facebookmetapixel
Advertisement
Sensex फिसला, Nifty संभला- IT शेयरों की गिरावट से क्यों अटका बाजार?रियल एस्टेट में बड़ा मौका: बुजुर्गों की आवासीय परियोजना बनाने पर जोर, छोटे शहर बनेंगे ग्रोथ इंजनMSCI ने बदले इंडिया स्टॉक्स: किन शेयरों में आएगा पैसा, किनसे निकलेगा?Kotak MF के इस फंड ने दिया 48 गुना रिटर्न, ₹1,000 की SIP से 23 साल में बना ₹19.49 लाख का फंडQuality Funds में निवेश करें या नहीं? फायदे-नुकसान और सही स्ट्रैटेजी समझेंबंधन लाइफ ने लॉन्च किया नया ULIP ‘आईइन्‍वेस्‍ट अल्टिमा’, पेश किया आकर्षक मिड-कैप फंडभारत-अमेरिका व्यापार समझौते से सोयाबीन के भाव MSP से नीचे फिसले, सोया तेल भी सस्ताअब डाकिया लाएगा म्युचुअल फंड, NSE और डाक विभाग ने मिलाया हाथ; गांव-गांव पहुंचेगी सेवाTitan Share: Q3 नतीजों से खुश बाजार, शेयर 3% चढ़कर 52 वीक हाई पर; ब्रोकरेज क्या दे रहे हैं नया टारगेट ?गोल्ड-सिल्वर ETF में उछाल! क्या अब निवेश का सही समय है? जानें क्या कह रहे एक्सपर्ट

रिकॉर्ड निचले स्तर पर LIC का शेयर, आईपीओ के स्तर से 40 फीसदी घटा एमकैप

Advertisement
Last Updated- February 27, 2023 | 10:14 PM IST
LIC Chairman: Siddharth Mohanty appointed new chairman of LIC, will hold the post till 2025

अदाणी समूह के शेयरों में लगातार हो रही गिरावट के बीच बीमा दिग्गज भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का शेयर सोमवार को रिकॉर्ड निचले स्तर को छू गया।

LIC का शेयर 2.9 फीसदी टूटकर 567.8 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी का बाजार मूल्यांकन आईपीओ के स्तर से 40 फीसदी यानी 2.4 लाख करोड़ रुपये घटा है। पिछले महीने एलआईसी के शेयर में 15 फीसदी की गिरावट आई, जो मेगा-कैप में सर्वाधिक है। एलआईसी का एमकैप अब 12वें पायदान पर आ गया है, जो सूचीबद्धता के समय छठे पायदान पर था।

LIC के इक्विटी पोर्टफोलियो में हालांकि अदाणी समूह के शेयरों की हिस्सेदारी एक फीसदी से भी कम है, लेकिन बाजार ने इसके शेयर को काफी चोट पहुंचाई है।

31 जनवरी को अदाणी की कंपनियों में इक्विटी व डेट के तौर पर एलआईसी की होल्डिंग 36,000 करोड़ रुपये से कम थी।
बीमा कंपनी ने कहा कि इक्विटी खरीद की वैल्यू 30,127 करोड़ रुपये थी। अदाणी के शेयरों में लगातार हुई गिरावट के बाद एलआईसी की होल्डिंग की वैल्यू अधिग्रहण लागत से नीचे चली गई, जिससे चिंता पैदा हुई।

विश्लेषकों ने कहा कि अदाणी समूह के शेयरों में एलआईसी के निवेश के चलते पैदा हुई नकारात्मक अवधारणा से निवेशक एलआईसी के कारोबार पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित हैं। इसके अलावा उनका कहना है कि सरकारी विनिवेश के मामले में एलआईसी का लगातार दुरुपयोग हो रहा है। अभी सरकार की एलआईसी में हिस्सेदारी 96.5 फीसदी है और खुदरा भागीदारी करीब 2 फीसदी। इस बीच, विदेशी फंडों के पास इसकी महज 0.17 फीसदी हिस्सेदारी है। ऐसे में एलआईसी के वैल्यू में आ रही कमी सरकार व नागरिकों को किसी और के मुकाबले ज्यादा चोट पहुंचा रही है।

Advertisement
First Published - February 27, 2023 | 10:14 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement