वित्त मंत्रालय ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की सालाना रिपोर्ट के प्रारूप में कुछ बदलाव के सुझाव दिए हैं। इस प्रारूप में ‘इसकी गतिविधियों का सही और पूरा लेखा जोखा’, नीतियां और पूरे साल का कार्यक्रम शामिल होगा। नए प्रारूप में व्यापक खुलासे और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से लेकर बाजार नियामक द्वारा की गई नियामकीय कार्रवाई के गहराई से विश्लेषण का ब्योरा होगा।
नए प्रारूप के तहत सेबी की सालाना रिपोर्ट में अब नियामक के फंड का स्रोत और व्यय के प्रमुख क्षेत्र, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और कॉर्पोरेट पुनर्गठन के हिसाब से व्यापक खुलासा जैसे विलय एवं अधिग्रहण के व्यापक ब्योरे, प्रशासन में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नियामक द्वारा की गई नियामकीय कार्रवाई, खुली पेशकश, पेशकश दस्तावेजों पर जारी किए जाने संबंधी टिप्पणियां, सूचीबद्ध कंपनियों के खत्म होने का ब्योरा, चूक वाली कंपनियोंं का ब्योरा, कंपनी मामलों के मंत्रालय के साथ नियामकीय तालमेल और इस सिलसिले में उठाए गए कदम शामिल होंगे।
नए प्रारूप का अवलोकन करते हुए मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) ने कहा, ‘केंद्र सरकार को बोर्ड एक रिपोर्ट देगा, जिसमें उसकी गतिविधियों का सही और पूरा लेखा जोखा, पहले के वित्त वर्ष में नीतियां और कार्यक्रम शामिल होंगे। 12 मार्च की गजट अधिसूचना के मुताबिक हर वित्त वर्ष की समाप्ति के 90 दिन के भीतर रिपोर्ट पेश की जाएगी। सामान्यतया सेबी अपनी सालाना रिपोर्ट पेश करने में 6 महीने से ज्यादा वक्त लेता है।’ नए प्रारूप में 4 मुख्य हिस्से होंगे, जिसमें आय और व्यय शामिल होगा, जो सि समय नियामक द्वारा अलग अलग पेश किया जाता है। दिलचस्प है कि पिछला सालाना लेखा जोखा वित्त वर्ष 2018-19 का था, जो पिछले साल जून में प्रकाशित हुआ था।
इसके अलावा मंत्रालय ने ‘नए नियम, लक्ष्य और उद्देश्य, पिछले साल पेश किए गए नए नियमन व नियमों के असर का आकलन या प्रगति, अंतरराष्ट्रीय सक्रियता’ आदि को नए अध्याय में शामिल करने का भी सुझाव दिया है। पहले से विपरीत नए प्रारूप में वित्तीय बाजारों की समीक्षा भी शामिल होगी, जिसमें भारत के आर्थिक और निवेश के माहौल का विश्लेषण और विकसित एवं प्रमुख देशों के साथ इसकी तुलना के साथ जोखिम की संभावनाओं, दबाव की संभावनाओं आदि का ब्योरा होगा।
मंत्रालय ने बाजार नियामक से कहा था कि वह म्युचुअल फंड हाउसों को एडीशनल टियर 1 (एटी-1) बॉन्डों की 100 साल की परिपक्वता रखने के दिशानिर्देश को वापस ले क्योंकि इससे बाजार बाधित हो सकता है और बैंकोंं द्वारा धन जुटाने पर इसका असर पड़ सकता है। उसके बाद सरकार ने नए नियम पेश किए हैं।
प्रॉक्सी फर्म स्टेकहोल्डर्स एंपावरमेंट सर्विसेज के जेएन गुप्ता ने कहा, ‘सेबी की अहम भूमिका को ध्यान में रखते हुए यह एक समग्र खुलासा है, जिसका उल्लेख किया गया है।’
भारत के बाजार को वैश्विक बाजारों से जोडऩे के साथ इस तरह के खुलासे से दीर्घावधि के हिसाब से भारत के नियामक और यहां तक कि प्रतिभूति बाजार की भी प्रतिष्ठा बढ़ेगी। इससे सेबी के अन्य नियामक संगठनोंं की तुलना में महत्त्व का भी पता चलता है। पहले का प्रारूप थोड़ा जटिल था और सूचनाएं ढांचागत तरीके से नहीं दी जाती थीं।