घरेलू इक्विटी म्युचुअल फंडों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने करीब 1.09 लाख करोड़ रुपये की इक्विटी की शुद्घ खरीदारी के साथ 2021 में भारतीय शेयर बाजारों को लगाार मजबूती प्रदान की। इक्विटी म्युचुअल फंडों ने इस साल जनवरी से 22 दिसंबर तक 82,341 करोड़ रुपये की इक्विटी के साथ बाजारों को बड़ी राहत प्रदान की। वहीं ताजा बिकवाली के बावजूद एफपीआई ने 27,631 करोड़ रुपये की शुद्घ खरीदारी की।
एमएफ द्वारा मजबूत खरीदारी को चालू कैलेंडर वर्ष 2021 में 71,600 करोड़ रुपये की शुद्घ पूंजी प्रवाह से मदद मिली थी। कैलेंडर वर्ष 2021 के पहले दो महीनों में, इक्विटी फंडों में 13,787 करोड़ रुपये की शुद्घ निकासी दर्ज की गई थी, क्योंकि निवेशकों ने बाजार के उच्च स्तरों पर मुनाफावसूली पर जोर दिया।
मार्च से, इक्विटी फंडों में प्रवाह मजबूत बना हुआ है। इक्विटी फंडों में 22,583.51 करोड़ रुपये के साथ जुलाई में सर्वाधिक पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया, जिसके बाद नवंबर में यह आंकड़ा 11,614.73 करोड़ रुपये रहा।
एसआईपी के जरिये, पूंजी प्रवाह इक्विटी फंडों में शानदार रहा। एम्फी के आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी से लेकर नवंबर तक, एसआईपी के जरिये निवेश प्रवाह 1.02 लाख करोड़ रुपये रहा।
एम्फी के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन महीनों में, एसआईपी के जरिये पूंजी प्रवाह प्रत्येक महीने 10,000 करोड़ रुपये बना रहा। वहीं नवंबर में यह 11,005 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
निवेशक ऊंचे प्रतिफल के लिए डेट फंडों द्वारा कमजोर प्रतिफल के साथ इक्विटी फंडों में निवेश बरकरार रखेंगे। पिछले साल में, लार्ज-कैप फंडों ने औसत तौर पर 26.58 प्रतिशत का प्रतिफल दिया। वैल्यू रिसर्च के आंकड़े के अनुसार तुलनात्मक तौर पर, मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंडों ने 44.02 प्रतिशत और 61.64 प्रतिशत प्रतिफल दिया।
क्वांटम ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी जिमी पटेल ने कहा, ‘पिछले कुछ वर्षों में, हमने निवेशकों के भरोसे में तेजी दर्ज की है। वहीं इक्विटी फंडों के मुकाबले अन्य विेश विकल्प नहीं हैं। निवेशक एसआईपी के जरिये अपनी बचत को बरकरार रखेंगे, भले ही बाजार में कुछ अस्थिरता आई है। हम भविष्य में पैसिव फंडों से दिलचस्पी में इजाफा दर्ज कर सकते हैं।’
इस साल, एफपीआई 6 महीनों तक शुद्घ खरीदार रहे और इस अवधि में वे शुद्घ बिकवाल भी रहे। उन्होंने पहले तीन महीनों जनवरी-मार्च में इक्विटी में करीब 55,472 करोड़ रुपये का निवेश किया। वहीं अगले दो महीनों में भारत में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर में तेजी आने की वजह से 12,613 करोड़ रुपये की इक्विटी बिक्री की। एफपीआई जहां जून में शुद्घ खरीदार रहे वहीं जुलाई में उन्होंने बिकवाली की। अगस्त और सितंबर में उन्होंने 15,237 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदीं।
अक्टूबर से वे शुद्घ बिकवाली रहे हैं। एफपीआई बिकवाली शुरू हुई, क्योंकि अक्अूबर में सूचकांकों के सर्वाधिक ऊंचे स्तरों पर पहुंचने के बाद मूल्यांकन को लेकर चिंता पैदा हुई। ब्याज दर संबंधित चिंताओं और ओमिक्रॉन वैरिएंट के उभार से भी लगातार बिकवाली को बढ़ावा मिला। कुछ बिक्री आईपीओ और अन्य प्राथमिक बाजार के निर्गमों में निवेश के लिए की गई थी। नैशनल सिक्योरिटीज डिपोटिरीज डेटा के आंकड़े के अनुसार, दिसंबर में, एफपीआई ने प्राथमिक बाजारों से 13,576 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
एवेंडस कैपिटल अल्टरनेट स्ट्रेटेजीज के मुख्य कार्याधिकारी एंड्रयू हॉलैंड ने कहा, ‘इनमें से कुछ कंपनियां नई हैं, और चीन को सूचीबद्घता समाप्त होने और नियमन आदि की वजह से विदेशी निवेशकों की ओर से समस्याओं का सामना करना पड़ा है।’