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बजट में एलटीसीजी रियायत, लाभांश कराधान पर स्पष्टता चाहता है बाजार

Last Updated- December 12, 2022 | 9:31 AM IST

पिछले वर्षों की तरह ही पूंजी बाजार कारोबारियों को इस साल भी बजट से कई उम्मीदें हैं। इनमें से कई मांगे काफी पुरानी हैं, जबकि कुछ पिछले साल प्रभावी बजटीय बदलावों से सामने आई हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड ने कुछ प्रमुख उद्योग प्रस्तावों और बदलावों पर विचार दिया है जिन पर सरकार इस साल के बजट से पहले ध्यान दे सकती है।
एलटीसीजी और एसटीटी
उद्योग कारोबारियों का मानना है कि सरकार सूचीबद्घ इक्विटी शेयरों की बिक्री से संबंधित दीर्घावधि पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) पर कर रियायत देगी। सरकार ऐसी छूट के लिए अवधि बढ़ाकर 24 महीने कर सकती है और यह व्यवस्था गैर-सूचीबद्घ शेयरों के समान बना सकती है।
एफवाईईआरएस के सह-संस्थापक तेजस खोडे ने कहा, ‘एलटीसीजीकर समाप्त करना एक स्वागत योग्य कदम होगा। चर्चा का मुख्य मुद्दा दीर्घावधि की अवधारणा को दो वर्ष के तौर पर पुन: परिभाषित करना और कराधान को शून्य करना है। इससे सभी वित्तीय परिसंपत्तियों में निवेश की अवधि के लिए स्थायित्व आ सकेगा।’ प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) और ङ्क्षजस लेनदेन कर (सीटीटी) में कटौती की मांग लंबे समय से की जाती रही है। एक कर परामर्श फर्म के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘यदि एलटीसीजी को बरकरार रखा जाता है तो एसटीटी को तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए, क्योंकि एसटीटी को एलटीसीजी कर के लिए प्रतिस्थापन के तौर पर पेश किया गया था।’
यूलिप और एमएफ के बीच कर समानता
उद्योग कारोबारियों को उम्मीद है कि सरकार यूलिप और इक्विटी म्युचुअल फंडों के बीच कर समानता लाएगी, ये देानों ही निवेश उत्पाद हैं और प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं। मौजूदा समय में, यूलिप निवेशकों को निवेश से निकलने पर पूंजीगत लाभ कर चुकाने की जरूरत नहीं होती है। इसमें निवेश की निकासी पर एसटीटी नहीं लगता है और न ही बीमा कंपनियों के यलिप से निकासी पर आय कर लागू है। इस निकासी में समय पूर्व सरेंडर और आंशिक निकासी भी शामिल है।
म्युचुअल फंड
एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) ने ‘एमएफ-लिंक्ड रिटायरमेंट प्लान’ (एमएफएलआरपी) के तौर पर पेंशन प्लान पेश करने की राह आसान की है, जो आयकर, 1961 की धाराओं 80सीसीडी (1) और 80सीसीडी (1बी) के तहत कर लाभ के अधीन होगा।
ऐसे प्लान के लिए कर लाभ गणना के लिए नियोक्ता और कर्मचारी के योगदानों की कुल रकम को शामिल किया जाना चाहिए। नियोक्ता द्वारा किए गए योगदान को आयकर, 1961 की धारा 36(1) (4ए) के तहत ‘बिजनेस एक्सपेंस’ का पात्र होने की अनुमति दी जानी चाहिए।
एम्फी एक म्युचुअल फंड प्लान/ऑप्शन से फंड हाउस की अन्य समान योजना में बदलाव को पूंजीगत लाभ कर से मुक्त रखना चाहता है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई)
सरकार उन कर नियमों की पुन: समीक्षा कर सकती है जो एफपीआई के लिए लाभांश पर विदहोल्डिंग टैक्स से संबंधित हैं। मौजूदा समय में, कंपनियां एफपीआई के लिए लाभांश भुगतान पर 20 प्रतिशत (सरचार्ज अतिरिक्त) और उपकर चुकाती हैं, भले ही वे उस क्षेत्र से निवेश करती हों जो उस देश के साथ भारत के डबल टैक्स अवॉयडेंस एग्रीमेंट (दोहरे कराधान से बचने के समझौते) पर आधारित कम दर मुहैया कराते हों। कम दर 5 प्रतिशत, 10 प्रतिशत या 15 प्रतिशत हो सकती है।
ब्रोकर
एसोसिएशन ऑफ नैशनल एक्सचेंजेज मेंबर्स ऑफ इंडिया (एएनएमआई) ने सरकार से ब्रोकिंग उद्योग के लिए जीएसटी दरें तर्कसंगत बनाए जाने का अनुरोध किया है। एएनएमआई ने संभावित आय की अवधारणा से दूर रहने और प्व्यावसायिक आय, दीर्घावधि पूंजी लाभ, और अल्पावधि पूंजी लाभ के लिए पूंजी बाजार लेनदेन से संबंधित आय वर्ग सीमित रखे जाने का भी अनुरोध किया है।
अन्य पुरानी मांग कैटेगरी-3 एआईएफ के लिए पास-थ्रो स्टेटस को लेकर है, जैसा कि 2015 में कैटेगरी-1 और कैटेगरी-2 एआईएफ के लिए मुहैया कराया गया था। 

First Published - January 19, 2021 | 11:32 PM IST

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