइटरी कारोबारियों को लेकर ज्यादा चिंता जताई और अधिक नकद कॉलेटरल आवश्यकताओं और प्रतिभूति लेनदेन कर में हाल में हुई वृद्धि का हवाला दिया। उसने कहा, ‘हमारा अनुमान है कि आरबीआई के नए नियमों से ऑप्शन कारोबार 10-12 प्रतिशत प्रभावित हो सकता है, जिसका बीएसई की आय पर लगभग 10 प्रतिशत प्रभाव पड़ने की संभावना है।’
जेफरीज ने आईसीआईसीआई ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी, ग्रो, केफिन टेक्नॉलजीज और कंप्यूटर एज मैनेजमेंट सर्विसेज को पसंद किया है। उसका कहना है कि परिसंपत्ति प्रबंधकों और रजिस्ट्रार तथा ट्रांसफर एजेंटों को कम नियामकीय जोखिम का सामना करना पड़ता है और घरेलू बचत में बड़े बदलाव से उन्हें लाभ होने की संभावना है।
इसके विपरीत प्रस्तावित दिशानिर्देशों के बाद निफ्टी बैंक इंडेक्स में 1.27 प्रतिशत की तेजी आई। दिशा-निर्देशों में बैंकों को शर्तों के आधार पर पात्र अधिग्रहण सौदे में अधिग्रहण मूल्य का 75 प्रतिशत तक वित्त मुहैया कराने की अनुमति दी गई है।