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एफपीआई कर रहे बिकवाली

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 9:23 PM IST

इस वर्ष की शुरु आत से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) बाजार में जमकर बिकवाली करते आ रहे हैं। शुरू में कुछ समय के लिए एफपीआई ने भारतीय बाजार में रकम झोंकी थी मगर उसके बाद वे 5.7 अरब डॉलर मूल्य से अधिक शेयरों की बिकवाली कर चुके हैं। अक्टूबर से ये निवशेक बाजार से कुल 10.5 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। अक्टूबर से अब तक अगर उन्होंने प्राथमिक बाजार में 5.7 अरब डॉलर की खरीदारी नहीं की होती तो यह आंकड़ा और भी भयावह होता। अल्फानीति फिनटेक में सह-संस्थापक एवं निदेशक यू आर भट ने कहा, ‘ऐसा प्रतीत होता है कि एफपीआई भविष्य के संभावित घटनाक्रम को देखते हुए कमर कस रहे हैं। दुनिया के विकसित बाजारों में महंगाई दर बढऩे से वहां के केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दर बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है। सबकी नजरें इस बात पर टिकी हुई हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व कितनी जल्दी दरें बढ़ाता है। इसका प्रभाव तेजी से उभरते देशों के बाजारों पर होगा।’
तेल की कीमतें उबलने और रूस एवं यूक्रेन के बीच तनाव बढऩे से वैश्विक स्तर पर अनिश्तिचतता और बढ़ गई है। इस वर्ष तेल की कीमतें 20 प्रतिशत से भी बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई हैं। इसके बाद सऊदी अरब ने सोमवार को एशिया, अमेरिका और यूरोप के ग्राहकों के लिए तेल के दाम में इजाफा कर दिया।
क्रेडिट सुइस वेल्थ मैनेजमेंट में विश्लेषक जितेंद्र गोहिल ने कहा, ‘फेडरल रिजर्व अनुमान से कहीं अधिक तेजी से ब्याज दरें बढ़ा रहा है। इसका असर भारत सहित देशों के शेयरों पर हो सकता है। हमें लगता है कि तेल के दाम चढऩे और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के रुख से एफपीआई आगे भी बिकवाली कर सकते हैं।’ हालांकि गोहिल ने कहा कि इन तमाम बातों के बाजवूद शेयर बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रहेगी और भारत के हार्थिक हालात तेजी से सुधरने के बीच शेयरों के नीचे जाने पर निवेशक खरीदारी करने जरूर आगे आएंगे।
भट ने कहा कि पिछले कुछ समय से भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन शानदार रहा है और एफपीआई की नजर में शेयरों का मौजूदा स्तर मुनाफा कमाने के लिए माकूल हो सकता है। इस वर्ष अब तक भारतीय बाजार के संवेदी सूचकांकों में 0.7 प्रतिशत कमी आई है और तेजी से उभरते दूसरे बाजारों की तुलना में इसका प्रदर्शन शानदार रहा है। घरेलू संस्थागत निवेशकों खासकर म्युचुअल फंडों और खुदरा निवेशकों से बाजार को काफी मदद मिली है। म्युचुअल फंडों ने अक्टूबर से जनवरी तक करीब 9 अरब डॉलर मूल्य के शेयरों की बिकवाली की है।
तीसरी तिमाही के दौरान निफ्टी 500 कंपनियों में घरेलू संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी 20 आधार अंक तक बढ़ गई जबकि एफपीआई की हिस्सेदारी 60 अंक तक फिसल गई। भट ने कहा, ‘एफपीआई की बिकवाली का असर झेलने के लिए बाजार में पर्याप्त क्षमता मौजूद है। म्युचुअल फंडों और खुदरा निवेशकों ने निवेश बढ़़ाकर बाजार को काफी मदद पहुंचाई है। अगर एफपीआई ने मार्च 2020 से पहले इस तरह भारी बिकवाली की होती तो बाजार धाराशायी हो गया होता।’

First Published : February 8, 2022 | 11:12 PM IST