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सेबी ने ओपन मार्केट बायबैक दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव रखा, टैक्स बदलाव के बाद नियमों में संभावित उलटफेर

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यह प्रस्ताव फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री (फिक्की) और एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया (एआईबीआई) जैसे उद्योग निकायों के सुझावों के बाद आया है

Last Updated- April 02, 2026 | 11:14 PM IST
SEBI

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने गुरुवार को खुले बाजार से शेयरों की पुनर्खरीद फिर से शुरू करने का प्रस्ताव रखा। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो वह नियामकीय कदम पलट जाएगा, जिसके तहत पिछले साल कर नियमों में बदलाव के कारण इस रास्ते को खत्म कर दिया गया था।

सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी परामर्श पत्र में नियामक ने कहा कि इस व्यवस्था को मौजूदा टेंडर ऑफर के साथ-साथ सेबी (प्रतिभूतियों की पुनर्खरीद) नियमन, 2018 के तहत अतिरिक्त तरीके के रूप में फिर से लागू किया जा सकता है।

सेबी ने बताया कि स्टॉक एक्सचेंज आधारित पुनर्खरीद को बंद करने का पहले का फ़ैसला 1 अप्रैल, 2025 से लागू हुआ था और उसे मुख्य रूप से शेयरधारकों की असमान भागीदारी और कर आर्बिट्रेज से जुड़ी चिंताओं के कारण लिया गया था।

पिछली व्यवस्था के तहत पुनर्खरीद कर का बोझ कंपनियों पर पड़ता था, जिससे यह चिंता हुई कि पुनर्खरीद में हिस्सा लेने वाले शेयरधारक तो कर-मुक्त होकर निकल जाते थे जबकि दूसरे इससे वंचित रह जाते थे।

हालांकि इसके बाद कर नियमों में हुए बदलावों ने हालात को बदल दिया। अप्रैल 2026 से पुनर्खरीद से मिलने वाली रकम पर शेयरधारकों को होने वाले पूंजीगत लाभ पर कर लगेगा; इससे उन लोगों के बीच कर के मामले में अंतर खत्म हो जाएगा, जो पुनर्खरीद में हिस्सा लेते हैं और जो लोग खुले बाज़ार में अपने शेयर बेचते हैं।

सेबी ने कहा, इससे शेयरधारकों के बीच कर की वजह से होने वाली असमानता की पिछली चिंता दूर हो जाती है। उसने यह भी कहा कि अब पुनर्खरीद में शेयर बेचना कर के नजरिये से एक सामान्य बाज़ार लेन-देन जैसा ही होगा।

यह प्रस्ताव फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री (फिक्की) और एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया (एआईबीआई) जैसे उद्योग निकायों के सुझावों के बाद आया है। उन्होंने तर्क दिया था कि खुले बाजार में पुनर्खरीद हुनिया भर में होती है और परिचालन की दृष्टि से कुशल है।

निवेश बैंकरों ने कहा कि इस तरीके से कंपनियां बेचने के दबाव को धीरे-धीरे वहन कर लेती हैं, शेयरों की कीमतों को सहारा दे पाती हैं और बाजार मूल्यांकन पर शेयरों को खत्म करके प्रति शेयर कमाई (ईपीएस) को बेहतर बना पाती हैं। सेबी ने संकेत दिया कि ऐसी पुनर्खरीद को नियंत्रित करने वाला पहले का नियामकीय ढांचा, जिसमें रोजाना की खरीद की सीमाएं, कीमत दायरा, डिस्क्लोजर जरूरत और एक अलग ट्रेडिंग विंडो का इस्तेमाल शामिल है, आगे भी लागू रहेगा।

पुनर्खरीद ऑर्डर-मैचिंग सिस्टम के ज़रिये स्टॉक एक्सचेंजों के रास्ते ही होंगे। इससे सभी शेयरधारकों को बराबर का मौका मिलेगा। हालांकि इसमें हिस्सा लेना अभी भी कीमत-समय की मैचिंग पर निर्भर करेगा। नियामक ने इस प्रस्ताव पर 23 अप्रैल तक आम लोगों से टिप्पणी मांगी है, जिसके बाद वह इस पर अपना अंतिम फैसला लेगा।

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First Published - April 2, 2026 | 11:07 PM IST

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