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फार्मा में पीई/वीसी निवेश बढ़ा

Last Updated- December 14, 2022 | 11:02 PM IST

दवा कंपनियों में निजी इक्विटी (पीई)/वेंचर कैपिटल (वीसी) निवेश वर्ष 2020 में 3.5 गुना से ज्यादा बढ़ा और यह पहली बार जनवरी से सितंबर 2020 के दौरान 1 अरब डॉलर को पार कर 1.69 अरब डॉलर के आंकड़े पर पहुंचा है।
विश्लेषकों का कहना है कि निवेश से आकर्षक निकासी की मदद से इस उद्योग का निवेशकों के बीच शानदार और मजबूत संबंध बना हुआ है। फंड प्रबंधकों का कहना है कि निवेशक भारत में दवा निर्माण गतिविधि पर सकारात्मक बने हुए हैं जिसमें चीन से दवा आयात पर प्रतिबंध की वजह से कोविड की अवधि के दौरान और ज्यादा मजबूती आई है। जनवरी से सितंबर 2020 के दौरान इस क्षेत्र में हुए 19 सौदों ने 1.69 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 36.8 करोड़ डॉलर था। वेंचर इंटेलीजेंस के डेटा के अनुसार, पिछले साल, पूरे क्षेत्र ने 18 सौदों के साथ 82.5 करोड़ डॉलर का निवेश आकर्षित किया था। यह बताना जरूरी है कि 2020 एक ऐसा वर्ष है जिसमें हेल्थकेयर एवं लाइफ साइंस मौजूदा महामारी की वजह से अहम स्थान बनाया है।
वर्ष 2020 में दर्ज किए गए कुछ प्रमुख सौदों में कार्लाइल का पीरामल फार्मा में 49 करोड़ डॉलर, जेबी केमिकल्स में केकेआर का 41.4 करोड़ डॉलर, सिक्वेंट साइंटिफिक में कार्लाइल का 21 करोड़ डॉलर, इंटास फार्मास्युटिकल्स में क्रिसकैपिटल का 13.2 करोड़ डॉलर, आरए केम फार्मा में एडवेंट इंटरनैशनल का 12.8 करोड़ डॉलर का निवेश मुख्य रूप से शामिल है।
वेंचर इंटेलीजेंस के संस्थापक अरुण नटराजन ने कहा कि फार्मा एक ऐसा क्षेत्र है जिसने भारत में पीई निवेशकों के लिए सफल निकासी के अवसर दिए हैं। वहीं इन अच्छी निकासी की मदद से यह उद्योग निवेशकों के बीच लोकप्रिय बन गया है। इस संदर्भ में बायोकॉन-ट्रूनॉर्थ और इंटास फार्मा-क्रिसकैपिटल जैसी पुरानी साझेदारियों के उदाहरण गिनाए जा सकते हैं। इस साख और मजबूत संबंधों से फार्मा उद्योग को 2020 में पीई पूंजी जुटाने में मदद मिली है। पिछले तीन दशकों के दौरान भारत के निर्माण क्षेत्र ने शानदार सफर तय किया है और यह देश बिकी के लिहाज से दुनिया में दवाओं का तीसरा सबसे बड़ा निर्माता बन गया है। भारत का मौजूदा समय में अमेरिका में कुल जेनेरिक दवा मंजूरियों में 40 प्रतिशत का योगदान है और अमेरिका में इस्तेमाल प्रत्येक तीन टैबलेट में से एक का निर्माण भारतीय जेनेरिक उद्योग द्वारा किया जाता है।
टाटा कैपिटल हेल्थकेयर फंड में प्राइवेट इक्विटी के पार्टनर विसालक्ष्मी चंद्रमौलि ने कहा, ‘हम इस उद्योग द्वारा वैश्विक बाजारों के लिए फॉर्मूलेशनों/एपीआई के परोक्ष निर्यात के लिए अपनी दक्षता के  इस्तेमाल के साथ बड़े अवसर देख रहे हैं।’ चंद्रमौलि ने कहा कि दवा निर्माण सेवाओं के विशेष सेगमेंट का सूचीबद्घ क्षेत्र की कंपनियों के संदर्भ में करीब 10 प्रतिशत (बाजार पूंजीकरण के संदर्भ में) का योगदान है। इस सेगमेंट में मूल्यांकन मौजूदा संकट के दौरान भी काफी हद तक मजबूत दिखा है। यह सेगमेंट मौजूदा समय में एबिटा और राजस्व मल्टीपल, दोनों के संदर्भ में 10 वर्षीय वैल्यू पर कारोबार कर रहा है।

First Published - October 6, 2020 | 11:29 PM IST

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