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2026 में कौन सा सेक्टर बनेगा रॉकेट? BFSI, हेल्थकेयर और मिडकैप पर विशेषज्ञ की पैनी नजर

इनक्रेड वेल्थ के योगेश कालवाणी का कहना है कि GDP रिकवरी, कम ब्याज दरें और बेहतर वैल्यूएशन 2026 में शेयर बाजार को 12–15% रिटर्न दिला सकते हैं

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सिराली गुप्ता   
Last Updated- December 05, 2025 | 9:42 AM IST

इनक्रेड वेल्थ के हेड ऑफ इन्वेस्टमेंट्स योगेश कालवाणी का कहना है कि आने वाले साल में शेयर बाजार अच्छा प्रदर्शन कर सकता है। GDP में सुधार, ब्याज दरों में कमी और वैल्यूएशन का सामान्य होना। ये सब फैक्टर 2026 में बाजार को 12–15% तक रिटर्न दे सकते हैं। सिराली गुप्ता से ईमेल इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि वे बड़े शेयरों के साथ चुनिंदा मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश को बेहतर मानते हैं। सेक्टरों में BFSI और हेल्थकेयर उनकी पसंद है।

मौजूदा वैल्यूएशन को देखते हुए क्या अगले 2–3 साल में निवेशकों को रिटर्न की उम्मीदें कम करनी चाहिए?

पिछले साल की ऊंचाइयों के मुकाबले अब वैल्यूएशन काफी सामान्य स्तर पर आ गए हैं। आने वाली 2–3 तिमाहियों में कम ब्याज दरों और GST से बढ़ी खपत की वजह से कंपनियों की कमाई में सुधार दिख सकता है। लेकिन लगातार 13–14% की कमाई वृद्धि तभी संभव है जब देश का नॉमिनल GDP फिर से 11–12% के आसपास पहुंचे। अभी यह 9% से नीचे है। इसलिए जब तक GDP तेज नहीं होती, बाजार का रिटर्न भी लो डबल डिजिट यानी 10–12% के आसपास रह सकता है।
निवेशकों को 2–3 महीने में धीरे-धीरे पैसा लगाना चाहिए और लंबी अवधि की सोच रखनी चाहिए।

2026 में बड़े शेयर, मिडकैप और स्मॉलकैप- किसमें बेहतर मौका है?

बड़े शेयर (लार्जकैप) अपनी सही कीमत के आसपास ट्रेड कर रहे हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप अब भी अपनी पुरानी औसत कीमतों से करीब 20% महंगे हैं। लेकिन अगर उनकी कमाई की गति देखें, जो अभी भी 20% के करीब है, तो ये वैल्यूएशन उतने महंगे नहीं लगते। 2025 में इन श्रेणियों ने निफ्टी से कम प्रदर्शन किया है। लेकिन ब्याज दरों में कमी, कमाई में सुधार और अमेरिका के टैरिफ डील जैसी अच्छी खबरों से मिडकैप और स्मॉलकैप में चुनिंदा अच्छे मौके मिल सकते हैं।

आने वाली RBI पॉलिसी और 2026 में क्या उम्मीद है?

Q2 FY26 की मजबूत GDP और हाल की 0.3% की कम महंगाई देखते हुए हमें लगता है कि RBI अपनी पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं करेगी। पहले की बड़ी CRR और रेपो रेट कटौती का असर अभी भी अर्थव्यवस्था में दिख रहा है, इसलिए RBI इंतजार करना चाहेगी। अगर RBI अभी दरें और कम करता है तो भारत और अमेरिका के 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का अंतर बहुत कम हो जाएगा, जो रुपये के लिए ठीक नहीं है। विदेशी निवेश भी कमजोर है, इसलिए RBI ब्याज दरें कम आकर्षक नहीं बनाना चाहेगी।

क्या भारत या अन्य उभरते बाजारों (EMs) में निवेश बेहतर रहेगा?

यह भारत बनाम EMs का सवाल नहीं है। भारत हर भारतीय निवेशक की मुख्य पसंद रहेगा। लेकिन हम 15–20% पैसा ग्लोबल शेयरों में लगाने की सलाह देते हैं ताकि पोर्टफोलियो में विविधता बनी रहे। चुनिंदा EMs खासकर ग्रेटर चाइना, अभी भी बेहतर वैल्यू दे रहे हैं। हम AI, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स जैसे थीम में विदेशी प्राइवेट मार्केट के मौके भी देखते हैं। अमेरिका के बड़े 7 टेक स्टॉक्स में आई तेज रैली को लेकर हमारी राय थोड़ी सतर्क है।

2026 के लिए आपकी निवेश रणनीति क्या है?

फिक्स्ड इनकम में हम हाई-यील्ड और एक्रूअल रणनीतियों को पसंद करते हैं। इक्विटी बाजार के लिए हमारा नजरिया सकारात्मक है- GDP रिकवरी, कम ब्याज दरें और बेहतर वैल्यूएशन इसकी वजह है। हम उम्मीद करते हैं कि 2026 में शेयर बाजार 12–15% रिटर्न दे सकता है। हम BFSI, हेल्थकेयर और चुनिंदा मिडकैप व स्मॉलकैप को प्राथमिकता देते हैं।

नए निवेशक कैसे पैसा लगाएं- एक साथ या किस्तों में?

हम किस्तों में निवेश (staggered investment) की सलाह देते हैं, ताकि एक ही वक्त में बड़ी राशि लगाने का जोखिम कम हो।

लार्जकैप में 1–3 महीने में धीरे-धीरे निवेश

मिडकैप-स्मॉलकैप में 3–4 महीने में निवेश

हम लंपसम निवेश सिर्फ बहुत बड़े बाजार गिरावट वाले समय में सुझाते हैं, जैसे कोविड के दौरान हुआ था।

सोना और चांदी का रिटर्न अगले 12–24 महीनों में कैसा रहेगा?

कम ब्याज दरें और कमजोर डॉलर आमतौर पर सोने को सपोर्ट करते हैं। लेकिन पिछले 2 सालों की तेज रैली के बाद सोने में अब थोड़ी सुस्ती आ सकती है। सोना एक अच्छा हेज रहेगा, लेकिन बहुत बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है। चांदी की कीमतें सप्लाई की कमी की वजह से रिकॉर्ड ऊंचाई पर गई हैं, लेकिन आगे इसमें कुछ समय के लिए रुकावट आ सकती है। निवेशक 3–6 महीने में धीरे-धीरे खरीदारी करें।

First Published : December 5, 2025 | 9:42 AM IST