शेयर बाजार में गिरावट का झटका म्युचुअल फंड निवेशकों के इक्विटी पोर्टफोलियो को भी लगा है। यही कारण है कि कैलेंडर वर्ष 2020 की पहली छमाही के दौरान ऐसे फंड में 11 से 15 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। सबसे बड़ी इक्विटी श्रेणी वाले लार्जकैप फंड इस अवधि में करीब 13 फीसदी के नकारात्मक रिटर्न के साथ निवेशकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में विफल रहे हैं।
एमएफ वितरकों का कहना है कि उन्होंने देखा है कि निवेशकों को घाटा हो रहा है और वे पोर्टफोलियो से बाहर हो रहे हैं। तेजस कंसल्टैंसी के सह-संस्थापक रितेश सेठ ने कहा, ‘अपने नकदी प्रवाह को लेकर चिंतित रहने वाले निवेशों की नजर पहले रिटर्न पर होती थी लेकिन अब वे अपना निवेश समेटने की कोशिश कर रहे हैं।’ इस साल अब तक लार्जकैप फंड के मूल्य में मिडकैप अथवा स्मॉलकैप के मुकाबले अधिक गिरावट दर्ज की गई है। वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों से आंकड़ों से पता चलता है कि मिडकैप फंड में इस साल अब तक 9.6 फीसदी की गिरावट आ चुकी है जबकि स्मॉलकैप फंड में 11.26 फीसदी की गिरावट आई है।
हालांकि हाल के महीनों में कुछ सुधार भी हुआ है लेकिन सलाहकारों का कहना है कि निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। प्लान रुपी इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के संस्थापक अमोल जोशी ने कहा, ‘इक्विटी श्रेणी में निवेशकों का सतर्क दृष्टिकोण होना चाहिए। कुल पोर्टफोलियो में लार्जकैप फंड की हिस्सेदारी 60 फीसदी तक रखनी चाहिए जबकि शेष निवेश मिडकैप और स्मॉलकैप फंड में करना चाहिए।’ विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में अनिश्चितता को देखते हुए बाजार में उतार-चढ़ाव फिलहाल बने रहने की आशंका है।