ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि भारत की प्रमुख सूचीबद्घ कंपनियों के लिए एक और तिमाही अच्छी साबित हो सकती है। निफ्टी 50 में शामिल कंपनियों का एकीकृत शुद्घ मुनाफा चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 24.8 फीसदी बढ़ सकता है। धातु और खनन कंपनियों (209 फीसदी), बैंक एवं वित्तीय फर्मों (25 फीसदी) तथा तेल एवं गैस (17 फीसदी) क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों की आय में खासी वृद्घि की संभावना है।
हालांकि गैर-चक्रीय क्षेत्रों की सूचीबद्घ कंपनियों और अन्य विनिर्माताओं का समेकित शुद्घ मुनाफा दूसरी तिमाही में 0.3 फीसदी घट सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि जिसंों और ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्घि से विनिर्माताओं और उपभोक्ता वस्तुओं की कंपनियों के मार्जिन पर दबाव के संकेत हैं, क्योंकि कमजोर मांग के कारण कंपनियां बढ़ी लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने में सक्षम नहीं हैं।
आईडीबीआई कैपिटल के विश्लेषकों ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के अनुमान में कहा है, ‘हमें उम्मीद है कि दूसरी तिमाही में आय में मजबूत वृद्घि हो सकती है लेकिन मार्जिन पर दबाव देखा जा सकता है।’
ब्रोकरेज फर्मों का अनुमान है कि निफ्टी 50 कंपनियों का दूसरी तिमाही में समेकित शुद्घ मुनाफा 1.34 लाख करोड़ रुपये रह सकता है, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 1.07 लाख करोड़ रुपये से 24.8 फीसदी अधिक है और चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के 1.22 लाख करोड़ रुपये से करीब 10 फीसदी ज्यादा है। दूसरी तिमाही में कंपनियों का मुनाफा पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के रिकॉर्ड 1.35 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा ही कम रहेगा।
इस सूचकांक में शामिल कंपनियों की समेकित शुद्घ बिक्री और शुद्घ ब्याज आय दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 27.4 फीसदी बढ़कर 10.9 लाख करोड़ रुपये रह सकती है, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 8.54 लाख करोड़ रुपये थी। समेतिक आय मे तकरीबन आधी वृद्घि चार तेल एवं गैस कंपनियों – रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडियन ऑयल, ओएनजीसी और भारत पेट्रोलियम की बदौलत आएगी। ईंधन के दाम बढऩे से दूसरी तिमाही में इन कंपनियों की बिक्री में जोरदार इजाफा होने का अनुमान है। कुल मिलाकर निफ्टी 50 कंपनियों की समेतिक आय वृद्घि में तीन चक्रीय क्षेत्रों का योगदान करीब 78 फीसदी रह सकता है।
येस सिक्योरिटीज के विश्लेषक का कहना है, ‘वित्तीय और सार्वजनिक तेल कंपनियों को छोड़कर अन्य कंपनियों की आय में कमी आएगी क्योंकि लागत बढऩे से उनका परिचालन मार्जिन पर दबाव आ सकता है।’ यह विश्लेषण येस सिक्योरिटीज, आईडीबीआई कैपिटल, मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज, फिलिप कैपिटल, एमके ग्लोबल और सेंट्रम कैपिटल जैसे ब्रोकरेज के चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कंपनियों की आय के अनुमान पर आधारित है।
निफ्टी की 50 में से 36 कंपनियों का मुनाफा दूसरी तिमाही में करीब 100 फीसदी बढ़ सकता है। कोल इंडिया, हिंडाल्को, जेएसडब्ल्यू स्टील और टाटा स्टील के लिए दूसरी तिमाही अब तक की सबसे अच्छी तिमाही साबित हो सकती है। इन चारों कंपनियों का समेकित शुद्घ मुनाफा 23,800 करोड़ रुपये रह सकता है जो पिछले साल की समान तिमाही के 7,700 करोड़ रुपये से करीब तीन गुना और चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के 18,900 करोड़ रुपये से करीब 26 फीसदी अधिक हो सकता है। दूसरी तिमाही में कंपनियों की कुल मुनाफा वृद्घि में धातु क्षेत्र का योगदान करीब 60 फीसदी होगा।
इसके साथ ही धातु और खनन कंपनियां मुनाफे के लिहाज से आईटी कंपनियों से कहीं आगे निकल सकती हैं। पांच प्रमुख आईटी कंपनियों का शुद्घ मुनाफा दूसरी तिमाही में 22,300 करोड़ रुपये रह सकता है जो पिछले साल की समान तिमाही के 18,920 करोड़ रुपये से 17.8 फीसदी अधिक है। बैंक, बीमा और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का मुनाफा भी दूसरी तिमाही में बेहतर रह सकता है। इस क्षेत्र की कंपनियों का समेकित शुद्घ मुनाफा 25 फीसदी बढ़कर 33,700 करोड़ रुपये रह सकता है।