चीन के केंद्रीय बैंक ने ऐसा कदम उठाया है जिसने दुनिया भर के बाजारों का ध्यान खींच लिया है। लगभग एक साल तक लगातार बाजार में पैसा डालने के बाद अब पहली बार बैंक ने उल्टा रास्ता अपनाते हुए सिस्टम से पैसा वापस खींच लिया है। मार्च महीने में बैंक ने कुल मिलाकर करीब 1140 अरब युआन की तरलता (कैश) बाहर निकाल ली। यह कदम अचानक जरूर लगता है, लेकिन इसके पीछे एक बड़ी रणनीति छिपी है।
पिछले कुछ समय तक चीन की अर्थव्यवस्था सुस्ती से जूझ रही थी, इसलिए सरकार और केंद्रीय बैंक मिलकर बाजार में पैसा डाल रहे थे ताकि कारोबार को सहारा मिले। लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। साल की शुरुआत में ही अर्थव्यवस्था ने रफ्तार पकड़ी है। इसी बीच ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतों में उछाल आ गया है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। यही वजह है कि अब बैंक सतर्क हो गया है और बिना जरूरत ज्यादा पैसा डालने से बच रहा है।
ब्लूमबर्ग के छपी खबर के मुताबिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बताता है कि चीन का केंद्रीय बैंक फिलहाल बाजार को “पैसों से भरने” के मूड में नहीं है। बैंक यह संकेत देना चाहता है कि सिस्टम में पहले से ही पर्याप्त पैसा मौजूद है और अभी अतिरिक्त मदद की जरूरत नहीं है। यानी बैंक अपनी ताकत बचाकर रखना चाहता है ताकि भविष्य में अगर हालात बिगड़ते हैं तो वह तुरंत कदम उठा सके।
दिलचस्प बात यह है कि इतनी बड़ी रकम निकालने के बावजूद ब्याज दरों में कोई हलचल नहीं दिखी। बाजार में ओवरनाइट कर्ज की दर करीब 1.3% के आसपास ही बनी हुई है। इसका मतलब साफ है कि भले ही पैसा निकाला गया हो, लेकिन आर्थिक माहौल अभी भी स्थिर और संतुलित बना हुआ है।
हालांकि अभी बैंक सतर्क नजर आ रहा है, लेकिन कई विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में हालात बदल सकते हैं। अगर महंगाई का असर ज्यादा नहीं बढ़ा या आर्थिक दबाव फिर से बढ़ा, तो बैंक ब्याज दरें घटा सकता है या बैंकों के लिए नकद रिजर्व नियमों में ढील दे सकता है। यानी अभी खेल खत्म नहीं हुआ, बल्कि असली चालें आगे चलकर दिख सकती हैं।
चीन का केंद्रीय बैंक फिलहाल एक संतुलित और सोच-समझकर कदम उठा रहा है। न तो वह अर्थव्यवस्था को झटका देना चाहता है और न ही बेवजह ज्यादा पैसा डालना चाहता है। यह एक तरह का संकेत है कि हालात पर नजर रखी जा रही है और सही समय आने पर ही बड़ा कदम उठाया जाएगा। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि आने वाले महीनों में चीन की अगली चाल क्या होगी। (ब्लूमबर्ग के इनपुट के साथ)