facebookmetapixel
SME शेयर मामले में 26 लोगों पर सेबी की पाबंदी, ₹1.85 करोड़ का जुर्माना लगायाRupee vs Dollar: कंपनियों की डॉलर मांग से रुपये में कमजोरी, 89.97 प्रति डॉलर पर बंदGold-Silver Price: 2026 में सोने की मजबूत शुरुआत, रिकॉर्ड तेजी के बाद चांदी फिसलीतंबाकू कंपनियों पर नए टैक्स की चोट, आईटीसी और गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयरों में भारी गिरावटम्युचुअल फंड AUM ग्रोथ लगातार तीसरे साल भी 20% से ऊपर रहने की संभावना2025 में भारती ग्रुप का MCap सबसे ज्यादा बढ़ा, परिवार की अगुआई वाला देश का तीसरा सबसे बड़ा कारोबारी घराना बनावित्त मंत्रालय का बड़ा कदम: तंबाकू-सिगरेट पर 1 फरवरी से बढ़ेगा शुल्कAuto Sales December: कारों की बिक्री ने भरा फर्राटा, ऑटो कंपनियों ने बेच डालें 4 लाख से ज्यादा वाहनकंपस इंडिया अब ट्रैवल रिटेल में तलाश रही मौके, GCC पर बरकरार रहेगा फोकसलैब में तैयार हीरे की बढ़ रही चमक, टाइटन की एंट्री और बढ़ती फंडिंग से सेक्टर को मिला बड़ा बूस्ट

कम पीई वाली कंपनियों में तेजी से बढ़ रहा है कारोबार

Last Updated- December 07, 2022 | 6:48 PM IST

बीएस-200 में सूचीबध्द कई कंपनियां जिनका कि प्राइस टू अर्निंगस (पीई)10 या उससे कम रहा है उनका प्रदर्शन पिछले सात महीनों में लगभग तिगुना हो गया है।


बिजनेस स्टैंडर्ड की विशेष बीएस-200 की सूची में ऐसे शेयर शामिल हैं जिनमें नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में वायदा कारोबार होता है और बीएसई और एनएसई के कुल टर्नओवर में इनकी हिस्सेदारी 72 प्रतिशत है। इस सूची में इस समय 65 शेयर हैं जिनका पीई काफी कम है जबकि जनवरी 2008 में जब सेंसेक्स रिकार्ड ऊंचाई पर था, ऐसे कम पीई वाले शेयरों की संख्या केवल 24 थी।

तब से सूचकांक 39 फीसदी गिर चुका है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के बीएस-200 में शामिल शेयर फिलहाल 14.6 पीई मल्टिपल पर कारोबार कर रहे हैं। जबकि यह 8 जनवरी 2008 को जब बाजार अपने उच्चतम स्तर पर था, यह कारोबार 25.5 पीई मल्टिपल पर हो रहा था।

बीएस-200 का मौजूदा पीई कुछ हद तक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की वजह से भी गिरा हुआ है जो इस समय और नीचे यानी 11.1 के पीई गुणक पर कारोबार कर रहे हैं। इस उपक्रमों को छोड़ दिया जाए तो निजी क्षेत्र की कंपनियां इस समय 16.7 पीई मल्टिपल पर कारोबार कर रही हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल कमजोर पीई का दौर जारी रहेगा क्योंकि जिन कारणों से बाजार में गिरावट आई है उसके अभी कुछ समय तक बने रहने की संभावना है। भारतीय बाजारों आई मंदी का मुख्य कारण महंगाई, रिजर्व बैंक द्वारा लागू की गई कड़ी मौद्रिक नीतियां, कमोडिटी की कीमतों पर नियंत्रण और विदेशी निवेशकों द्वारा इस साल अब तक 73,242 करोड रुपये का निवेश निकाल ले जाना है।

तरलता पर नियंत्रण लाने के लिए किए गए उपाय और ब्याज दरों में की गई हाल की बढ़ोतरी का बैंकों पर बुरा असर पडा है। इसके कारण बैंकों के पीई इस साल 8 जनवरी के 21.8 के मुकाबले अब तक गिरकर औसतन 10.8 केस्तर पर पहुंच गया है। सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव भारतीय स्टेट बैंक पर पडा है जिसके पीई में आधे से ज्यादा गिरावट आई है और यह 9.63 के स्तर पर पहुंच गया है।

हालांकि बाजार मूल्य में गिरावट आने के बाद भी आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक के शेयरों का पीई वैल्यू अभी भी बेहतर है। ब्याज दरों आई तेजी का असर ऑटोमोबाइल और जमीन जायदाद कारोबार के शेयरों पर भी पडा है। ऑटोमोबाइल कं पनियों के पीई में गिरावट आई है और यह 16.33 के स्तर से नीचे गिरकर 11.2 तक पहुंच गया है। जबकि जमीन जायदाद कारोबार से जुड़ी कंपनियों के शेयरों के पीई भी 70 केस्तर से गिरकर 10 पर आ पहुंचे हैं।

सेक्टरों का पीई

                           8 जनवरी            21 अगस्त
कंस्ट्रक्शन           89.38                   23.84
रियालिटी            59.77                   10.18
इंजीनियरिंग        69.22                   29.90
कैपिटल गुड्स   52.30                   26.77 
टेलिकॉम             40.11                   18.70
बैंक                     25.82                   10.81
स्टील                 18.75                     9.62
उर्वरक                 18.08                     9.88
आईटी               23.00                   16.03
ऑटोमोबाइल   16.33                    11.16
कुल                 25.50                     14.62

First Published - August 27, 2008 | 9:51 PM IST

संबंधित पोस्ट