देश में सीमेंट की मांग अभी पूरी तरह पटरी पर लौटती नहीं दिख रही है। सरकारी खर्च में हाल के महीनों में सुधार जरूर दिखा है, लेकिन रियल एस्टेट सेक्टर की सुस्ती और कई क्षेत्रों में कमजोर मांग की वजह से सीमेंट कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही चुनौतीपूर्ण रह सकती है।
जून 2026 में सीमेंट की मांग का रुख मिला-जुला रहा है। पश्चिम और दक्षिण भारत में मांग अपेक्षाकृत बेहतर रही, जबकि बाकी कई क्षेत्रों में बिक्री कमजोर रही। खराब मौसम और कुछ इलाकों में मजदूरों की कमी का भी असर देखने को मिला।
सीमेंट की कीमतों में बड़े बदलाव नहीं हुए हैं। पश्चिम बंगाल में कीमतें 15-20 रुपये प्रति बैग तक घटी हैं। दूसरी तरफ महाराष्ट्र में कीमतों में करीब 10 रुपये प्रति बैग की बढ़ोतरी हुई है। बाकी अधिकांश बाजारों में कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं।
पिछले वित्त वर्ष में सरकारी पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) की रफ्तार बहुत तेज नहीं रही। वित्त वर्ष 2026 में केंद्र, राज्य सरकारों और सरकारी कंपनियों का कुल कैपेक्स सिर्फ 4 फीसदी बढ़ा। हालांकि अप्रैल 2026 में इसमें 27 फीसदी की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
केंद्र सरकार का कैपेक्स अप्रैल में 19 फीसदी बढ़ा, जबकि राज्यों का खर्च 8 फीसदी बढ़ा। सरकारी कंपनियों का कैपेक्स अप्रैल-मई के दौरान 38 फीसदी बढ़ा है। इससे उम्मीद जगी है कि आने वाले महीनों में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से सीमेंट की मांग को सहारा मिल सकता है।
हाउसिंग सेक्टर की तस्वीर अभी भी बहुत उत्साहजनक नहीं है। देशभर में नए आवासीय प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग वित्त वर्ष 2026 में 4 फीसदी घटी है। इससे पहले वित्त वर्ष 2025 में भी इसमें 8 फीसदी की गिरावट आई थी। मार्च तिमाही में भी नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग 7 फीसदी कम रही। इसका असर सीमेंट की मांग पर पड़ रहा है क्योंकि रियल एस्टेट इस उद्योग का बड़ा ग्राहक है।
सीमेंट कंपनियों के लिए राहत की बात यह है कि पेटकोक की कीमतें अपने हालिया उच्च स्तर से नीचे आई हैं। फिलहाल इसकी कीमत 132 डॉलर प्रति टन है, जो हाल के 168 डॉलर प्रति टन के उच्च स्तर से काफी कम है। हालांकि तिमाही आधार पर इसमें बढ़ोतरी हुई है, जिसका असर कंपनियों की लागत पर पहली तिमाही के आखिर तक दिख सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में सीमेंट कंपनियों के प्रदर्शन पर तीन चीजों का सबसे ज्यादा असर रहेगा- सीमेंट की कीमतें, कच्चे माल की लागत और हाउसिंग व इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से आने वाली मांग। ब्रोकरेज फर्म नुवामा ने फिलहाल सीमेंट सेक्टर पर ‘न्यूट्रल’ रुख बनाए रखा है। हालांकि उसने जेके सीमेंट को इस सेक्टर में अपनी सबसे पसंदीदा कंपनी बताया है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)