तेजी से बढ़ते मिडकैप शेयरों को पिछले कैलेंडर वर्ष में झटका लगा और उन्होंने अपने लार्जकैप शेयरों के मुकाबले खराब प्रदर्शन किया। इस तरह दो साल से चला आ रहा रुझान पलट गया। बीएसई मिडकैप सूचकांक वर्ष 2025 के दौरान सिर्फ 1.1 प्रतिशत बढ़ा, जो इससे एक साल पहले की 26.1 प्रतिशत की तेजी से बिल्कुल उलट था। पिछले कैलेंडर वर्ष में मिडकैप का प्रदर्शन कैलेंडर वर्ष 2019 के बाद से सबसे खराब सालाना प्रदर्शन था। 2019 में इस सूचकांक में 3 प्रतिशत की कमजोरी आई थी।
इसकी तुलना में, बेंचमार्क बीएसई का सेंसेक्स कैलेंडर वर्ष 2025 में 9.1 प्रतिशत ऊपर रहा, जो एक साल पहले के कैलेंडर वर्ष की 8.2 प्रतिशत वृद्धि से थोड़ा बेहतर था। मिडकैप सूचकांक ने कैलेंडर वर्ष 2024 और 2023 में बड़े अंतर से बेंचमार्क इंडेक्स को मात देने के बाद इस साल लगभग 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की।
कैलेंडर वर्ष 2025 में मिडकैप सूचकांक के ज्यादातर शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। इस सूचकांक के 140 में से 17 शेयर पिछले साल 30 प्रतिशत से ज्यादा गिरे। इससे पिछले कैलेंडर वर्ष में 61 प्रतिशत से थोड़े ज्यादा शेयरों (140 में से 84) की कीमत में गिरावट देखी गई थी। इसका मतलब है कि घरेलू रिटेल निवेशकों को इक्विटी में खराब रिटर्न मिला, जो ज्यादातर मिड और स्मॉलकैप शेयरों में पैसा लगाते हैं। हालांकि, अलग-अलग मिडकैप शेयरों के प्रदर्शन में काफी अंतर भी देखा गया।
सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली एलऐंडटी फाइनैंस का शेयर कैलेंडर वर्ष 2025 में 133 प्रतिशत चढ़ा था। सबसे खराब प्रदर्शन ओला इलेक्ट्रिक का रहा, जिसके बाजार पूंजीकरण को लगभग 58 प्रतिशत का नुकसान पहुंचा। कुल मिलाकर, मिडकैप सूचकांक में 18 शेयर 2025 में 30 प्रतिशत या उससे ज्यादा चढ़े और उनमें भी 12 में 50 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा तेजी आई।
यहां कैलेंडर वर्ष 2025 में सबसे अच्छा और खराब प्रदर्शन करने वाले पांच-पांच शेयर शामिल किए गए हैं और कैलेंडर वर्ष 2026 में उनके लिए संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया है। इस सूची में घाटे वाली कंपनियों को शामिल नहीं किया गया है और सेक्टरों की विविधता बनाए रखने के लिए शेयरों को चुना गया है।