लगातार दूसरे महीने इक्विटी योजनाओं में निवेश घटा क्योंकि बाजार में हो रहे उतारचढ़ाव से निवेशकों की अवधारणा पर असर पड़ा। मई में 50 शेयरों वाला निफ्टी 2.8 फीसदी टूटा जबकि इससे पिछले महीने में उसमें मजबूत सुधार नजर आया था।
एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया के आंकड़ोंं के मुताबिक, इक्विटी योजनाओं में कुल 5,256 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो इससे पिछले महीने के मुकाबले 15 फीसदी कम है।
एसबीआई म्युचुअल फंड के कार्यकारी निदेशक और मुख्य विपणन अधिकारी डी पी सिंह ने कहा, तेजी के बाद चूंकि बाजार एकीकृत हुआ, लिहाजा निवेशकों ने निवेश निकासी पर विचार किया। साथ ही नए आवंटन को लेकर भी निवेशकों की इच्छा कम रही।
इस बीच, सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के जरिए मासिक योगदान भी तीन फीसदी घट गया। मई में एसआईपी के जरिये 8,123 करोड़ रुपये आए जबकि एक महीने पहले यह आंकड़ा 8,376 करोड़ रुपये रहा था।
विशेषज्ञों ने कहा कि एसआईपी के जरिए हुए निवेश ने मासिक इक्विटी निवेश को थोड़ा सहारा दिया। मॉर्निंगस्टार इंडिया के निदेशक कौस्तुभ बेलापुरकर ने कहा, इक्विटी फंडों में निवेश हालांकि अप्रैल के मुकाबले कम रहा, लेकिन यह सकारात्मक बना हुआ है, जिसकी वजह एसआईपी के जरिए हुआ निवेश है। बाजार के उतारचढ़ाव और कोविड-19 के कारण अनिश्चित आर्थिक माहौल को देखते हुए निवेशकों ने लार्जकैपव मल्टी कैप फंडों को तरजीह दी।
लार्जकैप व मिडकैप फंडों को छोड़कर इक्विटी की सभी श्रेणियों में निवेश घटा। लार्जकैप व
मिडकैप श्रेणी में निवेश मई में दोगुने से ज्यादा बढ़कर 703 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
कई वजहों से मई में बाजारों पर दबाव रहा। विश्लेषकों ने कहा कि बढ़त के परिदृश्य को लेकर चिंता, सरकारी राहत पैकेज पर निराशा और कोविड-19 के बढ़ते मामलों ने अवधारणा को कमजोर करने में योगदान किया।
अप्रैल में 14 फीसदी की बढ़त के बाद बाजार ने मई का महीना लाल निशान के साथ समाप्त किया।
डेट के मोर्चे पर क्रेडिट रिस्क फंडों से शुद्ध रूप से 5,173.04 करोड़ रुपये की निकासी हुई। हालांकि शुद्ध निकासी एक महीने पहले के मुकाबले काफी ज्यादा कम रही क्योंकि तब फ्रैंकलिन टेम्पलटन के घटनाक्रम के कारण 19,000 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई थी। तब फ्रैंकलिन ने छह योजनाएं बंद करने की घोषणा की थी। क्रेडिट रिस्क फंडोंं से निवेशकों के निकलने के बाद कॉरपोरेट बॉन्ड फंडों और बैंंकिंग व पीएसयू डेट फंडोंं में निवेश आया। कॉरपोरेट बॉन्ड फंडों में 3,831.52 करोड़ रुपये का निवेश आया जबकि बैंकिंग व पीएसयू डेट फंडोंं को मई में 8,873.35 करोड़ रुपये का निवेश मिला।
सिंह ने कहा, निवेशक सुरक्षित डेट फंडों की ओर देख रहे हैं। क्रेडिट रिस्क फंडों के लेकर निवेशकों का रुझान कमजोर रहा है। क्रेडिट रिस्क और ड््यूरेशन रिस्क के बीच निवेशक ड्यूरेशन रिस्क को शायद ज्यादा पसंद करेंगे।
मई में गिल्ट फंडों में 1,947.08 करोड़ रुपये का निवेश आया। ये फंड राज्य सरकार या केंद्र सरकार की तरफ से जारी ऋण प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं।
एक अन्य क्रेडिट ओरिएंटेड श्रेणी मीडियम ड््यूरेशन से शुद्ध रूप से 1,519.72 करोड़ रुपये की निवेश निकासी हुई।
इस बीच, शॉर्ट ड्यूरेशन वाली श्रेणी में मई में सकारात्मक निवेश हुआ जबकि इससे पिछले महीने इससे निकासी हुई थी।
मई में लिक्विड फंडों में निवेश 10 फीसदी घटकर 61,870.87 करोड़ रुपये रहा। आर्बिट्रेज योजनाओं में निवेश 64 फीसदी उछलकर 10,806 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। विशेषज्ञों ने कहा कि अगर बाजार में उतारचढ़ाव जारी रहता है और वायदा की कीमतें नकदी बाजार के मुकाबले कम हो तो इस श्रेणी में चुनौती दिख सकती है।