भारतीय इक्विटी में रूस-यूक्रेन टकराव की वजह से इस साल भारी बिकवाली देखी गई है। यूस-यूक्रेन टकराव की वजह से भूराजनीतिक तनाव बढ़ा है और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने बिकवाली पर जोर दिया है। पिछले दो वर्षों के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने वाले हाई-बीटा शेयरों पर इस गिरावट का ज्यादा प्रभाव पड़ा है, जबकि वैल्यू शेयरों ने बाजार अनिश्चितता का काफी बेहतर ढंग से मुकाबला किया है।
इसके परिणामस्वरूप, इक्विटी म्युचुअल फंडों की वैल्यू फंड श्रेणी ने हाल के महीनों में कई अन्य इक्विटी फंड श्रेणियों के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन किया। वैल्यू रिसर्च के आंकड़े से पता चलता है कि वैल्यू फंडों ने औसत तौर पर पिछले तीन महीनों में -7.4 प्रतिशत का प्रतिफल दिया, जबकि लार्जकैप और मिडकैप तथा स्मॉलकैप फंडों में इस अवधि के दौरान 8 से 10 प्रतिशत के बीच गिरावट आई।
वैल्यू फंड खासकर उन शेयरों और क्षेत्रों में निवेश करते हैं जिनमें दीर्घावधि विकास संभावनाएं होती हैं और जो आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में, जब बाजार तेजी से चढ़ रहे थे, तो ग्रोथ फंडों ने वैल्यू फंडों के मुकाबले लगातार बेहतर प्रतिफल दिया, लेकिन अब उतार-चढ़ाव के समय में, वैल्यू फंडों ने प्रतिफल देना शुरू किया है, और फ्लेक्सी-कैप फंडों के मुकाबले भी इनका प्रदर्शन बेहतर दिख रहा है।
आईडीएफसी परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) में वरिष्ठ फंड प्रबंधक (इक्विटी) डेलिन पिंटो ने कहा, ‘यूक्रेन पर रूसी हमले से पहले, बाजारों में आर्थिक वृद्घि तेज होने की उम्मीद थी और इसकी वजह से मुद्रास्फीति बढ़ गई जिससे ब्याज दरों में बदलाव का संकेत दिख रहा है। ऐसे परिदृश्य में, हमें वैल्यू फंडों का प्रदर्शन ग्रोथ के मुकाबले बेहतर रहने की संभावना है।’
वैल्यू फंड प्रबंधक हमेशा उन कंपनियों पर ध्यान देते हैं जो अपनी आंतरिक वैल्यू से नीचे हों। पिछले एक साल में, आईडीएफसी स्टॢलंग वैल्यू, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल वैल्यू डिस्कवरी, और एसबीआई कॉन्ट्रा फंड जैसे फंडों ने 20-24 प्रतिशत के दायरे में प्रतिफल दिया। पिछले तीन महीने में भी, कई वैल्यू फंडों ने महज 3-7 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।
क्वांटम एएमसी में इक्विटी के फंड प्रबंधक नीलेश शेट्टी ने कहा, ‘व्यापक आर्थिक सुधार की स्थिति और वैल्यू शेयरों तथा ग्रोथ श्रेणी के शेयरों के बीच अंतर कम होने के संदर्भ में स्टाइल के तौर पर वैल्यू में अच्छा प्रदर्शन करने की संभावना है। हम उस स्थिति में आर्थिक तेजी के चक्र को लेकर भारत को संकेत के तौर पर देख रहे हैं। वैल्यू श्रेणी में प्रदर्शन बेहतर रहने की संभावना है।’