शेयर बाजार

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच रक्षा शेयरों में तेजी, बाजार की गिरावट में ‘डिफेंस’ बना निवेशकों की ढाल!

पश्चिम एशिया में युद्ध के तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार गिरा, लेकिन मजबूत ऑर्डर बुक और रणनीतिक बढ़त के कारण रक्षा शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखी गई

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दीपक कोरगांवकर   
Last Updated- March 03, 2026 | 9:45 PM IST

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण सोमवार को बेंचमार्क और व्यापक सूचकांकों में आई भारी गिरावट के बावजूद निफ्टी डिफेंस इंडेक्स हरे निशान में बंद हुआ। निफ्टी में 1.24 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी जबकि निफ्टी डिफेंस इंडेक्स में 0.49 फीसदी की बढ़त हुई। डिफेंस इंडेक्स एकमात्र ऐसा था, जिसने सकारात्मक रिटर्न दिया क्योंकि सूचीबद्ध रक्षा कंपनियों में निवेशकों का रुझान बना रहा।

इंडेक्स में सबसे ज्यादा चढ़ने वाली कंपनियां पारस डिफेंस ऐंड स्पेस टेक्नॉलजीज और सोलर इंडस्ट्रीज थीं। इनके शेयरों में 3 से 3.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इनके बाद डायनामेटिक टेक्नॉलजीज और इंडेक्स की दिग्गज कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बीईएल) का स्थान रहा, जिनमें लगभग 2.2 फीसदी का इजाफा हुआ। चढ़ने वाली अन्य बड़ी कंपनियों में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स (1.1 प्रतिशत) और एस्ट्रल माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स (1.69 फीसदी) शामिल थीं।

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के एकजुट हमलों ने पश्चिम एशिया में गहरा तनाव बढ़ा दिया है, जिससे हालात सीमित शत्रुता से सक्रिय सैन्य संघर्ष में बदल गए हैं। ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करके जवाबी कार्रवाई की। जेएम फाइनैंशियल इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज़ के विश्लेषकों के अनुसार ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र को तुलनात्मक रूप से समर्थन मिल सकता है। 

इस साल 1 जनवरी तक बीईएल के पास 73,015 करोड़ रुपये के ऑर्डर थे, जिन्हें पूरा किया जाना है। वित्त वर्ष 2025 के परिचालन राजस्व के आधार पर ऑर्डर की संख्या और ऑर्डर की आवक का अनुपात लगभग 3.2 गुना है, जो मध्यम अवधि में राजस्व की अच्छी संभावना दर्शाता है। इक्रा के अनुसार सरकार के पूंजीगत बजट आवंटन में वृद्धि और भारत की रक्षा उत्पाद निर्माण क्षमता बढ़ाने पर निरंतर ध्यान देने से मध्यम से लंबी अवधि में बीईएल के लिए ऑर्डर की आवक को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

एचएएल के पास अनुमानित 2.5 लाख करोड़ रुपये की मजबूत ऑर्डर बुक है। इससे अगले कुछ वर्षों में दो अंकों में राजस्व वृद्धि की संभावना बनती है। निकट भविष्य में तेजस एमके-1ए की डिलिवरी में तेजी से इजाफा होने की उम्मीद है, जिससे आने वाली तिमाहियों में राजस्व में बढ़ोतरी होगी। रक्षा क्षेत्र की यह प्रमुख कंपनी इस वर्ष पांच विमानों की डिलिवरी कर सकती है।

मिरे ऐसेट शेयरखान रिसर्च एचएएल की बढ़ोतरी की रफ्तार को लेकर आशावादी है क्योंकि वह रक्षा क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों से लाभान्वित होने वाली प्रमुख कंपनियों में से एक है। ब्रोकरेज का कहना है कि उसके पास एक मजबूत ऑर्डर बुक और आशाजनक ऑर्डर के प्रस्ताव हैं, जिनसे 2032 तक बढ़त की संभावना है। 

इस बीच, एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स को अपने अंतरिक्ष, मौसम विज्ञान और जल विज्ञान कारोबार को एक अलग इकाई (एस्ट्रा स्पेस टेक्नॉलजीज यानी एएसटीपीएल) में विभाजित करने के लिए बोर्ड से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इससे स्वतंत्र रूप से दो सूचीबद्ध कंपनियां बनेंगी, जिनमें बराबर की शेयरधारिता होगी। पुनर्गठन के बाद एएसटीपीएल एक विशुद्ध रक्षा और एरोस्पेस कंपनी के रूप में कार्य करेगी, जबकि एएसटीपीएल में अन्य कारोबार शामिल होंगे। कंपनी का लक्ष्य सभी मंजूरियां समय पर हासिल कर वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही तक विभाजन प्रक्रिया पूरी करना और एएसटीपीएल को सूचीबद्ध कराना है।

इस डीमर्जर से कंपनी को बेहतर पूंजी आवंटन के साथ दोनों प्रमुख क्षेत्रों (रक्षा और अंतरिक्ष) पर बेहतर ध्यान केंद्रित करने और आने वाले समय में विशिष्ट क्षेत्रों के अनुरूप विकास के अवसरों को लक्षित करने में मदद मिलेगी। वर्तमान ऑर्डर बुक में रक्षा क्षेत्र का योगदान 72 फीसदी है जबकि बाकी हिस्सा अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों से है।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने एक नोट में कहा कि इस कदम से संरचनात्मक रूप से दो विशिष्ट प्लेटफॉर्म तैयार होंगे – एक भारत के रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को मजबूत करेगा और दूसरा स्वदेशी अंतरिक्ष हार्डवेयर और उपग्रह क्षमताओं का विस्तार करेगा जिससे दोनों घरेलू और वैश्विक मांग में वृद्धि का लाभ उठाने की स्थिति में होंगे।

First Published : March 3, 2026 | 9:39 PM IST