ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मीशो के शेयर की बुधवार को शानदार शुरुआत हुई और यह अपने आईपीओ कीमत से 53 फीसदी ऊपर बंद हुआ। यह साल की ऐसी लिस्टिंग थी जिस पर सबकी नजर थी। शेयर 161 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ, जो 111 रुपये के निर्गम मूल्य से 45 फीसदी अधिक है। कारोबार के दौरान इसमें और तेजी आई और यह 177.5 रुपये के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। अंत में यह 170 रुपये पर टिका। अंतिम बंद भाव पर सॉफ्टबैंक समूह और प्रोसस जैसी वैश्विक दिग्गज निवेश कंपनियों द्वारा समर्थित इस कंपनी का मूल्यांकन 76,814 करोड़ रुपये रहा।
निवेशकों की जबरदस्त रुचि के बाद आईपीओ की शानदार लिस्टिंग हुई है। आईपीओ को 79 गुना आवेदन मिले थे और इसने भारत के प्राथमिक बाजारों के एक और रिकॉर्ड वर्ष को रफ्तार दी है।
मीशो का आगाज हाल ही में हुई उन कई जोरदार लिस्टिंग में शामिल हो गया है, जो शेयर बाजार में उतरते ही दौड़ पड़े। अर्बन कंपनी के शेयर 62 फीसदी, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर 48 फीसदी, फिजिक्सवाला के शेयर 42 फीसदी और बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स (ग्रो) के शेयर 30 फीसदी तक चढ़े थे।
इस बीच, बुधवार को दो अन्य कंपनियों ने भी शेयर बाजार में अपनी शुरुआत की। एक्वस के 922 करोड़ रुपये के आईपीओ को 102 गुना आवेदन और कुल मिलाकर 52,000 करोड़ रुपये की बोलियां मिली थीं। कंपनी के शेयर 22 फीसदी की बढ़त पर बंद हुए। विद्या वायर्स के आईपीओ को 27 गुना आवेदन मिलने के बावजूद उसके शेयर इश्यू प्राइस से सिर्फ 2 फीसदी ऊपर बंद हुए।
इस साल नई लिस्टिंग के लिहाज से स्थिति मिली-जुली है। लगभग 30 कंपनियां छूट पर लिस्ट हुईं जबकि अन्य 30 कंपनियों ने आगाज पर 10 फीसदी से भी कम का लाभ दर्ज किया। उदाहरण के लिए, लेंसकार्ट सॉल्यूशंस लिस्टिंग के समय सपाट रही और अभी भी अपने इश्यू प्राइस से केवल 0.7 फीसदी ऊपर कारोबार कर रही है। ऐसे स्टार्टअप के ऊंचे मूल्यांकन ने चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं।
स्वतंत्र इक्विटी विश्लेषक अंबरीश बालिगा ने कहा, बेहतर लिस्टिंग से मूल्यांकन संबंधी चिंताएं कम नहीं हो जाती हैं, लेकिन इससे बाजार का मनोबल बेहतर हुआ है। अंततः दीर्घकालिक नकदी प्रवाह ही मूल्यांकन तय करता है। जो निवेशक केवल लिस्टिंग के दिन लाभ पर नजर रखते हैं, उन्हें स्पष्ट स्टॉप-लॉस लगाना चाहिए, खासकर तब जब व्यापक बाजार कमजोर हो रहे हों।
मीशो के 5,421 करोड़ रुपये के आईपीओ में 4,250 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी हुए हैं। कंपनी इस राशि का उपयोग विपणन पहल, विलय-अधिग्रहण के जरिये विकास और छोटे शहरों में पैठ बनाने में करेगी।
मीशो मार्केटप्लेस के रूप में परिचालन करती है, जो मुख्य रूप से छोटे शहरों के छोटे निर्माताओं को किफायत चाहने वाले उपभोक्ताओं से जोड़ती है। मीशो नीदरलैंड की प्रोसस की चौथी पोर्टफोलियो कंपनी है, जो पिछले एक साल में शेयर बाजार में पहुंची है। अन्य कंपनियों में स्विगी, ब्लूस्टोन और अर्बन कंपनी शामिल हैं।
प्रोसस इंडिया के प्रमुख आशुतोष शर्मा ने कहा, मीशो में हमारा निरंतर निवेश इस विश्वास को दर्शाता है कि वे भारत में ई-कॉमर्स क्षेत्र में डिजिटल अपनाने और आबादी की अनुकूल परिस्थितियों का लाभ उठाने के लिहाज से अच्छी स्थिति में हैं। हम मीशो जैसी उन कंपनियों का समर्थन करने पर ध्यान दे रहे हैं जो प्रौद्योगिकी को केंद्र में रखकर दीर्घकालिक वृद्धि कर रही हैं।
इस सप्ताह कैलेंडर वर्ष में आईपीओ की संख्या 100 का आंकड़ा पार कर गई जबकि जुटाई गई कुल रकम करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। गौरतलब है कि यह पहली बार है जब भारत में लगातार दो वर्षों से रिकॉर्ड स्तर पर धनराशि जुटाई जा रही है और यह उस ऐतिहासिक पैटर्न को तोड़ रही है, जहां आमतौर पर सफलता वाले वर्षों के बाद गतिविधियों में कमी आती थी।