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7 महीने के निचले स्तर पर बाजार

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 8:54 PM IST

बेंचमार्क सेंसेक्स लगातार चौथे हफ्ते टूटा और इस तरह से वह सात महीने के निचले स्तर पर आ गया। वैश्विक स्तर पर तेल की बढ़ती कीमतों और यूक्रेन में बढ़ते तनाव के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की तरफ से हो रही लगातार बिकवाली का बाजार के प्रदर्शन पर असर पड़ रहा है जबकि देसी निवेशक खरीदारी के जरिए बाजार को लगातार सहारा दे रहे हैं।
ब्रेंट क्रूड की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही क्योंंकि यूक्रेन पर रूस की तरफ से हो रहे हमले में किसी तरह की नरमी के संकेत नहीं दिखे।
बेंचमार्क सेंसेक्स 1.4 फीसदी यानी 769 अंक टूटकर 54,224 पर बंद हुआ, जो 6 अगस्त 2021 के बाद का निचला स्तर है। उधर, निफ्टी 252 अंक यानी 1.5 फीसदी की फिसलन के साथ 16,245 पर बंद हुआ। इस हफ्ते सेंसेक्स में 2.7 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।
भारतीय बाजारों के लिए सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतेंं और विदेशी फंडों की तरफ से हो रही तीव्र बिकवाली है।
मॉर्गन स्टैनली के इक्विटी रणनीतिकार रिधम देसाई की अगुआई में एक रिपोर्ट में कहा गया है, आपूर्ति में बाधा के कारण तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए अच्छी नहीं है। वास्तव में तेल की कीमतों में हुई 25 फीसदी की हालिया बढ़ोतरी चालू खाते के घाटे में सालाना आधार पर 75 आधार अंक और महंगाई में 100 आधार अंकों की बढ़ोतरी करेगा। उभरते बाजारों के मुकाबले भारत के शेयरों की सापेक्षिक कीमतों ने तेल की कीमतों को लेकर कमजोर प्रतिक्रिया जताई है।
रिपोर्ट में हालांकि कई कारकों को रेखांकित किया गया है, जो भारत को तेल के झटके से उबरने में मदद कर सकते हैं। इनमें जीडीपी के सापेक्ष तेल के उपभोग में गिरावट, मजबूत नीति का माहौल और देसी प्रवाह में इजाफा शामिल है।
शुक्रवार को एफपीआई ने 7,631 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, वहींं देसी संस्थागत निवेशकों ने 4,739 करोड़ रुपये के शेयरों की खरीदारी की। फरवरी में एफपीआई ने 45,720 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं, जो मार्च 2020 के बाद का सर्वोच्च स्तर है। इस महीने अब तक उन्होंंने 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे हैं।
दुनिया भर के निवेशक इस लड़ाई की आर्थिक कीमत का आकलन कर रहे हैं। रूस की सेना की तरफ से यूरोप के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र (यूक्रेन) पर कब्जे के बाद वैश्विक इक्विटी बाजारों में काफी उतारचढ़ाव हो रहा है।
इस लड़ाई ने आर्थिक रफ्तार के नरम होने, महंगाई आदि को लेकर चिंता और बढ़ा दी है, जो निवेशकों को कुछ महीने परेशान करेंगे।
जियोजित फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, रूस-यूक्रेन विवाद, वैश्विक शक्तियों की तरफ से रूस पर ताजा पाबंदी और यूरोप के सबसे बड़े संयंत्र पर रूस के हमले की खबर ने वैश्विक निवेशकों का तनाव और बढ़ाया है। तेल की बढ़ती कीमतेंं और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने महंगाई का स्तर आरबीआई की सीमा के पार जाने का डर बढ़ाया है।
विश्लेषकों ने कहा कि बाजार अब यूक्रेन की खबर पर आश्रित है और सबसे खराब परिदृश्य को लेकर चल रहा है। यूक्रेन पर रूस के हमले ने खाद्य, धातु व तेल की कीमतें बढ़ा दी है। साथ ही पहले से ही दबाव में रही महंगाई पर और असर डाल रहा है और आर्थिक सुस्ती को लेकर चिंता बढ़ाई है।

First Published : March 5, 2022 | 10:23 PM IST