म्युचुअल फंड (एमएफ) उद्योग में 2025 में लगातार तीसरे वर्ष प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) में 20 फीसदी से अधिक की वृद्धि की संभावना है। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष की शुरुआत में एयूएम 66.9 लाख करोड़ रुपये थी जो नवंबर के अंत तक 21 फीसदी बढ़कर 80.8 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई। म्युचुअल फंड योजनाओं की प्रबंधित परिसंपत्तियां साल 2023 में 27 फीसदी और 2024 में 32 फीसदी बढ़ी थीं।
इस साल शेयर बाजार में प्रतिकूल हालात के बावजूद उद्योग ने मजबूत वृद्धि जारी रखी। बाजारों में 2024 के अंत और 2025 की शुरुआत में गिरावट आई और सितंबर 2024 में छुए गए उच्चतम स्तर को पार करने में अभी भी निर्णायक कामयाबी नहीं मिली है। स्मॉलकैप सेगमेंट में 2023 और 2024 में म्युचुअल फंडों के माध्यम से निवेशकों की सबसे अधिक रुचि देखी गई थी। लेकिन उसने भी साल की समाप्ति गिरावट के साथ की।
एसबीआई म्यूचुअल फंड के डिप्टी एमडी और संयुक्त सीईओ डी पी सिंह ने कहा, ट्रांसफॉर्मेशन, समावेशिता और नवाचार के कारण 2025 भारतीय म्युचुअल फंड उद्योग के लिए एक और मजबूत वर्ष रहा। उद्योग की एयूएम बढ़कर 80.8 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई हैं। खुदरा एसआईपी निवेश 29,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है और वैश्विक चुनौतियों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के कारण शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव रहा। इसके बावजूद निवेशक आधार में तेजी से वृद्धि हुई है।
पिछले वर्ष परिसंपत्तियों (एयूएम) में बढ़ोतरी का कारण मुख्य रूप से निवेश था। 2025 में नवंबर तक म्युचुअल फंड योजनाओं में कुल 8.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ था जो 2024 में हुए सर्वकालिक उच्च शुद्ध निवेश से 2 फीसदी अधिक था। म्युचुअल फंड की एयूएम वृद्धि दो कारकों पर निर्भर करती है – उनमें आने वाले निवेश और बाहर निकलने वाले निवेश की मात्रा और योजनाओं से खरीदी गईं परिसंपत्तियों की कीमतों में परिवर्तन।
2025 में मजबूत निवेश को व्यवस्थित निवेश योजना (एसआईपी) के जरिए आए निवेश और डेट फंडों तथा सोने-चांदी की योजनाओं में आए भारी निवेश आवक से मदद मिली। हाइब्रिड फंडों, विशेष रूप से मल्टी-ऐसेट फंडों में भी निवेशकों की रुचि में वृद्धि देखी गई।
बाजार में अस्थिरता के बीच निवेशकों के टुकड़ों में निवेश करने के विकल्प पर अधिक भरोसा से 2025 में पहली बार किसी कैलेंडर वर्ष में एसआईपी में निवेश 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा। यह इसके बावजूद हुआ जब 2025 में सक्रिय खातों की संख्या में कमी आई। बाजार में गिरावट और निवेशक आंकड़े दुरुस्त करने के फंड कंपनियों के अभियान के कारण इस वर्ष के पहले कुछ महीनों में सक्रिय खातों की संख्या में भारी कमी देखी गई थी।
सोने और चांदी की कीमतों को ट्रैक करने वाली फंड योजनाएं सबसे अधिक निवेश हासिल करने वाली योजनाओं में थीं। नवंबर तक सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) में कुल मिलाकर 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ।
डेट फंडों में भी निवेश में भारी उछाल देखी गई। इसका मुख्य कारण लिक्विड और अन्य अल्पकालिक निवेश योजनाओं में संस्थागत निवेश में वृद्धि होना रहा। गैर-इक्विटी योजनाओं में निवेश में हुई इस उछाल ने 2025 में इक्विटी योजनाओं में एकमुश्त निवेश में आई गिरावट की भरपाई कर दी। अक्टूबर 2025 तक सक्रिय इक्विटी योजनाओं में एकमुश्त निवेश 2024 की तुलना में 2 लाख करोड़ रुपये कम था। सक्रिय इक्विटी योजनाओं में एसआईपी निवेश पहले ही 3 फीसदी बढ़कर 2.3 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।