भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि नियामक को डेरिवेटिव बाजार के फ्यूचर्स सेगमेंट को लेकर कोई चिंता नहीं है, लेकिन शॉर्ट-डेटेड (कम अवधि वाले) ऑप्शंस में सट्टेबाजी की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। पांडेय ने कहा कि नियामक के हालिया हस्तक्षेप खास तौर पर कम अवधि वाले ऑप्शंस में हो रही अति को नियंत्रित करने पर केंद्रित हैं, जबकि कीमत निर्धारण (प्राइस डिस्कवरी) और तरलता (लिक्विडिटी) में फ्यूचर्स और डेरिवेटिव्स की अहम भूमिका को बरकरार रखा जा रहा है।
डेरिवेटिव्स सेगमेंट पर एक सवाल के जवाब में पांडेय ने कहा कि इस मुद्दे को व्यापक रूप से F&O से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप इसे F&O नहीं कह सकते, क्योंकि फ्यूचर्स को लेकर हमें कभी कोई समस्या नहीं रही। समस्या कम अवधि वाले ऑप्शंस के साथ थी।”
पांडेय ने कहा कि सेबी पहले ही कम अवधि (शॉर्ट-टेनर) वाले ऑप्शंस में हो रही अति को रोकने के लिए कई नियामकीय कदम उठा चुका है। ये उपाय अक्टूबर 2024 और मई 2025 में घोषित किए गए थे, जिनका चरणबद्ध क्रियान्वयन जुलाई, अक्टूबर और दिसंबर में किया गया।
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नियामक अब इन कदमों के प्रभाव का आकलन बाजार के आंकड़ों के आधार पर कर रहा है। उन्होंने कहा, “हम डेटा के आधार पर यह देख रहे हैं कि इसका क्या असर पड़ा है। अगर हमें लगता है कि अभी भी हस्तक्षेप की जरूरत है, तो हम उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अलग-अलग रास्तों पर विचार करेंगे और एक और दौर की परामर्श प्रक्रिया करेंगे।”
पांडेय ने जोर देकर कहा कि सेबी इस मुद्दे पर “बार-बार रुख बदलने” (फ्लिप-फ्लॉप) या व्यापक स्तर पर एक जैसे कदम उठाने का इरादा नहीं रखता। इसके बजाय, सेबी पहले समस्या वाले खास क्षेत्रों की पहचान करेगा। फिर उन समस्याओं को धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से हल किया जाएगा।
कम अवधि वाले ऑप्शंस, खासकर जीरो-डे-टू-एक्सपायरी (उसी दिन समाप्त होने वाले) कॉन्ट्रैक्ट्स, ऐसे डेरिवेटिव्स होते हैं जो उसी दिन या कुछ ही दिनों में एक्सपायर हो जाते हैं। ये सस्ते होते हैं और इनमें ज्यादा लीवरेज मिलता है, जिससे ट्रेडर्स बहुत कम समय के बाजार उतार-चढ़ाव पर दांव लगा सकते हैं या हेजिंग कर सकते हैं। हालांकि, ये इंस्ट्रूमेंट्स बेहद अस्थिर होते हैं और बहुत तेजी से अपनी वैल्यू खो देते हैं, जिससे रिटेल निवेशकों के लिए ये काफी जोखिम भरे साबित होते हैं।
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सेबी चीफ ने कहा कि फ्यूचर्स मार्केट और व्यापक डेरिवेटिव्स सेगमेंट कीमत तय करने (प्राइस डिस्कवरी) और बाजार में तरलता (लिक्विडिटी) बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने आगे कहा, “बेहतर है कि हम उन्हीं समस्या वाले क्षेत्रों पर ध्यान दें, जिन्हें सेबी ने खुद पहचाना है और जिनका डेटा भी सार्वजनिक किया है। हमने वैधानिक चेतावनियां जारी की हैं, कुछ कदम उठाए हैं और उनके असर का लगातार विश्लेषण करेंगे। आगे भी हम इसी रास्ते पर चलेंगे।
(PTI इनपुट के साथ)