facebookmetapixel
व्हीकल रजिस्ट्रेशन में नया रिकॉर्ड: 2025 में 2.8 करोड़ के पार बिक्री, EVs और SUV की दमदार रफ्तारEditorial: गिग कर्मियों की हड़ताल ने क्यों क्विक कॉमर्स के बिजनेस मॉडल पर खड़े किए बड़े सवालभारत का झींगा उद्योग ट्रंप शुल्क की चुनौती को बेअसर करने को तैयारभारत में राज्यों के बीच निवेश की खाई के पीछे सिर्फ गरीबी नहीं, इससे कहीं गहरे कारणमनरेगा की जगह आए ‘वीबी-जी राम जी’ पर सियासी घमासान, 2026 में भी जारी रहने के आसारबिना बिल के घर में कितना सोना रखना है कानूनी? शादी, विरासत और गिफ्ट में मिले गोल्ड पर टैक्स के नियम समझेंMotilal Oswal 2026 Stock Picks| Stocks to Buy in 2026| मोतीलाल ओसवाल टॉप पिक्सNew Year 2026: 1 जनवरी से लागू होंगे 10 नए नियम, आपकी जेब पर होगा असर2026 की पहली तिमाही में PPF, SSY समेत अन्य स्मॉल सेविंग स्कीम्स पर कितना मिलेगा ब्याज?1 फरवरी से सिगरेट, बीड़ी, पान मसाला और तंबाकू उत्पाद होंगे महंगे, GST बढ़कर 40% और एक्साइज-हेल्थ सेस लागू

कम पीई वाली कंपनियों में तेजी से बढ़ रहा है कारोबार

Last Updated- December 07, 2022 | 6:48 PM IST

बीएस-200 में सूचीबध्द कई कंपनियां जिनका कि प्राइस टू अर्निंगस (पीई)10 या उससे कम रहा है उनका प्रदर्शन पिछले सात महीनों में लगभग तिगुना हो गया है।


बिजनेस स्टैंडर्ड की विशेष बीएस-200 की सूची में ऐसे शेयर शामिल हैं जिनमें नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में वायदा कारोबार होता है और बीएसई और एनएसई के कुल टर्नओवर में इनकी हिस्सेदारी 72 प्रतिशत है। इस सूची में इस समय 65 शेयर हैं जिनका पीई काफी कम है जबकि जनवरी 2008 में जब सेंसेक्स रिकार्ड ऊंचाई पर था, ऐसे कम पीई वाले शेयरों की संख्या केवल 24 थी।

तब से सूचकांक 39 फीसदी गिर चुका है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के बीएस-200 में शामिल शेयर फिलहाल 14.6 पीई मल्टिपल पर कारोबार कर रहे हैं। जबकि यह 8 जनवरी 2008 को जब बाजार अपने उच्चतम स्तर पर था, यह कारोबार 25.5 पीई मल्टिपल पर हो रहा था।

बीएस-200 का मौजूदा पीई कुछ हद तक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की वजह से भी गिरा हुआ है जो इस समय और नीचे यानी 11.1 के पीई गुणक पर कारोबार कर रहे हैं। इस उपक्रमों को छोड़ दिया जाए तो निजी क्षेत्र की कंपनियां इस समय 16.7 पीई मल्टिपल पर कारोबार कर रही हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल कमजोर पीई का दौर जारी रहेगा क्योंकि जिन कारणों से बाजार में गिरावट आई है उसके अभी कुछ समय तक बने रहने की संभावना है। भारतीय बाजारों आई मंदी का मुख्य कारण महंगाई, रिजर्व बैंक द्वारा लागू की गई कड़ी मौद्रिक नीतियां, कमोडिटी की कीमतों पर नियंत्रण और विदेशी निवेशकों द्वारा इस साल अब तक 73,242 करोड रुपये का निवेश निकाल ले जाना है।

तरलता पर नियंत्रण लाने के लिए किए गए उपाय और ब्याज दरों में की गई हाल की बढ़ोतरी का बैंकों पर बुरा असर पडा है। इसके कारण बैंकों के पीई इस साल 8 जनवरी के 21.8 के मुकाबले अब तक गिरकर औसतन 10.8 केस्तर पर पहुंच गया है। सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव भारतीय स्टेट बैंक पर पडा है जिसके पीई में आधे से ज्यादा गिरावट आई है और यह 9.63 के स्तर पर पहुंच गया है।

हालांकि बाजार मूल्य में गिरावट आने के बाद भी आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक के शेयरों का पीई वैल्यू अभी भी बेहतर है। ब्याज दरों आई तेजी का असर ऑटोमोबाइल और जमीन जायदाद कारोबार के शेयरों पर भी पडा है। ऑटोमोबाइल कं पनियों के पीई में गिरावट आई है और यह 16.33 के स्तर से नीचे गिरकर 11.2 तक पहुंच गया है। जबकि जमीन जायदाद कारोबार से जुड़ी कंपनियों के शेयरों के पीई भी 70 केस्तर से गिरकर 10 पर आ पहुंचे हैं।

सेक्टरों का पीई

                           8 जनवरी            21 अगस्त
कंस्ट्रक्शन           89.38                   23.84
रियालिटी            59.77                   10.18
इंजीनियरिंग        69.22                   29.90
कैपिटल गुड्स   52.30                   26.77 
टेलिकॉम             40.11                   18.70
बैंक                     25.82                   10.81
स्टील                 18.75                     9.62
उर्वरक                 18.08                     9.88
आईटी               23.00                   16.03
ऑटोमोबाइल   16.33                    11.16
कुल                 25.50                     14.62

First Published - August 27, 2008 | 9:51 PM IST

संबंधित पोस्ट