facebookmetapixel
Advertisement
वैश्विक संकेतों के उलट उछल गए देसी शेयर बाजार, सेंसेक्स 1,774 अंक चढ़ालागत की मार से जूझते हाईवे प्रोजेक्ट्स को सरकार ने दी राहत, 3 महीने के स्पेशल मुआवजा सिस्टम का ऐलानIncome Tax Act 2025: अब कैसे लगेगा टैक्स? जानिए बड़े बदलावअमेरिका में तरजीही बाजार पहुंच पर भारत की नजर, संबंध बेहद मजबूत: गोयलReliance की SEZ रिफाइनरी से डीजल, ATF निर्यात पर नहीं लगेगा विंडफॉल टैक्सपश्चिम एशिया संकट से महंगा हुआ सूरजमुखी तेल, भारत में खपत 10% घटने का अनुमानJioBlackRock में बड़ा बदलाव: मार्क पिलग्रेम देंगे इस्तीफा, स्वप्निल भास्कर संभालेंगे कमानफ्रैंकलिन टेम्पलटन की SIF में एंट्री, लॉन्च किया सफायर इक्विटी लॉन्ग शॉर्ट फंड; क्या है इसमें खास?सरकार ने FY26 में इनडायरेक्ट टैक्स का लक्ष्य पार किया, कस्टम और GST कलेक्शन मजबूतConsumption Funds: 3 महीने में 12.7% टूटे: क्या अब निवेश का सही मौका या सतर्क रहने की जरूरत?

SEBI का AIF में निवेशक श्रे​णियों में अंतर समाप्त करने पर जोर

Advertisement
Last Updated- May 24, 2023 | 9:53 PM IST
SEBI-सेबी

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) वैकल्पिक निवेश फंडों (AIF) में प्राथमिकता के आधार पर वितरण खत्म कर सकता है। उसके बजाय उनके संकल्प के आधार पर प्रो-राटा राइट्स देने पर विचार किया जा सकता है।

AIF में विभिन्न पक्ष निवेश करते हैं किंतु कुछ योजनाओं में वितरण के समय पक्षपात देखा जाता है। इसमें अक्सर निवेशकों की छोटी श्रेणी को उनके योगदान के मुकाबले से कम शेयर मिलते हैं, जबकि बड़ी श्रेणी योगदान के मुकाबले ज्यादा शेयर मिल जाते हैं।

चूंकि, वरिष्ठ श्रेणी के निवेशकों को शेयर वितरण में तरजीह दी जाती है इसलिए मुनाफा भी पहले उन्हीं को बांटा जाता है। उनको होने वाले घाटे की भरपाई छोटी श्रेणी के निवेशकों की बची हुई पूंजी से की जाती है।

एक नए चर्चा पत्र में सेबी ने प्रस्ताव किया है कि प्रत्येक निवेशक को उसके निवेश के हिसाब से ही प्रो-राटा राइट्स दिए जाएं। इससे किसी भी योजना का दुरुपयोग नहीं हो सकेगा।

सेबी ने कहा, ‘यह देखा गया कि पीडी मॉडल का दुरुपयोग किया जा रहा है और यह एआईएफ के नियामकीय उद्देश्य के अनुरूप नहीं है।’

Also read: गिफ्ट निफ्टी की पेशकश के बीच F&O का समय बढ़ाने पर जोर

पूंजी बाजार नियामक ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि पीडी मॉडल अपनाने वाले एआईएफ की मौजूदा योजनाएं अपने मौजूदा निवेश को बरकरार रख सकती हैं, लेकिन निवेश करने वाली नई कंपनी में नए निवेश को स्वीकार नहीं कर सकती हैं।

नवंबर के शुरू में, सेबी ने पीडी मॉडल से जुड़े मौजूदा फंडों को तब तक नए निवेश लेने से प्रतिबं​धित कर दिया था, जब तक कि इस मामले में नियामकीय ​स्थिति स्पष्ट न हो जाए।

Advertisement
First Published - May 24, 2023 | 9:53 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement