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ट्रंप टैरिफ के प्रभाव से शेयर बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता, निवेशकों को सतर्क रहना जरूरी : रायचौधरी

ट्रंप के टैरिफ की घोषणा से लोगों की भावनाओं पर स्पष्ट रूप से नकारात्मक असर पड़ा है। खासकर तब जब कई एशियाई देशों को कम टैरिफ का सामना करना पड़ा है।

Last Updated- August 11, 2025 | 10:05 AM IST
stock market holidays

Stock Market: भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (Donald Trump) के टैरिफ ने बाजारों को बेचैन कर दिया है। एम्मार कैपिटल पार्टनर्स के मुख्य कार्याधिकारी मनीषी रायचौधरी ने पुनीत वाधवा को ईमेल के जरिये दिए साक्षात्कार में कहा कि अगली एक या दो तिमाही में भारतीय बाजार की ताकत और कम हो सकती है। उनसे बातचीत के मुख्य अंश…

टैरिफ को देखते हुए निवेशकों को इक्विटी बाजारों में कैसा रुख अपनाना चाहिए?

राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ की घोषणा से लोगों की भावनाओं पर स्पष्ट रूप से नकारात्मक असर पड़ा है, खासकर तब जब दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, जापान और वियतनाम जैसे कई एशियाई देशों को कम टैरिफ का सामना करना पड़ा है। मोटे तौर पर कपड़ा और परिधान, दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और मशीनरी जैसे क्षेत्र सबसे ज्यादा नाजुक दिखाई देते हैं। तथापि सेक्टर रियायत जैसे कई विवरण अभी भी साफ नहीं हैं और व्यापार वार्ता आगे बढ़ रही हैं। व्यापार और वृद्धि पर इसके प्रभाव का अधिक निश्चित आकलन बाद में ही संभव होगा। फिलहाल भारतीय बाजारों में सावधानी सबसे जरूरी है।

आपको बाजार के इस सीमित दायरे से कब बाहर निकलने की उम्मीद है और किस बात से बदलाव आएगा?

भारतीय शेयर बाजारों की सीमित दायरे में घूमना आर्थिक कारकों के बारे में अनिश्चितता को दर्शाता है : आय सीजन को लेकर चिंता और अधिकांश सेक्टर में आय के पूर्वानुमान में लगातार गिरावट। भारत एक तरह के विरोधाभास का सामना कर रहा है : अगर आर्थिक संकेतक मजबूत और स्थिर हैं तो सूक्ष्म संकेत चिंताजनक भी हैं। व्यापक आर्थिक तस्वीर में सिकुड़ता राजकोषीय और घटता चालू खाते का घाटा और लगभग एक दशक के निचले स्तर पर रहा मुद्रास्फीति का रहना है। सूक्ष्म की बात करें तो आय वृद्धि में नरमी और कंपनियों की टिप्पणियों में सावधानी दिखती है।

आय अनुमानों के निचले स्तर पर पहुंचने और सुधार शुरू होने के बाद बाज़ार इस अस्थिरता के दायरे से बाहर निकल सकते हैं। शहरी उपभोक्ता विश्वास में सुधार इसके लिए जरूरी होगा। सरकारी पूंजीगत व्यय में सुधार, करदाताओं की बढ़ती खर्च योग्य आय और सार्वजनिक क्षेत्र के उच्च वेतन से उपभोग को फिर से जीवन मिल सकता है। लेकिन निवेशक बड़ी रकम लगाने से पहले इस बदलाव के स्पष्ट प्रमाण का इंतजार करेंगे।

जेन स्ट्रीट मामले के बाद FII नियामकीय अनिश्चितता को लेकर कितने चिंतित हैं?

कुछ विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने नियामकीय प्रवर्तन के बढ़ते माहौल और एल्गोरिथम ट्रेडिंग एवं बाजार पहुंच से जुड़े नियमों में संभावित सख्ती को लेकर चिंता जताई है। फिर भी नियामक के इस दृढ़ रुख को सकारात्मक रूप से भी देखा जा रहा है क्योंकि यह इस बात का संकेत है कि आगे चलकर अनुपालन, पारदर्शिता और उचित व्यापार व्यवहार पर कड़ी नजर रहेगी। जुलाई में दक्षिण कोरिया, हॉन्गकॉन्ग और ताइवान जैसे बाजारों से विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी का जेन स्ट्रीट के मामले से कोई लेना-देना नहीं था। यह पुनर्आवंटन भारत के कमजोर आय परिदृश्य और महंगे मूल्यांकन के कारण हुआ।

क्या भारतीय बाजारों के लिए आगे इस तरह के और अवरोध हैं?

अगली एक या दो तिमाहियों में भारतीय बाजार की रेटिंग में और कमी हो सकती है। हालांकि आय के पूर्वानुमानों में गिरावट जारी है लेकिन एशियाई प्रतिस्पर्धियों की तुलना में मूल्यांकन अभी भी महंगे हैं। हाल में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर अच्छी रही है लेकिन इससे उपभोग या कॉरपोरेट आय के जमीनी आंकड़ों का पूरी तरह पता नहीं चलता। हम हॉन्गकॉन्ग/चीन और दक्षिण कोरिया पर ओवरवेट हैं और भारतीय इक्विटी पर ‘तटस्थ’ रुख अपनाए हुए हैं।

दायरे में घूमते बाजार में निवेशक कैसे पैसे कमा सकते हैं? किन सेक्टरों पर ध्यान देना जरूरी है?

इस अस्थिर बाजार को मात देने का एकमात्र तरीका चुनिंदा शेयरों का चुनाव है। ध्यान देने वाले मुख्य कारक हैं आय वितरण, सतत विकास, बेहतर रिटर्न अनुपात और उचित मूल्यांकन। हमें अग्रणी निजी बैंक, चुनिंदा कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी कंपनियां और औद्योगिक कंपनियां पसंद हैं। अपने हालिया एशियाई मॉडल पोर्टफोलियो फेरबदल में हमने लग्जरी उपभोक्ता विवेकाधीन और रक्षा शेयरों में निवेश घटाया और आईटी सेवा क्षेत्र को पूरी तरह से बाहर कर दिया।

जोखिम सहन करने वाले पहली बार के निवेशकों के लिए कौन सा परिसंपत्ति आवंटन आदर्श होगा?

जोखिम लेने वाले नए निवेशकों के लिए 60 फीसदी इक्विटी, 20 फीसदी निश्चित आय और 15 फीसदी कीमती धातुओं का मिश्रण अच्छा विकल्प हो सकता है। ध्यान रहे कि इक्विटी एक दीर्घकालिक निवेश है। करीब 5 फीसदी जोखिम पूंजी क्रिप्टोकरेंसी में लगाई जा सकती है और बेहतर होगा कि इसे एक्सचेंज ट्रेडेड फंड के माध्यम से लगाया जाए।

First Published - August 11, 2025 | 9:51 AM IST

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