अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल में उछाल और रुपये में आई कमजोरी के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने देसी बाजार में बिकवाली तेज कर दी है। पिछले दो कारोबारी सत्रों में एफपीआई ने देसी बाजार से करीब 2 अरब डॉलर यानी करीब 15,000 करोड़ रुपये निकाले हैं।
इस साल अब तक एफपीआई की तरफ से देसी शेयरों की कुल बिकवाली करीब 1 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। इस साल रोजाना औसत बिकवाली करीब 2,200 करोड़ रुपये की रही है। हालांकि रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद रोजाना औसत बिकवाली करीब 4,500 करोड़ रुपये पर पहुंच गई।
विशेषज्ञों ने कहा कि विदेशी फंडों की तरफ हो जारी मौजूदा बिकवाली देसी बाजारों में सबसे खराब बिकवाली में से एक रही है। कोविड-19 महामारी के बाद हालांकि देसी शेयरों में उनका निवेश दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा है और इसी पृष्ठभूमि में तेज बिकवाली देखने को मिली है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से प्रोत्साहन पैकेज की वापसी की घोषणा के बाद से ही एफपीआई बिकवाली कर रहे हैं। तेल की कीमतें 14 साल के उच्चस्तर पर पहुंच गई है, इसने भी भारत को लेकर अवधारणा खराब की है।
तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी की भविष्यवाणी की है, वहीं सोमवार को अब तक के निचले स्तर को छू चुके रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और गिरावट की आशंका है।
एवेंडस कैपिटल ऑल्टरनेट स्ट्रैटिजीज के सीईओ एंड्यू हॉलैंड ने कहा, जितने लंबे समय तक अनिश्चितता बनी रहेगी, एफपीआई न सिर्फ भारत में बल्कि कहीं और भी एफपीआई जोखिम नहीं लेना चाहेंगे क्योंंकि उन्हें यह वक्त की जरूरत लगती है। जोखिम प्रबंधक कह सकते हैं कि हमें नहीं पता कि अगला चरण क्या होगा और हमें अभी रकम निकाल लेनी चाहिए। एफपीआई की तरफ से तेज बिकवाली का देसी बाजार के प्रदर्शन पर खासा असर पड़ा है। इस साल अब तक सेंसेक्स 9.3 फीसदी टूट चुका है। अक्टूबर 2021 के सर्वोच्च स्तर से इंडेक्स 14.4 फीसदी नीचे है। इस बीच, बैंक निफ्टी इंडेक्स अपने सर्वोच्च स्तर से 20 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। वित्तीय क्षेत्र पर एफपीआई का भारांक सबसे ज्यादा है और उनकी एक तिहाई से ज्यादा परिसंपत्ति बैंकिंग व एनबीएफसी शेयरों में है।
बाजार के विशेषज्ञों ने कहा कि बाजार में गिरावट और ज्यादा तेज होती, अगर देसी संस्थागत निवेशकों खास तौर से म्युचुअल फंडों ने खरीदारी नहीं की होती। इस साल अब तक म्युचुअल फंडों ने देसी शेयरों में 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा झोंके हैं। इस निवेश का आधा से ज्यादा पिछले दो हफ्तों में हुआ है।
पिछले हफ्ते मॉर्गन स्टैनली ने एक नोट में कहा था, साल 2014 से देसी निवेशकों की तरफ से निवेश में बढ़ोतरी का मतलब यह भी है कि एफपीआई की बिकवाली की भरपाई विगत के उलट हो चुकी है। हालांकि बाजार पर नजर रखने वालों ने कहा कि देसी निवेशकों ने मार्च 2020 के बाद से तेज व सतत गिरावट नहीं देखी है। अगर हालिया गिरावट आगे भी जारी रहती है तो यह देसी निवेशकों का धैर्य डगमगा सकता है।