शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से जारी तेजी के बीच अब निवेशक इस बात का मूल्यांकन करने में जुट गए हैं कि आखिरकार बाजार कब तक आर्थिक बुनियाद की परवाह किए बिना फर्राटा लगाना जारी रख सकता है। शुक्रवार को कारोबार समाप्त होने के बाद बाजार मई के बाद पहली बार किसी सप्ताह में सबसे बड़ी गिरावट के साथ बदहाल दिख रहा था।
अमेरिका में तकनीकी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली के बाद बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट आई। आर्थिक सुधार की धीमी रफ्तार से चिंतित घरेलू और विदेशी निवेशकों दोनों ने निवेश निकालने से बिल्कुल गुरेज नहीं किया। पिछले सप्ताह ही जारी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े जून तिमाही में 23.9 प्रतिशत फिसल गए। जी-20 समूह के देशों में भारत की अर्थव्यवस्था में सबसे अधिक गिरावट देखी गई।
तो क्या निवेशकों के लिए फिलहाल राहत के आसार नहीं दिख रहे हैं? विशेषज्ञ बाजार में और बिकवाली की आशंका से इनकार नहीं कर रहे हैं, लेकिन वे वैश्विक स्तर पर नकदी की भारी उपलब्धता को देखते हुए किसी बड़ी गिरावट का डर नहीं देख रहे हैं। बीएनपी पारिबा में प्रमुख (इंडिया इक्विटी रिसर्च) अमित शाह कहते हैं, ‘बाजार में तेजी पूरी तरह थमती तो नहीं दिख रही, लेकिन आगे चलकर थोड़ी बिकवाली हो सकती है। उभरते बाजारों के मुकाबले भारत का प्रदर्शन मजबूत रहा है, इसलिए थोड़ी बिकवाली होनी भी चाहिए और इसे एक अच्छा संकेत मानना चाहिए। बाजार में तेजी के साथ बीच-बीच में बिकवाली भी जरूरी है।’
बीएनपी पारिबा का मानना है कि मौजूदा स्तर से बेंचमार्क सूचकांकों में अधिकतम गिरावट 10 प्रतिशत से कम ही रहेगी। मार्च के निचले स्तर से निफ्टी रुपये के लिहाज से 49 प्रतिशत और डॉलर में 55 प्रतिशत तक चढ़ चुका है। दक्षिण कोरिया के बाद भारत सर्वाधिक बढ़त दर्ज करने वाला दूसरा तेजी से उभरता बाजार है।
हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि कोविड-19 से आर्थिक गतिविधियों को हुए नुकसान के कारण आने वाले समय में भारत दुनिया के दूसरे बाजारों के मुकाबले फिसल सकता है। कैपिटल अल्टरनेट स्ट्रैटेजीज के सीईओ अवेंडस कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी एंड्रयू हॉलैंड ने कहा कि अर्थव्यवस्था की मुश्किल किसी से छिपी नहीं है यह अलग बात है कि बाजार ने इसे अधिक अधिक तवज्जो नहीं दी है। हॉलैंड ने कहा कि सरकार को आर्थिक वृद्धि तेज करने के लिए व्यय बढ़ाना चाहिए। दुनिया में नकदी की फिलहाल कोई कमी नहीं होने से बाजार में उत्साह बरकरार है और आर्थिक सुधार भी उम्मीद से अधिक तेजी से होगा।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि औसत से अधिक बारिश, ग्रामीण इलाकों में आमदनी में सुधार और कर संग्रह में थोड़ी तेजी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत माने जा सकते हैं। हालांकि वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल, अमेरिकी चुनाव को लेकर अनिश्चितता और बड़ी संख्या में निवेशकों के निवेश से पीछे हटने से बाजार की जमीन हिल सकती है। इनके अलावा कोविड-19 संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामले आर्थिक सुधार की चाल धीमी कर सकते हैं, जिसका असर बाजार पर दिख सकता है।