तीस लाख करोड़ रुपये वाले देसी म्युचुअल फंड उद्योग में प्रतिस्पर्धा गहराने वाली है क्योंकि कई नई कंपनियों ने म्युचुअल फंड लाइसेंस के लिए बाजार नियामक सेबी के पास आवेदन किया है।
हाल में आवेदन करने वालों में सिंगापुर के फंड मैनेजर समीर अरोड़ा की अगुआई वाली हीलियस कैपिटल, हीरेन वेद व राकेश झुनझुनवाला की तरफ से गठित अल्केमी कैपिटल, दो दशक पुरानी पोर्टफोलियो मैनेजमेंट फर्म यूनिफाई कैपिटल और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट फर्म कैपिटलमाइंड के दीपक शेनॉय की तरफ से प्रवर्तित वाइजरमार्केट्स एनालिटिक्स शामिल हैं। वाइजरमार्केट्स ने पिछले साल दिसंबर में एमएफ लाइसेंस के लिए आवेदन किया है।
अभी सेबी के पास म्युचुअल फंड लाइसेंस के कुल नौ आवेदन हैं। साथ ही देश की सबसे बड़ी ब्रोकरेज जीरोधा ब्रोकिंग और एनबीएफसी दिग्गज बजाज फिनसर्व भी लाइसेंस के लिए सेबी की मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही है। छूट वाली ब्रोकिंग फर्म सैमको सिक्योरिटीज और सबसे बड़ी एमएफ वितरक एनजे इंडिया को सेबी से सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी मिल चुकी है। इस बीच, कुछ और कंपनियां परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं, जिनके पास आवश्यक मंजूरी है। इनमें फ्लिपकार्ट के संस्थापक सचिन बंसल की नवी टेक्नोलॉजिज शामिल हैं, जिसने लाइसेंस के लिए एसेल म्युचुअल फंड के अधिग्रहण का रास्ता चुना। इसके अलावा फिनटेक फर्म पेटीएम, फोनपे और मोबिक्विक भी म्युचुअल फंड में उतरने की संभावना तलाश रही हैं।
उद्योग की कंपनियों ने कहा कि नई कंपनियां ताजा लाइसेंस का विकल्प चुन सकती हैं, वहीं फिनटेक क्षेत्र में बड़ी कंपनियां मौजूदा कंपनियों के साथ जुड़ सकती हैं।
नए आवेदकों मेंं से कुछ सेबी के पिछले साल के कदम का अनुपालन कर रहे हैं, जिसमें एएमसी की स्थापना पर मुनाफे के मानक में नरमी बरती गई थी। दिसंबर में सेबी ने कहा था कि लाभ का ट्रैक रिकॉर्ड पूरा न करने वाले प्रायोजकों को फंड हाउस स्थापित करने की अनुमति है, लेकिन इसके लिए न्यूनतम 100 करोड़ रुपये का नेटवर्थ होना चाहिए जबकि पहले 50 करोड़ रुपये की अनिवार्यता थी।
वैल्यू रिसर्च के संस्थापक व सीईओ धीरेंद्र कुमार ने कहा, छोटे आकार वाली कई एएमसी मसलन क्वांटम एमएफ और पीपीएफएएस के प्रदर्शन ने अन्य को एएमसी स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, ये सभी नई कंपनियां रकम के प्रबंधन में अनोखे तरीके का इस्तेमाल कर रही हैं।
उद्योग की कंपनियों ने कहा कि अन्य क्षेत्र से फर्मों के प्रवेश से म्युचुअल फंड के क्षेत्र में तकनीकी क्रांति आ सकती है, जहां अभी पारंपरिक बैंक आधारित एएमसी का वर्चस्व है। जीरोधा जैसी कुछ कंपनियों का इरादा सिर्फ पैसिव कैटिगरी पर ध्यान केंद्रित करने का है।
उद्योग पर नजर रखने वालों ने कहा कि पहले म्युचुअल फंड में कामयाबी के लिए फर्मों को मजबूत ब्रांड व वितरण नेटवर्क की दरकार होती थी। हालांकि तकनीक के इस्तेमाल और निवेशकों में जागरूकता बढऩे के बाद अच्छा प्रदर्शन वाले वैसे फंड हाउस जो कम लागत की पेशकश करे या तकनीकी मोर्चे पर प्रदर्शन उम्दा हो तो वह कामयाब हो सकती है।
कुमार ने कहा, अगगर नई कंपनियां अपनी लागत कम रखने में कामयाब होती है तो वह कम एयूएम पर भी मुनाफा कमा सकती है। दिसंबर तिमाही के आखिर में पांच अग्रणी एएमसी की बाजार हिस्सेदारी 57 फीसदी थी जबकि 10 अग्रणी कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी एयूएम के लिहाज से 83 फीसदी थी।