भारत और चीन से लेकर ब्राज़ील तक के अन्य उभरते बाज़ारों (ईएम) में निवेश की पैरवी करने वाले निवेश गुरु मार्क मोबियस का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करने के सबसे शुरुआती और सबसे प्रभावशाली समर्थकों में से एक माने जाने वाले मोबियस ने उभरते बाजारों को सीमित सोच से निकाला और वैश्विक निवेशकों के लिए इन्हें निवेश के मुख्य माध्यम में बदलने में अहम भूमिका निभाई। उनके काम ने भारत जैसे देशों को वैश्विक निवेश के मानचित्र पर लाने में भी मदद की, जिससे इन बाजारों में अरबों डॉलर का निवेश आया।
करीब चार दशक के अपने करियर के दौरान मोबियस ने उन देशों में निवेश करके अपनी प्रतिष्ठा बनाई, जिन्हें दूसरे लोग बहुत ज्यादा जोखिम भरा मानते थे।
फ्रैंकलिन टेम्पलटन की सीईओ जेनी जॉनसन ने एक बयान में कहा, मार्क ने दुनिया की आंखें उभरते बाज़ारों की ओर खोलीं और निवेशकों की कई पीढ़ियों को ज्यादा वैश्विक, ज्यादा साहसी और ज्यादा कल्पनाशील तरीके से यह सोचने के लिए प्रेरित किया कि क्या संभव है । उन्होंने हमारे निवेश के तरीके को बदल दिया और यह भी कि हम दुनिया भर में अवसरों को किस तरह से देखते हैं।
मोबियस 1987 में फ्रैंकलिन टेम्पलटन से जुड़े, जहां उन्होंने सबसे पहले उभरते बाज़ारों के लिए डेडिकेटेड फंडों में से एक लॉन्च किया। अगले तीन दशकों में यह फंड बढ़कर कई अरब डॉलर की फ्रेंचाइजी बन गया, जिसने उभरते और अग्रणी बाज़ारों में निवेश किया।
अपनी व्यापक यात्राओं और प्रत्यक्ष शोध के लिए मशहूर मोबियस केवल शोध विश्लेषण पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय व्यवसायों, राजनीति और संस्कृतियों को समझने को ज्यादा महत्त्व देते थे। ज़मीनी अंतर्दृष्टि हासिल करने के लिए वे अक्सर भारत आते थे। उनका मानना था कि सफल निवेश के लिए व्यापक आर्थिक और सामाजिक संदर्भ की गहरी समझ होना आवश्यक है।
बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में मोबियस ने इस बात पर ज़ोर दिया था कि उभरते बाजारों में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक बात है, लेकिन वे इन बाजारों की लंबी अवधि की संभावनाओं को लेकर आशावादी बने रहे। यह ऐसी समझ है जो मौजूदा हालात में कई निवेशकों को सही लगेगी। उनका व्यापक भरोसा यह था कि बाजार में आने वाले तेज उतार-चढ़ाव अक्सर कीमतों में गड़बड़ी पैदा करते हैं, इसलिए धैर्य रखने वाले निवेशकों के लिए अवसर भी पैदा करते हैं।
जनवरी 2018 में टेम्पलटन इमर्जिंग मार्केट्स ग्रुप के कार्यकारी चेयरमैन पद से हटने के बाद भी मोबियस सक्रिय रहे। वह मोबियस कैपिटल पार्टनर्स के सह-संस्थापक थे, निवेश पर किताबें लिखीं और उभरते बाजारों के घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखी। 2019 में मोबियस ने इस अख़बार को बताया था कि उनके फंड में 17 करोड़ डॉलर की संपत्ति थी, जिसमें से उन्होंने 20 फीसदी हिस्सा भारत के लिए रखा था।
मोबियस अपनी जिंदगी के आखिरी वर्षों तक भी बाजारों में काफी सक्रिय रहे और साक्षात्कार व सार्वजनिक कार्यक्रमों के जरिये अपने विचार साझा करते रहे। जो लोग उन्हें जानते थे, उनका कहना था कि वे अपना समय देने में काफी उदार थे, सोच-समझकर सलाह देते थे। उनमें सीखने की गहरी जिज्ञासा थी। वे जहां भी जाते, वहां नए लोगों से जुड़ने और वहां की स्थानीय संस्कृतियों को समझने की पूरी कोशिश करते थे।
2024 के आखिर में घरेलू ब्रोकरेज पीएल कैपिटल के कार्यक्रम में मोबियस ने कहा था कि वे भारत की लंबी अवधि की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। उन्होंने संरचनात्मक सुधारों, बुनियादी ढांचे पर खर्च, तेजी से बढ़ते शहरीकरण और युवा आबादी के बीच बढ़ती खपत को विकास का मुख्य चालक बताया। इस कार्यक्रम में उन्होंने रक्षा निर्माण जैसे क्षेत्रों में मौजूद अवसरों पर भी प्रकाश डाला और बिजली तथा कमोडिटीज की लगातार बनी रहने वाली मांग पर जोर दिया।
पीएल कैपिटल की चेयरपर्सन और एमडी अमिषा वोरा ने मोबियस का इंटरव्यू लिया था। वोरा ने कहा, मोबियस ने उभरते बाजारों को निवेश के लायक बनाया।