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Investment Strategy 2026: भारत समेत दुनियाभर में ट्रेड डील्स पर बनती सहमति आने वाले समय में घरेलू बाजार के लिए भी स्थिरता का संकेत दे रहे हैं। इसके बावजूद वैश्विक अनिश्चितता और जियो-पॉलिटिकल टेंशन को लेकर दिक्कतें बनी रह सकती हैं। अब सवाल यह कि ग्लोबल और घरेलू घटनाक्रम और उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को आगे किस तरह की स्ट्रैटेजी बनानी चाहिए? साथ ही इक्विटी, डेट, गोल्ड और रियल्टी जैसे एसेट्स के साथ पोर्टफोलियो में एसेट एलोकेशन कैसे करना बेहतर रहेगा। मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ ने जनवरी 2026 की अल्फा स्ट्रैटेजिस्ट रिपोर्ट ‘द डेडलस वे’ में इस साल संतुलित निवेश रणनीति रखने की सलाह दी है। लार्ज कैप और हाइब्रिड फंड्स को पोर्टफोलियो का आधार बनाने और मिड व स्मॉल कैप में अलग-अलग फेज और चुनिंदा निवेश करने की सिफारिश की गई है।
मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ के एमडी एंड सीईओ आशीष शंकर का कहना है कि 2025 में वैश्विक अनिश्चितता और कंसॉलिडेशन के बाद 2026 में भारतीय बाजार एक संतुलित और एक्जीक्यूशन-आधारित फेज में प्रवेश कर रहा है। बेहतर वैल्यूएशन, कमाई की स्पष्टता और नीतिगत समर्थन के साथ भारत की स्थिति मजबूत है। ऐसे माहौल में लार्ज कैप और हाइब्रिड के जरिए स्थिरता और मिड-स्मॉल कैप में चुनिंदा निवेश सही स्ट्रैटेजी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में बाजार के कंसॉलिडेशन के बाद भारत की रिलेटिव वैल्यूएशन स्थिति मजबूत हो रही है। शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव से अलग देखें तो बजट ने इक्विटी रिटर्न के अहम फैक्टर्स को मजबूत किया है। मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन, सर्विसेज को बूस्ट, लॉजिस्टिक्स में सुधार और एसेट मोनेटाइजेशन से लंबी अवधि में मुनाफे की ग्रोथ बेहतर होने की उम्मीद है। रिपोर्ट में वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी ने इस साल अत्यधिक उत्साह और जरूरत से ज्यादा निराशा दोनों से बचने की बात कही है। नैरेटिव-बेस्ड निवेश के बजाय अनुशासित पोर्टफोलियो कंस्ट्रकशन और वैल्यूएशन पर आधारित एसेट एलोकेशन से ही लंबे समय में वेल्थ बनाई जा सकती है।
मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ के डायरेक्टर एंड सीआईओ संदीपन रॉय कहते हैं, दो दमदार वर्षों के बाद 2025 में बाजार में ठहराव रहा। लार्ज कैप ने सीमित रिटर्न दिए, मिड कैप में उतार-चढ़ाव रहा और स्मॉल कैप में गिरावट दिखी। 2026 में वैल्यूएशन सुधर रहे हैं, कमाई में सुधार दिख रहा है, करेंसी दबाव कम हुआ है और ट्रेड डील के बाद बाजार में भरोसा लौट रहा है।
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मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ का मानना है कि निवेशकों को अपने इन्वेस्टमेंट चार्टर पर कायम रहना चाहिए। स्ट्रैटेजिक एसेट एलोकेशन पर न्यूट्रल रहना चाहिए और शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव के दौरान धैर्य रखना चाहिए, जबकि लंबी अवधि के लक्ष्यों पर फोकस बनाए रखना चाहिए।
मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, भारतीय इक्विटी के लिए 2026 में कई चुनौतियां कम हो रही हैं। फिस्कल और मॉनेटरी उपायों से भविष्य की ग्रोथ और कमाई को सहारा मिलेगा। बजट ने मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज, कैपेक्स और लॉजिस्टिक्स को मजबूती दी है। हालांकि ट्रांजैक्शन कॉस्ट बढ़ने और अतिरिक्त टैक्स इंसेटिव से शॉर्ट टर्म में उठापटक बनी रह सकती है। लार्ज कैप मजबूत स्थिति में हैं। बजट घोषणाओं और ट्रेड डील्स के बाद मिड और स्मॉल कैप में भी अच्छे एंट्री पॉइंट बन रहे हैं। हालांकि, वैल्यूएशन और फंडामेंटल्स में सुधार से 2026 में पूरे बाजार में तेजी की बजाय चुनिंदा शेयरों (एक्जीक्यूशन और बॉटम-अप स्टॉक) में प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। इक्विटी पर न्यूट्रल रुख रखने की सलाह दी गई है।
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रिपोर्ट के मुताकि, फिक्स्ड इनकम मार्केट में अधिकांश अनिश्चितताएं अब खत्म होती दिख रही हैं। महंगाई काबू में है। 2026 में ब्याज दरों में कटौती की संभावना और RBI लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए सक्रिय है। बजट ने मिड-टर्म ग्रोथ और फिस्कल अनुशासन बनाए रखा है, लेकिन नियर टर्म में बॉन्ड सप्लाई ज्यादा रहने से ड्यूरेशन पर सतर्कता जरूरी है। आरबीआई ओएमओ खरीद, USD/INR स्वैप और CRR कटौती के जरिए सिस्टम में लिक्विडिटी डाल रहा है। यील्ड स्थिर करने के लिए ओएमओ की फि्क्वैंसी बढ़ानी पड़ सकती है। इस तिमाही में ड्यूरेशन में टैक्टिकल अवसर बन सकते हैं। ऊंचा टर्म प्रीमियम (~140 बीपीएस) यील्ड में नरमी की गुंजाइश देता है, जिससे 10–15 साल के सरकारी बॉन्ड आकर्षक लगते हैं। इसलिए फिक्स्ड इनकम पोर्टफोलियो में अक्रूअल-आधारित स्ट्रैटेजी को कोर एलोकेशन रखना चाहिए।
पिछले साल सोना और चांदी ने शानदार रिटर्न दिए। सोना स्ट्रक्चरल और नीतिगत वजहों से मजबूत है। फिस्कल असंतुलन, करेंसी डिबेसमेंट और अनिश्चित मौद्रिक नीति के बीच इसे एक स्ट्रैटेजिक एसेट के रूप में रखना चाहिए। वहीं, चांदी में सोलर, ईवी और टेक्नोलॉजी से बढ़ती इंडस्ट्रियल डिमांड के चलते तेजी है, लेकिन ज्यादा उतार-चढ़ाव संभव है।
भारतीय रियल एस्टेट में हाल के वर्षों में मजबूत ग्रोथ और कैपिटल फ्लो रहा है। कमर्शियल रियल एस्टेट, खासकर GCCs के विस्तार से आगे भी मजबूत रहने की उम्मीद है। हालांकि, डायरेक्ट कमर्शियल रियल एस्टेट बड़े पूंजी निवेश के चलते संस्थागत निवेशकों के लिए ज्यादा उपयुक्त है।
मोतीलाल ओसवाल वेल्थ का मानना है कि रियल एस्टेट साइकिल के मध्य चरण में है। कोविड के बाद 3–4 वर्षों में कीमतें तेज बढ़ीं। अब वॉल्यूम से ग्रोथ दिखेगी। हालांकि, कीमतों में बढ़ोतरी सीमित रह सकती है। इसलिए 2026 में रेजिडेंशियल रियल एस्टेट से सिंगल-डिजिट रिटर्न की उम्मीद है, क्योंकि रेंटल यील्ड 2–3% है। आगे के रिटर्न माइक्रो-मार्केट चयन, डेवलपर की क्वॉलिटी और एक्जीक्यूशन पर निर्भर करेंगे।
पेशेवर प्रबंधन और सेबी फ्रेमवर्क के समर्थन के साथ पोर्टफोलियो का 5–10% हिस्सा REITs में निवेश करना चाहिए। इससे स्थिरता और नियमित आय में मदद मिलेगी।
(डिस्क्लेमर: यहां निवेश संबंधी सलाह वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी की है। बिजनेस स्टैंडर्ड इसका समर्थन नहीं करता है। निवेश संबंधी कोई भी फैसला करने से पहले अपने एडवाइजर्स से परामर्श कर लें।)