बॉन्ड बाजार के लिए यह सप्ताह निराश करने वाला रहा है। मंगलवार को वित्त वर्ष 2022-23 के लिए पेश बजट के बाद से बॉन्ड पर प्रतिफल 20 आधार अंक उछल गया है। पिछले पांच वर्षों में बॉन्ड प्रतिफल में इतनी तेजी नहीं दर्ज की गई थी। शुक्रवार को 10 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियों पर प्रतिफल 6.88 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले कारोबार के दौरान प्रतिफल 6.96 प्रतिशत तक उछल गया था। हालांकि साप्ताहिक बॉन्ड नीलामी के बाद कारोबार के अंत में प्रतिफल थोड़ा नीचे आ गया। साप्ताहिक बॉन्ड नीलामी में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बोलियां स्वीकार नहीं की।
10 वर्ष की अवधि के बॉन्ड पर प्रतिफल पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में 5 प्रतिशत कम रहा। बजट में सरकार द्वारा भारी भरकम उधारी की घोषणा के बाद बॉन्ड पर प्रतिफल में तेजी आई है। वित्त वर्ष 2022-23 में सरकार 11.19 लाख करोड़ रुपये बॉन्ड जारी कर जुटाएगी। चालू वित्त वर्ष में सरकार की उधारी 7.76 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
बजट पेश होने के बाद पिछले चार कारोबारी सत्रों के दौरान 10 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले बॉन्ड पर प्रतिफल 20 आधर अंक बढ़ चुका है। 2017 में बजट पेश होने के बाद किसी सप्ताह में बॉन्ड के प्रतिफल में आई यह सर्वाधिक तेजी रही है।
शुक्रवार को आरबीआई ने साप्ताहिक बॉन्ड नीलामी में बोलियां स्वीकार नहीं की। ऐसा लगता है कि कारोबारियों ने ऊंचे प्रतिफल की मांग की होगी इसलिए केंद्रीय बैंक ने बॉन्ड के लिए बोलियां स्वीकार नहीं कीं।
आरबीआई ने 2023 में परिपक्व होने वाले 2,000 करोड़ रुपये मूल्य के बॉन्ड की बिक्री की। दूसरी तरफ 2051 में परिपक्व हो रहे बॉन्ड बेचकर केंद्रीय बैंक ने 8,525 करोड़ रुपये जुटाए। मगर केंद्रीय बैंक ने 2026 और 2035 में परिपक्व हो रहे बॉन्ड बेचने से इनकार कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई बाजार को यह संकेत देना चाहता है कि प्रतिफल काफी तेजी से बढ़ा है मगर वह यह बढ़त सीमित करने के लिए पूरी तरह तैयार है और इसके लिए आवश्यक कदम उठाएगा। बाजार में कारोबारियों को लगता है कि बॉन्ड की कीमतों पर दबाव बना रहेगा।